कोरोना दिमाग की कोशिकाओं को मार रहा है, चिप स्कैन में दिखे काले धब्बे, बड़थिन के मामले बढ़े हैं

Bytechkibaat7

May 9, 2020 , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,


बच्ची के शरीर के तापमान की जांच स्वास्थ्य कर्मी करती है।
– फोटो: पीटीआई

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अमेरिका के हेनरी फॉक्स हेल्थ सिस्टम के शोधकर्ताओं के अनुसार एक 58 वर्षीय कोरोनाफार्म महिला को बुखार और खांसी की तकलीफ के साथ भ्रम, भ्रम और थकावट महसूस हो रही थी। डॉक्टरों ने स्पिन स्कैन जांच कराई तो पता चला कि महिला के मस्तिष्क में काले धब्बे बने हैं यानि कोशिकाएं संक्रमण के कारण मर चुके हैं और कोरोनावायरस इसकी मूल वजह है।

रिपोर्ट में ये भी सामने आया कि मस्तिष्क में गांठ है और रक्तस्राव भी हो रहा है, जिसके कारण उसे मस्तिष्क से जुड़ी तकलीफ हो रही है।]डॉक्टरों के अनुसार वायरल संक्रमण से एक्यूट नेक्रोटिंग इंसेफलाइटिस की समस्या होती है, जो दुलर्भ बीमारी है। इसके कारण मस्तिष्क को नुकसान होता है। पहले ऐसे तकलीफ फ्लू और चिकनपॉक्स के मरीजों में देखने को मिलती थी। कोरोना में भी ऐसे मामले सामने आने लगे हैं।

सावधान रहें … संक्रमण के कारण मस्तिष्क में रक्तस्राव से भी वृद्धि हो रही है तकलीफ
वायरस का फैलाव जिस तरह से बढ़ रहा है, रोगी रोगियों में मस्तिष्क संबंधी तकलीफ भी बढ़ रही है। न्यूरोलॉजिस्ट डॉ। हलीम फादिल का कहना है कि कुछ रोगियों को चलने-फिरने में कठिनाई, सिर में दर्द, झटके आना, सुनने-देखने, चिड़चिड़ापन, गुस्सा, अनिद्रा जैसी शिकायतें मिल रही हैं जिनका सीधा संबंध मस्तिष्क से है। रोगी रोगी इस तरह की तकलीफ बता रहा है तो डॉक्टरों को इस ओर ध्यान देना नहीं होगा रोगी गंभीर स्थिति में जा सकता है।

मरीजों में बढ़ रही है आईसीयू डिलेरियम
कोरियाई स्वास्थ्य आरलिंगटन मेमोरियल अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ। केविन कॉर्नर का कहना है कि आईसीयू में भर्ती होने वाले ज्यादातर रोगियों में आईसीयू डिलेरियम की तकलीफ होती है। इसका कारण सेप्सिस, लिन, संक्रमण या भागों का काम न करना हो सकता है।

कोविड -19 के रोगियों में ऐसा इसलिए देखने को मिल रहा है क्योंकि संक्रमण के कारण रोगियों के फेफड़े में काम करना बंद कर रहे हैं। फेफड़े की कार्यक्षमता प्रभावित होने से मस्तिष्क में ऑक्सीजन की मात्रा कम होती है। तेज बुखार के कारण भी ऐसा होता है।

सार

कोरोना मस्तिष्क के लिए खतरनाक है ये साबित हो गया है। हैरान करने वाली बात ये हैं कि वायरस की चपेट में आने वाले जो रोगी मस्तिष्क संबंधी तकलीफ को लेकर आईसीयू में भर्ती होते हैं उनमें बेहोशी की हालत में बड़बड़ाने के मामले सामने आने लगे हैं जिन्हें मेडिकल की भाषा में यू आईसीयू डिलेरियम ’कहते हैं। कुछ रोगियों के मस्तिष्क में काले धब्बे दिखे जिससे साबित होता है कि कोरोना कोशिकाओं का मार रहा है।

विस्तार

अमेरिका के हेनरी फॉक्स हेल्थ सिस्टम के शोधकर्ताओं के अनुसार एक 58 वर्षीय कोरोनाफार्म महिला को बुखार और खांसी की तकलीफ के साथ भ्रम, भ्रम और थकावट महसूस हो रही थी। डॉक्टरों ने स्पिन स्कैन जांच कराई तो पता चला कि महिला के मस्तिष्क में काले धब्बे बने हैं यानि कोशिकाएं संक्रमण के कारण मर चुके हैं और कोरोनावायरस इसकी मूल वजह है।

रिपोर्ट में ये भी सामने आया कि मस्तिष्क में गांठ है और रक्तस्राव भी हो रहा है, जिसके कारण उसे मस्तिष्क से जुड़ी तकलीफ हो रही है।]डॉक्टरों के अनुसार वायरल संक्रमण से एक्यूट नेक्रोटिंग इंसेफलाइटिस की समस्या होती है, जो दुलर्भ बीमारी है। इसके कारण मस्तिष्क को नुकसान होता है। पहले ऐसे तकलीफ फ्लू और चिकनपॉक्स के मरीजों में देखने को मिलती थी। कोरोना में भी ऐसे मामले सामने आने लगे हैं।

सावधान रहें … संक्रमण के कारण मस्तिष्क में रक्तस्राव से भी वृद्धि हो रही है तकलीफ

वायरस का फैलाव जिस तरह से बढ़ रहा है, रोगी रोगियों में मस्तिष्क संबंधी तकलीफ भी बढ़ रही है। न्यूरोलॉजिस्ट डॉ। हलीम फादिल का कहना है कि कुछ रोगियों को चलने-फिरने में कठिनाई, सिर में दर्द, झटके आना, सुनने-देखने, चिड़चिड़ापन, गुस्सा, अनिद्रा जैसी शिकायतें मिल रही हैं जिनका सीधा संबंध मस्तिष्क से है। रोगी रोगी इस तरह की तकलीफ बता रहा है तो डॉक्टरों को इस ओर ध्यान देना नहीं होगा रोगी गंभीर स्थिति में जा सकता है।

मरीजों में बढ़ रही है आईसीयू डिलेरियम
कोरियाई स्वास्थ्य आरलिंगटन मेमोरियल अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ। केविन कॉर्नर का कहना है कि आईसीयू में भर्ती होने वाले ज्यादातर रोगियों में आईसीयू डिलेरियम की तकलीफ होती है। इसका कारण सेप्सिस, लिन, संक्रमण या भागों का काम न करना हो सकता है।

कोविड -19 के रोगियों में ऐसा इसलिए देखने को मिल रहा है क्योंकि संक्रमण के कारण रोगियों के फेफड़े में काम करना बंद कर रहे हैं। फेफड़े की कार्यक्षमता प्रभावित होने से मस्तिष्क में ऑक्सीजन की मात्रा कम होती है। तेज बुखार के कारण भी ऐसा होता है।





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