वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बॉस्टन
Updated Sat, 23 May 2020 01:55 AM IST

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क्या मलेरिया की दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन या क्लोरोक्वीन कोरोना वायरस को रोक सकती है? यह एक ऐसा सवाल है जो अक्सर आपके मन में आता होगा। दरअसल यह दवा अचानक से दुनियाभर में तब सुर्खियों में आ गई, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसकी मांग की थी। 

ऐसे में फिर से वही सवाल कि क्या यह कोविड-19 के खिलाफ लोगों की जान बचा सकती है? तो इसका अब तक कोई भी सीधा जवाब नहीं है। हालांकि, एक लाख लोगों पर किए गए एक नए शोध के मुताबिक कोरोना वायरस के खिलाफ इसके इस्तेमाल के बाद लोगों की मौत या दिल की धड़कन संबंधी समस्याएं देखने को मिली हैं।

जर्नल लैंसेट में शुक्रवार की रिपोर्ट में बताया गया है कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन या क्लोरोक्वीन को लेकर किए गए शोध में छह महाद्वीपों के 671 अस्पताल शामिल हैं।

बोस्टन में ब्रिघम और महिला अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ मनदीप मेहरा ने एक अध्ययन में कहा, “कोरोना वायरस के खिलाफ इसका कोई फायदा नहीं है, बल्कि कई मामलों में इसके इस्तेमाल से मरीजों में नुकसान के संकेत भी देखे गए हैं।”

वहीं, वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में संक्रामक रोग प्रमुख डेविड एरोनॉफ ने कहा, “यह वास्तव में हमें कुछ हद तक विश्वास दिलाता है कि हमें कोविड-19 के इलाज में इन दवाओं से बड़े फायदे की संभावना नहीं है और संभवतः इससे नुकसान भी हो सकता है।”

क्या मलेरिया की दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन या क्लोरोक्वीन कोरोना वायरस को रोक सकती है? यह एक ऐसा सवाल है जो अक्सर आपके मन में आता होगा। दरअसल यह दवा अचानक से दुनियाभर में तब सुर्खियों में आ गई, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसकी मांग की थी। 

ऐसे में फिर से वही सवाल कि क्या यह कोविड-19 के खिलाफ लोगों की जान बचा सकती है? तो इसका अब तक कोई भी सीधा जवाब नहीं है। हालांकि, एक लाख लोगों पर किए गए एक नए शोध के मुताबिक कोरोना वायरस के खिलाफ इसके इस्तेमाल के बाद लोगों की मौत या दिल की धड़कन संबंधी समस्याएं देखने को मिली हैं।

जर्नल लैंसेट में शुक्रवार की रिपोर्ट में बताया गया है कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन या क्लोरोक्वीन को लेकर किए गए शोध में छह महाद्वीपों के 671 अस्पताल शामिल हैं।

बोस्टन में ब्रिघम और महिला अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ मनदीप मेहरा ने एक अध्ययन में कहा, “कोरोना वायरस के खिलाफ इसका कोई फायदा नहीं है, बल्कि कई मामलों में इसके इस्तेमाल से मरीजों में नुकसान के संकेत भी देखे गए हैं।”

वहीं, वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में संक्रामक रोग प्रमुख डेविड एरोनॉफ ने कहा, “यह वास्तव में हमें कुछ हद तक विश्वास दिलाता है कि हमें कोविड-19 के इलाज में इन दवाओं से बड़े फायदे की संभावना नहीं है और संभवतः इससे नुकसान भी हो सकता है।”

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