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जापान में 138 साल में पहली बार एक महिला ने इतिहास बदल दिया है। जापान के सेंट्रल बैंक की कार्यकारी निदेशक बनने वाली वह पहली महिला बन गई हैं।

55 वर्षीय टोकिको शिमिजु को बैंक ऑफ जापान में हुए फेरबदल के दौरान इस पद पर नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही वह छह कार्यकारी सदस्यों में से एक बन गए हैं, जो बैंक के घरों का काम संभालतेगी। शिमिजु इस बैंक से 1987 से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने कई भूमिकाएँ निभाई हैं। वह वित्तीय बाजार विभाग और विदेशी मुद्रा विनियम विभाग में काम कर रहे हैं। इसके अलावा वह 2016 में यूरोप में बैंक की महाप्रबंधक और 2018 में लंदन में बैंक की मुख्य प्रतिनिधि बने हुए हैं।

बैंक ऑफ जापान की स्थापना 1882 में हुई थी। इस बैंक में 47 प्रति महिलाकर्मी हैं, लेकिन सिर्फ 13 प्रतिशत ही वरिष्ठ प्रबंधक तक पहुंची हैं। इसके अलावा 20 प्रतिशत महिलाएं कानूनी मामलों, भुगतान प्रणाली और बैंक नोट से जुड़े कामों से जुड़ी हैं।

1998 में मौद्रिक नीति की स्थापना के बाद महिलाओं को उच्च निर्णय लेने वाली नीति बोर्ड में शामिल किया गया था। शिशु बोर्ड के नौ सदस्यों में से सिर्फ एक ही महिला सदस्य रही है। बैंक में कभी भी महिला गवर्नर नहीं रही है जबकि यूरोप सेंट्रल बैंक और फेडरल रिजर्व में ऐसा नहीं है। जापान में हालांकि ज्यादातर संस्थान पुरुष प्रधान है, लेकिन पिछले एक दशक में महिलाओं की उच्च शिक्षा में प्रतिनिधित्व बढ़ा है।

2018 के विश्व बैंक डेटा के मुताबिक जापान की आबादी में 51 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं की है। ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स के मुताबिक जापान 153 देशों में 121 वें नंबर पर आता है। यही नहीं लैंगिंक समानता के मामले में जी -7 देशों में जापान सबसे निचले पायदान पर है। हालांकि जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए अनुकूलन जता चुके हैं।

जापान में 138 साल में पहली बार एक महिला ने इतिहास बदल दिया है। जापान के सेंट्रल बैंक की कार्यकारी निदेशक बनने वाली वह पहली महिला बन गई हैं।

55 वर्षीय टोकिको शिमिजु को बैंक ऑफ जापान में हुए फेरबदल के दौरान इस पद पर नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही वह छह कार्यकारी सदस्यों में से एक बन गए हैं, जो बैंक के घरों का काम संभालतेगी। शिमिजु इस बैंक से 1987 से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने कई भूमिकाएँ निभाई हैं। वह वित्तीय बाजार विभाग और विदेशी मुद्रा विनियम विभाग में काम कर रहे हैं। इसके अलावा वह 2016 में यूरोप में बैंक की महाप्रबंधक और 2018 में लंदन में बैंक की मुख्य प्रतिनिधि बने हुए हैं।

बैंक ऑफ जापान की स्थापना 1882 में हुई थी। इस बैंक में 47 प्रति महिलाकर्मी हैं, लेकिन सिर्फ 13 प्रतिशत ही वरिष्ठ प्रबंधक तक पहुंची हैं। इसके अलावा 20 प्रतिशत महिलाएं कानूनी मामलों, भुगतान प्रणाली और बैंक नोट से जुड़े कामों से जुड़ी हैं।

1998 में मौद्रिक नीति की स्थापना के बाद महिलाओं को उच्च निर्णय लेने वाली नीति बोर्ड में शामिल किया गया था। शिशु बोर्ड के नौ सदस्यों में से सिर्फ एक ही महिला सदस्य रही है। बैंक में कभी भी महिला गवर्नर नहीं रही है जबकि यूरोप सेंट्रल बैंक और फेडरल रिजर्व में ऐसा नहीं है। जापान में हालांकि ज्यादातर संस्थान पुरुष प्रधान है, लेकिन पिछले एक दशक में महिलाओं की उच्च शिक्षा में प्रतिनिधित्व बढ़ा है।

2018 के विश्व बैंक डेटा के मुताबिक जापान की आबादी में 51 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं की है। ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स के मुताबिक जापान 153 देशों में 121 वें नंबर पर आता है। यही नहीं लैंगिंक समानता के मामले में जी -7 देशों में जापान सबसे निचले पायदान पर है। हालांकि जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए अनुकूलन जता चुके हैं।





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