पिछले कुछ महीनों से नेपाल में पर्यटन और होटल व्यवसाय पूरी तरह से चौपट हो गया है और यहां की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।

आईएमएफ ने कहा है कि पर्यटकों के न आने और सोशल डिस्टेंसिंग या लॉकडाउन की वजह से देश की आर्थिक स्थिति खराब है, ऐसे में तत्काल इस फंड का सही जगह इस्तेमाल होना जरूरी है।

आईएमएफ ने कहा है कि नेपाल के अधिकारियों को इस वक्त तत्काल लोगों का वेतन देने, मेडिकल स्टाफ को आवश्यक सुविधाएं और सामान उपलब्ध कराने के साथ ही नए क्वारंटीन सेंटर और अस्पताल बनने के लिए की जरूरत है, इसलिए इस फंड को तत्काल इन कामों में खर्च किया जाना चाहिए चाहिए।

इसके अलावा नेपाल के व्यापार और उद्योग के क्षेत्र को पुनर्जीवित करने की भी तत्काल आवश्यकता महसूस की जा रही है।

जाहिर है आईएमएफ की इस बड़ी मदद से नेपाल को अच्छी खासी राहत मिली है। लेकिन फंड का सही इस्तेमाल करने और इसे जरूरतमंदों के साथ साथ देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में सरकार कैसे उपयोग करती है, इसकी निगरानी सबसे ज्यादा जरूरी है।

कोविड -19 से जंग लड़ने के नाम पर विश्व बैंक और आईएमएफ जैसी संस्थाओं से मिलने वाली इस मदद पर निगाह तो सबकी रहती है, लेकिन इसे लेकर सियासत और संगठनों के आरोपों से सरकार कैसे बचेगी, यह सुनिश्चित करने को लेकर तमाम संस्थाएं चाहती हैं कि इसकी सख्त निगरानी संभव है।





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