• डब्ल्यूएचओ ने कहा – लॉकडाउन में मंजी से छूट और हल्के प्रतिबंध लगाकर इम्यूनिटी बढ़ने के बारे में गलत सोचते हैं
  • संगठन ने कहा- कोई भी देश को विभाजित -19 से तुलना के लिए अपनी आबादी पर कोई “जादू” चलाकर उसमें इम्यूनिटी को भर सकता है

दैनिक भास्कर

13 मई, 2020, 07:48 AM IST

जेनेवा। बिना वैक्सीन कोरोनावायरस से लड़ रही दुनिया के लिए अभी इम्यूनिटी और लिंगज ही उम्मीद की किरण हैं। लेकिन, कई हफ्तों से इम हर्ड इम्यूनिटी ’पाने के नाम पर बहस चल रही है। मंगलवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) भी इस बहस में कूद पड़ा। उन्होंने सामूहिक प्रतिरोधकता के इस नए विचार या अवधारणा को खतरनाक बताया।
दरअसल, हर्ड इम्यूनिटी एक पेचीदा गणितीय सोच है। कुछ वैज्ञानिक इसे कोरोना नियंत्रण के लिए सही भी मान रहे हैं। इसीलिए, डब्लूएचओ को दखल देना पड़ा। डब्ल्यूएचओ की चेतावनी क्या है

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन में स्वास्थ्य इमरजेंसी डायरेक्टर डॉ। माइकल रेयन ने दुनिया की सरकारों की उस सोच की भी आलोचना की है जिसमें वे लॉकडाउन में मर्जी से छूट और बेहद हल्के प्रतिबंध लगाकर यह सोच रहे हैं कि अचानक से उनके देशवासियों “जादुई इम्यता” प्राप्त कर लेंगे। ।
  • डॉ। रेयान ने चेतावनी देते हुए कहा कि, ‘यह सोचना गलत था और आज भी है कि कोई भी देश को विभाजित -19 के लिए अपनी आबादी पर कोई “जादू” चलाकर उसमें इम्यूनिटी भर देगा। इंसान जानवरों के झुंड नहीं हैं। हर्ड इम्यूनिटी की बात तब करते हैं, जब यह देखना होता है कि किसी आबादी में कितने लोगों को वैक्सीन की जरूरत है।
  • यह एक बहुत ही खतरनाक अंकगणित होगा। इससे लोग, उनका जीवन और उनकी पीड़ा का समीकरण उलझ जाएगा। जिम्मेदार सदस्य देशों को हर एक व्यक्ति को महत्व देना चाहिए। कोरोना बेहद गंभीर बीमारी है। यह दुश्मन नंबर एक है। हम इसी बात को बार-बार कह रहे हैं। ‘
  • डब्ल्यूएचओ की कोविद -19 रिस्पांस टीम की तकनीकी प्रमुख डॉ मारिया वन के मालिकोव ने भी कहा- विजेताओं के आंकड़ों से पता चला है कि अभी जनसंख्या का बहुत कम स्तर कोरोना से भिन्न है। लोगों में कम अनुपात में भारज हैं। यह महत्वपूर्ण है … क्योंकि हम हर्ड इम्यूनिटी शब्द का इस्तेमाल तब करते हैं जब लोग को वैक्सीन लगाने के बारे में सोचते हैं। ‘

क्या होता है हर्ड इम्यूनिटी, 5 बड़ी बातें

  • हर्ड इम्यूनिटी में हर्ड शब्द का मतलब झुंड से है और इम्यूनिटी यानि बीमारियों से लड़ने की क्षमता है। इस तरह हर्ड इम्यूनिटी का मतलब हुआ कि एक पूरी झुंड या आबादी की बीमारियों से लड़ने की सामूहिक रोग प्रतिरोधकता पैदा हो जाए।
  • इस वैज्ञानिक आइडिया के अनुसार, यदि कोई बीमारी किसी समूह के बड़े हिस्से में फैल जाती है तो इंसान की इम्यूनिटी उस बीमारी से लड़ने में सक्षम लोगों की मदद करता है। इस दौरान जो लोग बीमारी से लड़कर पूरी तरह ठीक हो जाते हैं, वो बीमारी से ’इम्यून’ हो जाते हैं। यानी उनमें प्रतिरक्षा के गुण पैदा हो जाते हैं। इसके बाद झुंड के बीच मौजूद अन्य लोगों तक वायरस का पहुंचना बहुत मुश्किल होता है। एक सीमा के बाद इसका फैलाव रुक जाता है। यह केवल ‘हर्ड इम्यूनिटी’ कहा जा रहा है।
  • हर्ड इम्युनिटी महामारियों के इलाज का एक पुराना तरीका है। व्यवहारिक तौर पर इसमें बड़ी आबादी को नियमित वैक्सीन लगाए जाते हैं जिससे लोगों के शरीर में प्रतिरक्षी औरज बन जाते हैं। जैसा चेचक, खसरा और पोलियो के साथ हुआ। लोगों में लोगों को इनकी वैक्सीन दी गई और ये बीमारी अब लगभग खत्म हो गई हैं।
  • वैज्ञानिकों का ही अनुमान है कि किसी देश की आबादी में को विभाजित -19 महामारी के खिलाफ हर्ड इम्यूनिटी केवल विकसित हो सकती है, जब कोरोनावायरस की लगभग 60 प्रतिशत आबादी को संवेदनशील कर दिया गया है। वे रोगी अपने शरीर में उसके खिलाफ सूरज बनाकर और उससे लड़कर इम्यून हो गए हैं।
  • विशेषज्ञों के मुताबिक, कोविद -19 संक्रमण के मामलो में तो मौजूदा हालात को देखते हुए 60 से 85 प्रतिशत आबादी में प्रतिरक्षा आने के बाद ही हर्ड इम्यूनिटी बन पाएगी। पुरानी बीमारी डिप्थिरिया में हर्ड इम्यूनिटी का आंकड़ा 75 प्रतिशत, पोलियो में 85 प्रतिशत और खसरा में लगभग 95 प्रतिशत।

कोरोना में पहली बार ब्रिटेन में चर्चा चली

  • मार्च में पहली बार ब्रिटिश सरकार ने उम्मीद जताई थी कि उनके यहां फैलने से कोरोना को हर्ड इम्यूनिटी से नियंत्रित किया जा सकता है। इसके समर्थकों की ओर से तर्क दिया गया था कि वायरस को आबादी में फैलने दिया जाना चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इम्यून हो सकें। हालांकि बाद में देश के स्वास्थ्य सचिव मैट हैनकॉक ने इस बात से इनकार किया कि यह सोच कभी भी सरकार की रणनीति का हिस्सा थी।

अब दुनिया में स्वीडन मॉडल की चर्चा

  • दुनिया में सिर्फ स्वीडन एकमात्र देश है जहां पर बिना वैक्सीन के हर्ड इम्युनिटी को अप्रोक्ष रूप से आजमाया गया है।) वहाँ के 2000 से बहुत अधिक रिसर्चरों ने बकायदा एक याचिका पर डायरीखत द्वारा सरकार से कहा कि हमें हर्ड इम्युनिटी पर आगे बढ़ना चाहिए।

  • स्वीडन ने अपने यहां छोटे बच्चों के लिए 9 वीं कक्षा तक के स्कूल, रेस्तरां, स्टोर, फायर, बार और अन्य व्यवसायों को भी बंद नहीं किया। सवा करोड़ की आबादी वाले इस देश में 70 साल से ऊपर के बुजुर्गों का खास ध्यान रखा गया और सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती और पालन हुआ। अब बुकिंग में इसी मॉडल की चर्चा हो रही है।
  • worldometers.info के मुताबिक स्वीडन में कोरोनावायरस के 27 हजार 272 केस सामने आए हैं जिसमें से 4 हजार 971 लोग ठीक हो गए जबकि 3 हजार 313 लोगों की मौत हो गई। आंकड़ाें के लिहाज से स्वीडन में डेथ रेट 40 प्रतिशत और रिकवरी रेट 60% है।

क्या भारत भी हर्ड इम्यूनिटी की राह पर है?

  • भारत में ये विषय लॉकडाउन 2.0 खुलने के बाद 3 मई के बाद से चर्चा में आ गया था। अब लॉकडाउन 3.0 खुलने के दिन नजदीक आने के कारण इस पर सभी की नजर है। अभी तक हमारे यहाँ लगभग 74 हजार मामले हैं। 2415 लोगों की मौत हो चुकी है। 24 हजार 125 मरीज रिकवर हो चुके हैं।

  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा- हमारे यहां कोरोना के मरीजों के ठीक होने की दर हर दिन बेहतर हो रही है। 13 मई तक यह 31.7% है। कोरोना से मृत्यु की दर हमारे यहाँ दुनिया में सबसे कम 3.2% है। जबकि, दुनिया में यह दर 7 से 7.5% है।
  • विशेषज्ञों के मुताबिक, हर्ड इम्यूनिटी पाना भारत जैसी बड़ी आबादी वाले देश के लिए बेहद गंभीर विषय है। बिना वैक्सीन के पुराने महामारियों में लोगों के मरने की संख्या भी इस ओर इशारा करती है कि भारत में लोगों को संक्रमण से बचानेकर रखना बहुत जरूरी है।





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