नई दिल्ली: चीन में खलनायक बन गया चीन (चीन) कोरोनावायरस (कोरोनावायरस) के बाद अब दुनिया को भीषण परमाणु युद्ध (परमाणु युद्ध) की परेशानी में डालने की तैयारी कर रहा है। अमेरिका (अमेरिका) और चीन के बीच दक्षिण चीन सागर (दक्षिण चीन सागर) में तनाव बढ़ रहा है। भीषण बंदूकें के साथ दोनों देश कई बार आमने-सामने आ चुके हैं। ऐसे में चीन में विशेषज्ञ अब परमाणु हथियारों का जखीरा बढ़ाने की राय दे रहे हैं। चीन के इस रुख के बाद इस बात की आशंका जताई जा रही है कि क्या ड्रैगन की वजह से दुनिया में भीषण परमाणु युद्ध होने वाला है।

कोरोना काल में अमेरिका और चीन के बीच चल रही बहस एक तरफ है। लेकिन जिस तरह से दक्षिण चीन सागर में दबदबे की लड़ाई के बीच इस क्षेत्र में चीन और अमेरिका घातक अरब का जखीरा इकट्ठा कर रहे हैं और चीन ने अमेरिका के परमाणु ताकत के मुकाबले की तैयारी शुरू कर दी है ऐसे में दुनिया को डर सता रहा है। कि कहीं उस महायुद्ध की शुरूआत तो नहीं होने वाली जो मानवता के लिए सबसे बड़ा श्राप साबित होगा।

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अब हम आपको बताते हैं कि आखिरकार क्यों अमेरिका और चीन के बीच परमाणु यद्ध की आशंका जाहिर की जा रही है। इस आशंका के पीछे चीन की ताकत बढ़ाने की सनक, अपनी सीमाओं के विस्तार की चाहत और दुनिया में दबदबा बनाने की हसरत है। इसी कारण से कोरोना काल में भी चीन को एटम बमो के जखीरे को बढ़ाने की सनक सवार हो रही है।

दक्षिण चीन सागर में अमेरिका और चीन के बीच तनातनी बढ़ रही है जिसके बाद एक्सपर्ट्स चीन को अपने परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाने की सलाह दे रहे हैं। चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स के संपादन हू शिजिन के अनुसार अमेरिका का मुकाबला करने के लिए चीन को परमाणु हथियारों में वृद्धि करनी होगी। चीन को अपने परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाकर 1000 करनी होगी। अमेरिका के पास चीन के मुकाबले परमाणु अस्त्रों का बड़ा जखीरा मौजूद है।

आपको बता दें कि ड्रैगन अपने न्यूक्लियर हथियार भंडार में तीन गुना वृद्धि करने का मंसूबा बना रहा है, ताकि वह अमेरिका को और खिलाड़ी को टक्कर दे सके। चीन में प्रेस को आजादी नहीं मिली है ऐसे में सरकारी मीडिया जो कुछ कहता है उसे चीन की सरकार की जुबान ही समझा जाता है। लेकिन सवाल उठता है कि चीन के इस बयान के पीछे असली कारण क्या है।

दरअसल, चीन के निशाने पर सीधा-सीधा अमेरिका है। यानी चीन अमेरिका को दुनिया के सुपरपावर के तख्त से हटा कर खुद वहां बैठना चाहता है। इसके लिए चीन न सिर्फ आर्थिक बल्कि सामरिक मोर्चे पर भी चक्रव्यूह तैयार कर रहा है।

दुनिया भर में न्यूक्लियर सैलून को लेकर रिसर्च करने वाली संस्था सिपरी के मुताबिक चीन के पास 290 न्यूक्लियर हथियार हैं। जबकि अमेरिका के पास 6185 न्यूक्लियर बंदूकें का जखीरा है।

यानी अमेरिका परमाणु क्षमता के लिहाज से चीन पर भारी है। अमेरिकी फौज, चीन के 20 गुना से भी ज्यादा न्यूक्लियर तोपों की ताकत से लैस है। ये मामला बहुत बड़ा है और ये बात चीन को चुभ रही है। इसलिए चीन अब अमेरिका को फौजी चुनौती देने के लिए अपनी न्यूक्लियर पावर को तीन गुना बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।

चीन ने अपने न्यूक्लियर तोपों में 300 प्रति से ज्यादा की वृद्धि का अंतर जता कर साफ कर दिया है कि वह अमेरिका को अपने लिए सबसे बड़ी चुनौती मानता है। अगर चीन वास्तव में अपनी इस परमाणु योजना पर अमल करता है तो दुनिया में एक बार फिर से विनाशकारी तारों की होड़ शुरू हो सकती है।

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