• बच्चें काे बिना अधिक बाबेज महसूस कराए कैसे बताएं अपनी आर्थिक स्थिति
  • बताएं कि हालात जल्द बेहतर हाेंगी, लहजा भी ऐसा हाे कि उन्हें न लगें कि स्थिति बहुत बुरी है

वेंडी माएगल (क्लीनिकल साइकेलाजिस्ट)

10 मई, 2020, 06:06 पूर्वाह्न IST

वॉशिंगटन। भले ही लॅकडाउन खुलने की स्थितियां बन रही हैं और बच्चे कई आंदोलनोंियाें की प्लानिंग कर रहे हैं लेकिन परिजन को तो उन्हें समझाना ही पड़ रहा है कि अब वे बहुत ज्यादा शौक पूरे नहीं करेंगे। परिजन किराए और भोजन के लिए पर्याप्त पैसे होने की बात कहकर उम्मीद करते हैं, लेकिन बच्चों के नज़र-कान तेज होते हैं। ऐसी स्थिति में जानिए कि अगर नौकरी चली गई तो बच्चों के सवालों और नजरों का सामना कैसे करें:

अपनी चिंता पर गैयर करें
ग्राहक केंद्रित अर्थव्यवस्था और सेल्फ ब्रांडिंग के दाअर में अपने बजट का बढ़ाना और और क्या जरूरी है ‘काे हैं हम क्या चाहते हैं’ से अलग करना मुश्किल है। तय करें कि इस खराब माहाैल में भी आप सतर्क परिजन बने रहेंगे। बच्चाें काे आश्वस्त करें कि बदतर स्थिति में भी आपके पास इतने पैसे रहेंगे कि बिल चुका सकते हैं और भोजन खरीद सकते हैं।

यदि कुछ नए करने जा रहे हैं, या बेराजेगारी लाभ प्राप्त कर रहे हैं ताए वह भी बता रहे हैं। इससे उन्हें आपके अवशेषों और अनाजेनाओं के बारे में जानकारी मिलेगी। उनके सवाल गाैर से सुनें।
कड़वा सच बता रहे हैं कि नहीं
बच्चाें से बात करते समय यह तय करें कि उन्हें कैसे चुनना है। यह इस पर निर्भर करता है कि बच्चे की उम्र क्या है, नकारात्मक समाचार सुनने की क्षमता कैसी है। बच्चाें काे नए आर्थिक परिदृश्य में सामंजस्य बैठाने के बारे में बताकर भी सच से अवगत करा सकते हैं। छातेे बच्चे यह साेच सकते हैं कि बड़ाें के साथ बुरा हाे गया है ताे हमारे साथ भी ऐसा होगा। बुरे सपने आ सकते हैं।

किशाेर यह जानने के लिए उत्सुक हा करेगा कि हम अब भी डिनर पर जा सकते हैं ?, मैं पहले वाले स्कूल ही जाऊंगा ?, हम बेगर हाे जाएंगे? उन्हें बताता है कि क्या वैसा ही रहेगा और क्या बदल सकता है। हर परिवर्तन से अवगत कराएं।
आगे की सेंचुरी
बच्चाें काे समझाते हैं कि अर्थव्यवस्था दाैड़ते ही, हालात भी बदलेगी। नई नैकरी मिल सकती है। आपकी परिस्थितियाँ बदल सकती हैं। नए दाएर में पूरे परिवार काे चीते टीम मानकर चल रहा है।





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