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क्वाड देश भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान चीन की हर चाल से वाकिफ हैं। इन देशों ने साफ कर दिया है कि चीन की विस्तारवादी नीतियों और आक्रामक हरकतों को लेकर उन्हें किसी प्रकार का भ्रम नहीं है। क्वाड के पहले सम्मेलन में चीन से मिल रही चुनौतियों पर चर्चा के बाद अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) जैक सुलिवन ने यह जानकारी दी। सुलिवन के अनुसार इन सभी नेताओं ने एकसुर से हिंद-प्रशांत क्षेत्र की आजादी और खुलेपन का समर्थन किया।

सुलिवन ने कहा, क्वाड देशों की वर्चुअल बैठक चीन पर केंद्रित नहीं थी, लेकिन इसमें पूर्वी और दक्षिणी चीन सागर में जहाजों की स्वतंत्र आवाजाही और जबरन कब्जे से आजादी पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम मुद्दा और म्यांमार में सेना के दमन पर भी चर्चा हुई। मुश्किल घड़ी होने के बावजूद भविष्य के लिए उम्मीद की किरण के रूप में यह बैठक हुई। सुलिवन ने ये बातें तब कहीं, जब जल्द ही वह चीन के अधिकारियों के साथ बैठक करने वाले हैं।

सुलिवन ने कहा, हमारी कोशिश चीन को यह स्पष्ट संदेश देना है कि अमेरिका अपने मौलिक मूल्यों और हितों के आधार पर रणनीतिक स्तर पर आगे बढ़ना चाहता है। हम यह भी जताना चाहते हैं कि चीन की हरकतों को लेकर हमारी चिंताएं क्या हैं, चाहे वह हांगकांग हो या शिनजियांग या ताइवान की खाड़ी के मसले हों। ऐसे ही कुछ और मुद्दे हैं जो हमने अपने क्वाड भागीदारों से सुने, जैसे कि ऑस्ट्रेलिया के पास चीन की आक्रामकता, जापान के पास सेनकाकू द्वीपों के आसपास उत्पीड़न, भारत के साथ सीमा पर आक्रामकता।

गौरतलब है कि क्वाड की वर्चुअल बैठक के बाद अब इस साल के आखिर में अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत के नेता फिर मिलेंगे। इस बार यह ऑनलाइन नहीं, आमने-सामने होगी। जब ये नेता मिलेंगे, उस वक्त 5जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सूचना जैसी तकनीकों के लिए बने कार्यकारी समूहों के नतीजे दिखाई देने लगेंगे।

18-19 को चीनी अफसरों से मिलेंगे सुलिवन
एनएसए सुलिवन और विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन की अलास्का के एंकोरेज में 18-19 मार्च को चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य और राष्ट्रीय सलाहकार यैंग जेईची और विदेश मंत्री वैंग यी से मुलाकात होनी है।

चीन बोला-क्वाड बेकार का रणनीतिक तंत्र
चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के संपादक हू शिजिन ने ट्वीट कर कहा, ‘क्वाड बेकार का रणनीतिक तंत्र है, जिसका मकसद अमेरिका के हितों को साधना है। यह तंत्र भारत को चीन की जमीन पर एक इंच भी कब्जा करने में मदद नहीं करेगा और न ही यह जापान को चीनी तटरक्षकों के जहाज को चीन के दिआओयू द्वीप समूह के पास जलसीमा में जाने से रोकने में कोई मदद करेगा।’

पीएम मोदी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति से की बात, द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे से फोन पर बात की। मोदी व राजपक्षे ने सामयिक घटनाक्रमों और द्विपक्षीय व बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग पर चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों के बीच नियमित संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई। मोदी ने भारत की पड़ोसी प्रथम नीति में श्रीलंका की अहमियत को भी बताया। बाद में पीएम मोदी ने भी ट्वीट किया, हमने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की, जिसमें कोविड-19 का संदर्भ भी शामिल है।

क्वाड देश भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान चीन की हर चाल से वाकिफ हैं। इन देशों ने साफ कर दिया है कि चीन की विस्तारवादी नीतियों और आक्रामक हरकतों को लेकर उन्हें किसी प्रकार का भ्रम नहीं है। क्वाड के पहले सम्मेलन में चीन से मिल रही चुनौतियों पर चर्चा के बाद अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) जैक सुलिवन ने यह जानकारी दी। सुलिवन के अनुसार इन सभी नेताओं ने एकसुर से हिंद-प्रशांत क्षेत्र की आजादी और खुलेपन का समर्थन किया।

सुलिवन ने कहा, क्वाड देशों की वर्चुअल बैठक चीन पर केंद्रित नहीं थी, लेकिन इसमें पूर्वी और दक्षिणी चीन सागर में जहाजों की स्वतंत्र आवाजाही और जबरन कब्जे से आजादी पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम मुद्दा और म्यांमार में सेना के दमन पर भी चर्चा हुई। मुश्किल घड़ी होने के बावजूद भविष्य के लिए उम्मीद की किरण के रूप में यह बैठक हुई। सुलिवन ने ये बातें तब कहीं, जब जल्द ही वह चीन के अधिकारियों के साथ बैठक करने वाले हैं।

सुलिवन ने कहा, हमारी कोशिश चीन को यह स्पष्ट संदेश देना है कि अमेरिका अपने मौलिक मूल्यों और हितों के आधार पर रणनीतिक स्तर पर आगे बढ़ना चाहता है। हम यह भी जताना चाहते हैं कि चीन की हरकतों को लेकर हमारी चिंताएं क्या हैं, चाहे वह हांगकांग हो या शिनजियांग या ताइवान की खाड़ी के मसले हों। ऐसे ही कुछ और मुद्दे हैं जो हमने अपने क्वाड भागीदारों से सुने, जैसे कि ऑस्ट्रेलिया के पास चीन की आक्रामकता, जापान के पास सेनकाकू द्वीपों के आसपास उत्पीड़न, भारत के साथ सीमा पर आक्रामकता।

गौरतलब है कि क्वाड की वर्चुअल बैठक के बाद अब इस साल के आखिर में अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत के नेता फिर मिलेंगे। इस बार यह ऑनलाइन नहीं, आमने-सामने होगी। जब ये नेता मिलेंगे, उस वक्त 5जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सूचना जैसी तकनीकों के लिए बने कार्यकारी समूहों के नतीजे दिखाई देने लगेंगे।

18-19 को चीनी अफसरों से मिलेंगे सुलिवन

एनएसए सुलिवन और विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन की अलास्का के एंकोरेज में 18-19 मार्च को चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य और राष्ट्रीय सलाहकार यैंग जेईची और विदेश मंत्री वैंग यी से मुलाकात होनी है।

चीन बोला-क्वाड बेकार का रणनीतिक तंत्र

चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के संपादक हू शिजिन ने ट्वीट कर कहा, ‘क्वाड बेकार का रणनीतिक तंत्र है, जिसका मकसद अमेरिका के हितों को साधना है। यह तंत्र भारत को चीन की जमीन पर एक इंच भी कब्जा करने में मदद नहीं करेगा और न ही यह जापान को चीनी तटरक्षकों के जहाज को चीन के दिआओयू द्वीप समूह के पास जलसीमा में जाने से रोकने में कोई मदद करेगा।’

पीएम मोदी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति से की बात, द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे से फोन पर बात की। मोदी व राजपक्षे ने सामयिक घटनाक्रमों और द्विपक्षीय व बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग पर चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों के बीच नियमित संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई। मोदी ने भारत की पड़ोसी प्रथम नीति में श्रीलंका की अहमियत को भी बताया। बाद में पीएम मोदी ने भी ट्वीट किया, हमने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की, जिसमें कोविड-19 का संदर्भ भी शामिल है।

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