वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Updated Tue, 09 Jun 2020 10:34 AM IST

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महामारी के कारण लगाया गया लॉकडाउन नींद पसंद करने वाले लोगों के लिए अच्छा मौका था। हालांकि एक अध्ययन में पता चला है कि सोना पसंद करने वाले लोगों की नींद लॉकडाउन के पहले सप्ताह में ही पूरी हो गई और वह घर में बंद रहने की वजह से आराम महसूस करने की बजाय बेचैन रहने लगे।

ब्रिटेन के किंग्स कॉलेज लंदन में 22 से 24 मई के बीच सर्वे किया गया, तो इस दौरान लोगों को नींद संबंधी तकलीफ की बात सामने आई। सर्वे में शामिल 38% लोगों ने कहा कि इस दौरान उन्होंने डरावने सपने भी देखें।  कुछ लोग लॉकडाउन में खूब सोए, पर वे सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा थके हुए महसूस कर रहे थे। 

ब्रिटेन के 2,254 युवाओं पर हुए अध्ययन में पता चला है कि 10 में से 6 लोगों को लॉकडाउन में नींद संबंधी समस्या रही और वह अच्छे से नहीं सो पाए। किंग्स कॉलेज लंदन के पॉलिसी इंस्टीट्यूट के बॉबी के मुताबिक, लॉकडाउन के कारण दो तिहाई लोगों को नौकरी जाने का डर और वित्तीय संकट की चिंता सता रही है और उसका सीधा असर हो रहा है।

15 मिनट अधिक सोए लोग
लॉकडाउन में वियरेबल डिवाइस की मदद से सोने के समय को लेकर हुए अध्ययन में यह भी पता चला है कि लॉकडाउन में कुछ लोग रोजाना औसत से 15 मिनट अधिक सो रहे हैं। फ्रांस के लोगों में यह चीज अधिक देखने को मिली और सब औसत से 20 मिनट अधिक सोते पाए गए।

देर तक रहेगा लॉकडाउन का असर 
वैज्ञानिकों का कहना है कि लॉकडाउन का असर लंबे समय तक रहेगा। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि जिंदगी पहले की तरह पटरी पर अभी लौट जाएगी, इसकी कोई संभावना नहीं है। हर व्यक्ति को भय के साए में जीना है। यही कारण है कि दिनचर्या सामान्य नहीं होने तक उनमें तनाव, चिड़चिड़ापन और गुस्सा रहने की संभावना है।

महामारी के कारण लगाया गया लॉकडाउन नींद पसंद करने वाले लोगों के लिए अच्छा मौका था। हालांकि एक अध्ययन में पता चला है कि सोना पसंद करने वाले लोगों की नींद लॉकडाउन के पहले सप्ताह में ही पूरी हो गई और वह घर में बंद रहने की वजह से आराम महसूस करने की बजाय बेचैन रहने लगे।

ब्रिटेन के किंग्स कॉलेज लंदन में 22 से 24 मई के बीच सर्वे किया गया, तो इस दौरान लोगों को नींद संबंधी तकलीफ की बात सामने आई। सर्वे में शामिल 38% लोगों ने कहा कि इस दौरान उन्होंने डरावने सपने भी देखें।  कुछ लोग लॉकडाउन में खूब सोए, पर वे सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा थके हुए महसूस कर रहे थे। 

ब्रिटेन के 2,254 युवाओं पर हुए अध्ययन में पता चला है कि 10 में से 6 लोगों को लॉकडाउन में नींद संबंधी समस्या रही और वह अच्छे से नहीं सो पाए। किंग्स कॉलेज लंदन के पॉलिसी इंस्टीट्यूट के बॉबी के मुताबिक, लॉकडाउन के कारण दो तिहाई लोगों को नौकरी जाने का डर और वित्तीय संकट की चिंता सता रही है और उसका सीधा असर हो रहा है।

15 मिनट अधिक सोए लोग
लॉकडाउन में वियरेबल डिवाइस की मदद से सोने के समय को लेकर हुए अध्ययन में यह भी पता चला है कि लॉकडाउन में कुछ लोग रोजाना औसत से 15 मिनट अधिक सो रहे हैं। फ्रांस के लोगों में यह चीज अधिक देखने को मिली और सब औसत से 20 मिनट अधिक सोते पाए गए।

देर तक रहेगा लॉकडाउन का असर 
वैज्ञानिकों का कहना है कि लॉकडाउन का असर लंबे समय तक रहेगा। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि जिंदगी पहले की तरह पटरी पर अभी लौट जाएगी, इसकी कोई संभावना नहीं है। हर व्यक्ति को भय के साए में जीना है। यही कारण है कि दिनचर्या सामान्य नहीं होने तक उनमें तनाव, चिड़चिड़ापन और गुस्सा रहने की संभावना है।

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