देश में हुई लॉकडाउन के चलते देशभर की सभी घरेलू और आंतरिक उड़ानें रद्द हो गई थीं, इस कारण से जो जहां फांटा था वहां बने रहे। ऐसा ही एक जर्मन नागरिक जो भारत आया था, पिछले 55 दिन से दिल्ली के इंदिरा गांधी आंतरिक हवाई अड्डे (आईजीआई) के दलित क्षेत्र में फांसा हुआ था।

सभी उड़ानों रद्द होने के कारण वह भारत से नहीं जा रहा था। लेकिन आज (12 मई) सुबह वह केएलएम फ्लाइट के जरिए एम्सटर्डम के लिए रवाना हो गए हैं। उसे भेजने से पहले उसकी कोरोना जांच की गई थी जिसकी रिपोर्ट निगेटिव आई है।

क्यों नहीं छोड़ना चाहता था भारत

40 वर्षीय जर्मन नागरिक एडगार्ड जीबत ने पहले अपने देश जाने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। उसे अधिकारियों ने भारत छोड़ने का नोटिस भी जारी कर दिया था। उन्होंने कहा कि वह भारत तो छोड़ेगा जब भारत आंतरिक उड़ानें शुरू करेगा।

जीबत 18 मार्च को दलित यात्री के रूप में हनोई से भारत आया था और उसे यहां इस्तांबुल जाना था। 18 मार्च वह दिन था जब भारत ने तुर्की जाने वाली सभी उड़ानें बैन कर दी थीं ताकि कोरोना संक्रमण को फैलाने से रोका जा सके। चार दिन बाद भारत से उड़ने वाली सभी आंतरिक उड़ानें रद्द कर दी गईं। भारत में फंसे जीबत न ही भारत से बाहर जा सके न ही अंकितित क्षेत्र से बाहर जा सके क्योंकि उनके पास भारत का नहीं था।

जर्मनी में आपराधिक रिकॉर्ड था
पासपोर्ट के एक अधिकारी ने बताया कि जीबत ने भारतीय वीजा के लिए शायद इसलिए भी अप्लाई नहीं किया क्योंकि उसका जर्मनी में आपराधिक रिकॉर्ड था। जर्मन दूतावास ने जीबत को जर्मनी वापस जाने का भी प्रस्ताव दिया था लेकिन उसने मना कर दिया था।

जर्मन दूतावास के प्रवक्ता का कहना है कि हम अधिकारियों और जीबत दोनों के संपर्क में थे, लेकिन लगातार जर्मनी वापस भेजे जाने के प्रस्ताव को वह अस्वीकार कर रहे थे। दिल्ली टर्मिनल के एक अधिकारी ने बताया कि जीबत को भारत छोड़ने का नोटिस जारी किया गया था। उसे नोटिस इसलिए दिया गया था क्योंकि जितित क्षेत्र में कोई आंतरिक यात्री सिर्फ एक दिन के लिए रह सकता है, लेकिन वह 55 दिन रह गया है।

अधिकारी ने बताया कि उसके पास कई देशों के वीजा थे। पिछले सप्ताह भी भारतीय अधिकारियों ने जीबत को अंकारा जाने वाली फ्लाइट पर भेजने की कोशिश की थी लेकिन तुर्की के अधिकारियों ने उसे लेने से मना कर दिया क्योंकि वह सिर्फ अपने नागरिकों या परमानेंट कार्ड धारकों को ले जा रहे थे।

पिछले 55 दिनों से जीबत अपना समय मैगजीन, पत्र आदि पढ़कर, दोस्तों और परिवार से फोन पर बात कर और खा-पीकर बिता रहा था। वह हाउस कीपिंग स्टाफ, सिक्योरिटी स्टाफ आदि से बातें भी करता था। उसे रिक्लाइनर, मच्छर मारने वाला नेट, टूथपेस्ट, खाना और अन्य आवश्यक चीजें उपलब्ध कराई गई थीं





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