कोरोना के बाद गेंद पर लार गलाने पर लग सकता है बैन

आईसीसी की क्रिकेट कमेटी (ICC Cricket Committee) ने कोरोना वायरस के मद्देनजर गेंद पर लार के इस्तेमाल पर बैन (Saliva Use) करने की सिफारिश की है, जिसके बाद से दुनिया के कई दिग्गज गेंदबाज परेशान हैं.

नई दिल्ली. 18 मई को आईसीसी क्रिकेट कमेटी (ICC Cricket Committee) की एक बैठक हुई जिसने कोरोना वायरस के मद्देनजर गेंद पर लार (Saliva Ban) के इस्तेमाल पर बैन की सिफारिश कर डाली. इस सिफारिश का मकसद खिलाड़ियों को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाना है लेकिन कई खिलाड़ियों ने इसपर सवाल खड़े किये हैं. उनका मानना है कि अगर गेंद पर लार लगाने पर बैन लगा दिया गया तो ये खेल बल्लेबाजों के हक में चला जाएगा और फिर गेंदबाज बस मैदान पर छक्के-चौके खाने के लिए ही उतरेंगे. मिचेल स्टार्क, पैट कमिंस, जसप्रीत बुमराह जैसे टॉप गेंदबाज मांग कर रहे हैं कि आईसीसी लार का विकल्प गेंदबाजों को दे, हालांकि ऐसा होना मुश्किल ही लग रहा है. 10 जून को आईसीसी की बैठक होने वाली है जिसमें क्रिकेट कमेटी की सिफारिशों पर अंतिम फैसला हो सकता है. वैसे आपको बता दें लार पर अगर बैन लग भी गया तो भी इस खेल का संतुलन बरकार रखा जा सकता है. बस आईसीसी और सभी क्रिकेट बोर्डों को मिलकर ये चार कदम उठाने की जरूरत है.

संतुलित पिच बनाई जाए
पिछले 10 सालों में क्रिकेट वैसे ही बल्लेबाजों का खेल बनकर रह गया है, इसकी वजह है पिच. आजकल हर क्रिकेट बोर्ड अपनी पिचों को बल्लेबाजों की मदद करने वाली बनाता है. पिच एकदम पाटा होती है और नतीजा ये कि चाहे गेंदबाज कितना भी गेंद को चमका ले, उसे मदद नहीं मिलती और फिर आता है रनों का सैलाब. यही वजह है कि टी20 क्रिकेट में हर दूसरे मैच में शतक बनने लगे हैं और वनडे क्रिकेट में दोहरे शतक भी तेजी से बन रहे हैं. अब अगर आईसीसी क्रिकेट कमेटी ने गेंद पर लार के इस्तेमाल पर बैन की सिफारिश की है तो ऐसे में खेल को संतुलित करने के लिए सभी क्रिकेट बोर्ड्स को ऐसी पिच बनानी चाहिए जिसमें गेंदबाजों को भी मदद मिले. अगर गेंद स्विंग ना हो, तो पिच की मदद से उसका सीम होना जरूरी है. अगर ऐसा हुआ तो बल्लेबाजों और गेंदबाजों के बीच आपको कांटे का मुकाबला देखने को मिल सकता है.
गेंद बनाने की तकनीक और नियम में हों बदलावगेंद को स्विंग कराने के लिए सिर्फ लार (Saliva Ban) ही जरूरी नहीं है, इसके साथ-साथ उसे बनाने की तकनीक भी काफी अहमियत रखती है. क्रिकेट में तीन तरह की गेंदों का इस्तेमाल होता है. ड्यूक, कूकाबूरा और एसजी. गेंदबाजों के लिहाज से बात की जाए तो ड्यूक गेंदें उनके लिए काफी मददगार साबित होती है. ये गेंद ज्यादा समय तक स्विंग होती है और बल्लेबाजों को रन बनाने के लिए अच्छी-खासी मेहनत करनी पड़ती है. वहीं कूकाबूरा और एसजी में गेंदबाजों को कम समय के लिए मदद मिलती है. जबतक लार पर बैन लगा हुआ है उस समय तक कूकाबूरा और एसजी कंपनियां भी अपनी गेंदों को ड्यूक के अंदाज में बनाने की कोशिश करें ताकि उनसे खेलने वाले गेंदबाजों को भी लार की कमी महसूस ना हो. इसके अलावा आईसीसी को वनडे क्रिकेट में दो नई गेंदों के इस्तेमाल के नियम को भी कुछ समय तक रोकना चाहिए. वनडे क्रिकेट में दो नई गेंद होने से गेंदबाजों की ज्यादा धुनाई होती है, स्पिनर्स उतने कारगर नहीं रह गए हैं, जैसा पहले देखा जाता था. अगर आईसीसी एक गेंद के नियम को दोबारा लागू करती है तो फिर टीम अपनी प्लेइंग इलेवन में स्पिनर्स को अहमियत दे सकती है.

बाउंड्री को बड़ा किया जाए
मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड को अगर छोड़ दें तो शायद ही दुनिया में कोई ऐसा ग्राउंड होगा जहां बल्लेबाज चार रन दौड़कर बना डालें. क्रिकेट में इन दिनों बाउंड्री काफी छोटी हो गई हैं. कई जगह तो इनकी लंबाई 55 मीटर तक होती है, जिसकी वजह से बल्लेबाज निर्भीक होकर हवाई शॉट खेलता है. जबतक लार पर बैन है, गेंदबाजों को मदद देने के लिए बाउंड्री लाइन बड़ी करने का नियम भी लागू होना चाहिए.

फील्डिंग पाबंदियों में बदलाव हों
वनडे क्रिकेट के नियमों में भी आईसीसी को कुछ समय तक बदलाव करने की जरूरत है. जैसे अभी 11 से 40 ओवर तक सिर्फ 4 फील्डर ही 30 गज के बाहर रह सकते हैं और आखिरी 10 ओवर में 5 फील्डर तीस गज के बाहर किये जा सकते हैं. जब तक लार पर बैन लगाया जाता है, उस वक्त तक आईसीसी को फील्डिंग के नियमों में बदलाव करने की जरूरत है. आईसीसी को आखिरी 10 ओवर नहीं बल्कि आखिरी 25 ओवर में ही 5 फील्डर तीस गज के बाहर रखने का नियम करना चाहिए, जिससे गेंदबाजों को राहत मिले. साफ है अगर ये चार कदम उठाए जाएं तो लार पर बैन के बावजूद क्रिकेट के खेल में संतुलन देखने को मिल सकता है.

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First published: June 7, 2020, 7:51 AM IST

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