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कोरोना वायरस का खतरा कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। अब एक नए अध्ययन में पता चला है कि यह जानलेवा वायरस गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए भी घातक साबित हो सकता है। शरीर के विभिन्न हिस्सों को प्रभावित करने वाला यह वायरस अब गर्भनाल पर हमला बोल रहा है। इसका असर गर्भ में भ्रूण या बच्चे के अंगों पर असर दिखा है। 

हालांकि अच्छी बात यह है कि जन्म के बाद ऐसे बच्चे स्वस्थ पाए गए हैं। यह अध्ययन अमेरिका के शिकागो स्थित नॉर्थ वेस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया है। विश्वविद्यालय के महिला एवं प्रसूति रोग विभाग की डॉक्टर एमिली मिलर के मुताबिक 16 संक्रमित गर्भवती महिलाओं की पैथोलॉजी जांच में पता चला है कि वायरस गर्भ में बच्चे की आंतों, किडनी, लिवर और फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रहा है। ऐसा तभी संभव है जब गर्भनाल की कार्य क्षमता खराब होने से विकसित हो रहे भ्रूण को पर्याप्त ऑक्सीजन और पौष्टिक तत्व नहीं मिल पाते हैं। इसी वजह से इस तरह की तकलीफ देखने को मिली है।

गर्भनाल भ्रूण के लिए सुरक्षा कवच
गर्भनाल भ्रूण का सुरक्षा कवच है और यह गर्भ में पल रहे बच्चे को हर तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से बचाने में अहम भूमिका निभाता है। अगर गर्भनाल आधा भी काम करे तो वह बच्चे को हर चीज मुहैया कराती है और उसका पूरा ख्याल रखती है। गर्भनाल बच्चे के खून में मौजूद हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने का काम करती है।

16 में से 14 ने दिया स्वस्थ शिशु को जन्म
विश्वविद्यालय के पेरिनेटल पैथोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर जेफरी गोल्डस्टीन के अनुसार संक्रमित मां के चलते बच्चों के अंगों पर असर देखने को मिला है। लेकिन जब इन बच्चों का जन्म हुआ तो यह पूरी तरह स्वस्थ थे। 16 में से 14 महिलाओं ने जिन बच्चों को जन्म दिया वह पूरी तरह स्वस्थ थे। उनका वजन और लंबाई भी सामान्य थी। एक बच्चे का जन्म समय से पहले हुआ था जबकि एक महिला का गर्भपात हो गया था।

कोरोना वायरस का खतरा कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। अब एक नए अध्ययन में पता चला है कि यह जानलेवा वायरस गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए भी घातक साबित हो सकता है। शरीर के विभिन्न हिस्सों को प्रभावित करने वाला यह वायरस अब गर्भनाल पर हमला बोल रहा है। इसका असर गर्भ में भ्रूण या बच्चे के अंगों पर असर दिखा है। 

हालांकि अच्छी बात यह है कि जन्म के बाद ऐसे बच्चे स्वस्थ पाए गए हैं। यह अध्ययन अमेरिका के शिकागो स्थित नॉर्थ वेस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया है। विश्वविद्यालय के महिला एवं प्रसूति रोग विभाग की डॉक्टर एमिली मिलर के मुताबिक 16 संक्रमित गर्भवती महिलाओं की पैथोलॉजी जांच में पता चला है कि वायरस गर्भ में बच्चे की आंतों, किडनी, लिवर और फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रहा है। ऐसा तभी संभव है जब गर्भनाल की कार्य क्षमता खराब होने से विकसित हो रहे भ्रूण को पर्याप्त ऑक्सीजन और पौष्टिक तत्व नहीं मिल पाते हैं। इसी वजह से इस तरह की तकलीफ देखने को मिली है।

गर्भनाल भ्रूण के लिए सुरक्षा कवच

गर्भनाल भ्रूण का सुरक्षा कवच है और यह गर्भ में पल रहे बच्चे को हर तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से बचाने में अहम भूमिका निभाता है। अगर गर्भनाल आधा भी काम करे तो वह बच्चे को हर चीज मुहैया कराती है और उसका पूरा ख्याल रखती है। गर्भनाल बच्चे के खून में मौजूद हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने का काम करती है।

16 में से 14 ने दिया स्वस्थ शिशु को जन्म
विश्वविद्यालय के पेरिनेटल पैथोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर जेफरी गोल्डस्टीन के अनुसार संक्रमित मां के चलते बच्चों के अंगों पर असर देखने को मिला है। लेकिन जब इन बच्चों का जन्म हुआ तो यह पूरी तरह स्वस्थ थे। 16 में से 14 महिलाओं ने जिन बच्चों को जन्म दिया वह पूरी तरह स्वस्थ थे। उनका वजन और लंबाई भी सामान्य थी। एक बच्चे का जन्म समय से पहले हुआ था जबकि एक महिला का गर्भपात हो गया था।

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