वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Updated Sun, 07 Jun 2020 11:15 AM IST

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)
– फोटो : PTI

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक आदेश फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। दरअसल, ट्रंप के कार्यकारी आदेश जारी करने के बाद उन्हें अमेरिकी आदेश के तहत मिली सुरक्षा सीमित हो सकती है। 

इन सबकी शुरुआत ट्रंप के ट्वीट के साथ ट्विटर द्वारा सच्चाई जांचने वाले लिंक लगाने से हुई थी। ट्विटर ने ट्रंप के ट्वीट को सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरनाक बताया है। हालांकि, फेसबुक ने अपने प्लेटफॉर्म से इस तरह के पोस्ट को नहीं हटाया है। 

कहा जा रहा है कि ट्रंप का कार्यकारी आदेश अमेरिकी समाज को अभिव्यक्ति की आजादी देता है, लेकिन वास्तव में यह इसका उल्टा है। अमेरिकी राष्ट्रपति लंबे वक्त से यह दलील दे रहे हैं कि इंटरनेट प्लेटफॉर्म दक्षिणपंथी अनुदारवादी कंटेंट से पक्षपात करते हैं। 

राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेश में 1996 के कम्युनिकेशन डीसेंसी एक्ट की धारा 230 में परिवर्तन का प्रावधान है। यह कानून इंटरनेट को अतिवादी, नुकसानदेह और भड़काउ कंटेंट को मुकदमे के भय के बिना मॉडरेट करने की छूट देता है। इंटरनेट प्लेटफार्मों ने धारा 230 को किसी भी कार्रवाई से पूरी सुरक्षा देने का प्रावधान मान लिया है। 

अदालतों ने भी प्लेटफॉर्मों को आतंकवाद, मानहानि, झूठी जानकारी, बाल यौन शोषण सहित अन्य मामलों को सीधा बढ़ावा देने को एक तरह से स्वीकृति प्रदान कर दी है। नतीजतन धारा 230 इंटरनेट प्लेटफार्मों के लिए सुरक्षा कवच और सब्सिडी के समान है क्योंकि प्लेटफार्म जो नुकसान करते हैं, उसकी उन्हें कीमत नहीं चुकानी पड़ती है।

वहीं, लोगों का कहना है कि लोकतंत्र और स्वास्थ्य को भारी क्षति के बिना हम इंटरनेट प्लेटफॉर्मों के फायदों का आनंद नहीं उठा सकते हैं। लेकिन, नियमन का लक्ष्य अभिव्यक्ति पर पाबंदी नहीं होनी चाहिए। यह अभिव्यक्ति की आजादी को छूट देने वाले अमेरिकी कानून के खिलाफ होगा। यह लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाएगा।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक आदेश फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। दरअसल, ट्रंप के कार्यकारी आदेश जारी करने के बाद उन्हें अमेरिकी आदेश के तहत मिली सुरक्षा सीमित हो सकती है। 

इन सबकी शुरुआत ट्रंप के ट्वीट के साथ ट्विटर द्वारा सच्चाई जांचने वाले लिंक लगाने से हुई थी। ट्विटर ने ट्रंप के ट्वीट को सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरनाक बताया है। हालांकि, फेसबुक ने अपने प्लेटफॉर्म से इस तरह के पोस्ट को नहीं हटाया है। 

कहा जा रहा है कि ट्रंप का कार्यकारी आदेश अमेरिकी समाज को अभिव्यक्ति की आजादी देता है, लेकिन वास्तव में यह इसका उल्टा है। अमेरिकी राष्ट्रपति लंबे वक्त से यह दलील दे रहे हैं कि इंटरनेट प्लेटफॉर्म दक्षिणपंथी अनुदारवादी कंटेंट से पक्षपात करते हैं। 

राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेश में 1996 के कम्युनिकेशन डीसेंसी एक्ट की धारा 230 में परिवर्तन का प्रावधान है। यह कानून इंटरनेट को अतिवादी, नुकसानदेह और भड़काउ कंटेंट को मुकदमे के भय के बिना मॉडरेट करने की छूट देता है। इंटरनेट प्लेटफार्मों ने धारा 230 को किसी भी कार्रवाई से पूरी सुरक्षा देने का प्रावधान मान लिया है। 

अदालतों ने भी प्लेटफॉर्मों को आतंकवाद, मानहानि, झूठी जानकारी, बाल यौन शोषण सहित अन्य मामलों को सीधा बढ़ावा देने को एक तरह से स्वीकृति प्रदान कर दी है। नतीजतन धारा 230 इंटरनेट प्लेटफार्मों के लिए सुरक्षा कवच और सब्सिडी के समान है क्योंकि प्लेटफार्म जो नुकसान करते हैं, उसकी उन्हें कीमत नहीं चुकानी पड़ती है।

वहीं, लोगों का कहना है कि लोकतंत्र और स्वास्थ्य को भारी क्षति के बिना हम इंटरनेट प्लेटफॉर्मों के फायदों का आनंद नहीं उठा सकते हैं। लेकिन, नियमन का लक्ष्य अभिव्यक्ति पर पाबंदी नहीं होनी चाहिए। यह अभिव्यक्ति की आजादी को छूट देने वाले अमेरिकी कानून के खिलाफ होगा। यह लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाएगा।

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