• मिल्खा सिंह ने कहा- मेडल लाने के लिए हर राज्य में एकेडमी खोलनी होगी, स्कूल गेम्स से खिलाड़ी चुनने होंगे
  • उन्होंने कहा- ओलिंपिक में 200 से ज्यादा देश के एथलीट उतरते हैं, हमारे खिलाड़ियों को मानक नहीं पता

कृष्ण कुमार पांडेय

09 मई, 2020, 06:09 AM IST

भोपाल। एथलेटिक्स में ओलिंपिक मेडल जीतना आसान नहीं है। उसके लिए खिलाड़ी और कोच में तालमेल, मेहनत और अनुशासन की जरूरत है। इस खेल में मेडल दिलाने के लिए देश की अलग-अलग एजेंसियों को एक साथ करने से काम करना होगा। केवल परिणाम निकलेगा। मुझे टोक्यो ओलिंपिक में भारतीय एथलीट से मेडल की उम्मीद नहीं है। यह कहना है फ्लाइंग सिख के नाम से प्रसिद्ध विश्व प्रसिद्ध जेटट मिल्खा सिंह का।

उन्होंने एथलेटिक्स मेडल की संभावनाओं पर कहा, आसान ये इतना आसान नहीं है। एथलेटिक्स ओलिंपिक में नंबर -1 खेल है। बाकी खेल उसके पीछे हैं, चाहे वह कुश्ती हो या शूटिंग। यह क्रिकेट नहीं है, जिसमें केवल 5-7 देश ही खेेलते हैं। जिसमें आज भारत जीत गया तो कल हार गया। ओलंपिक खेलों में 200 से 220 देेशों के एथलीट भाग लेते हैं। ऐसे में एथलेटिक्स में ओलिंपिक तमगा मिलने वाला नहीं है। आजादी के बाद से कुछ ही एथलीट हैं जो फाइनल तक पहुंच सके हैं, जैसे मैं खुद, पीटी ऊषा, श्रीराम, गुरुभक्ति सिंह रंधावा, अंजू बॉबी जॉर्ज। हालांकि, हम मेडल नहीं जीत पाए। लेकिन, फाइनल में पहुंचना भी आसान नहीं होता है। ‘

केन्या, जमैका की ओल्ट फिनिश लाइन से पहले बाजी पलटती हैं

90 साल के मिल्खा ने कहा, के मुझे नहीं लगता कि टोक्यो में हमें एथलेटिक्स में कोई मेडल मिल नहीं मिला। दोती चंद और उसके दास निश्चित रूप से बहुत अच्छे खिलाड़ी हैं। लेकिन, उन्हें बेहतर प्रशिक्षण की जरूरत है। उन्हें सही गाइडेंस मिले तो वे कुछ कर सकते हैं। अभी भारत को एथलेटिक्स का मानक नहीं है। अमेरिका, केन्या, जमैका, ऑस्ट्रेलिया की लड़कियां तूफान हैं। वे फिनिश लाइन से पहले बाजी पलटते हैं। ‘

खिलाड़ी को विश्व रिकॉर्ड को ध्यान में रखते हुए प्रैक्टिस करनी होगी

मिल्खा ने कहा, कोच मैं कोच को जिम्मेदार नहीं ठहराता क्योंकि, वे हमेशा मेरे खिलाफ रहते हैं। मेरा कहना है कि यदि पुलेला गोपीचंद ने विश्व लेवल के बफरर तैयार किए हैं। पीटी ऊषा के कोच पीतांबरम ने उन्हें तैयार किया। कुश्ती, मुक्केबाजी, निशानेबाजी के कोच ओलिंपिक मेडलिस्ट खिलाड़ी तैयार कर सकते हैं तो एथलेटिक्स के कोच क्यों नहीं। जरूरत है तो दृढ़ इच्छा शक्ति और कठिन परिश्रम की। ’उन्होंने कहा, और हमारे कोच और खिलाड़ियों को जरूरत से ज्यादा गंभीर होना चाहिए। हरेकट को अपने-अपने इवेंट के वर्ल्ड रिकॉर्ड को ध्यान में रखते हुए प्रैक्टिस करनी होगी।)

मिलकर काम करने की जरूरत- मिल्खा

  • ‘मेडल के लिए 5 एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा। इनमें उल्लट, कोच, भारतीय एथलेटिक्स फाड़ना, इंडियन ओलिंपिक एसोसिएशन शामिल हैं। खेल मंत्रालय को इन सब की बैठक करनी चाहिए, जिसमें सभी संघों के अध्यक्ष और सचिव शामिल हों। ‘
  • ‘उनसे पूछा जाना चाहिए कि जब सरकार पैसा, स्टेडियम, खेल सामग्री, कोच उपलब्ध करा रही है तो मेडल क्यों नहीं आ रहा है। हमें स्कूल गेम्स की राष्ट्रीय एथलेटिक्स श्रृंखलाओं से एथलीट तलाशने होंगे और उन्हें तैयार करना होगा क्योंकि स्कूल गेम्स में हर एज ग्रुप का टैलेंट आता है। चुना हुआ उल्लट को एकेडमी में डालना होगा। ‘
  • ‘हर राज्य में एथलेटिक्स एकेडमी खोलनी होगी। एकेडमी में बड़ी सैलरी (2 से 3 लाख) पर कोचों की नियुक्ति कॉन्ट्रैक्ट बेस पर हो। कोचों से कहना होगा कि 2 साल में एशियन, 4 साल में ओलिंपिक मेडलिस्ट खिलाड़ी चाहिए। आपको पता है कि क्या सुविधाएं होनी चाहिए। साथ ही इन एथलीट के प्रदर्शन पर लगातार नजर रखनी होगी। फिर 2024 ओलिंपिक में मेडल का मौका बन सकता है। ‘





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