• एक से डेढ़ महीने तक कंपनी चलाने के लिए बची है फंडिंग
  • व्यवसाय बदलकर अब ऑन लाइन योगा क्लास बन रहा है

दैनिक भास्कर

11 मई, 2020, 04:53 PM IST

मुंबई। कोविड -19 के कारण भारतीय बंद-अप्स को इस महीने पैसे जुटाना मुश्किल हो सकता है। अमेरिका के सिकोइया और एस्सेल सहित कुछ टॉप वेंचर्स फर्म ने चेतावनी दी है कि किसी को भी बहुत जल्दी पैसा मिलना मुश्किल है। पिछले साल स्टॉप-अप्स कंपनियों ने 14.9 अरब डॉलर का फंड जुटाने में सफलता हासिल की थी।

व्यापार को नए सिरे से शुरू करने की जरूरत है

पांच वेंचर कैपिटलिस्ट ने बताया कि केवल अपने मौजूदा विभागों से सबसे अच्छी कंपनियों में से कुछ को आगे पैसे प्राप्त करने में सफलता मिलेगी। इस तेजी से बदलाव ने कई भारतीय ऑफ-अप्स को फंड रेजिंग करने व अपने व्यवसाय का विस्तार करने के लिए हर संभव तरीके ढूंढने के लिए मजबूर कर दिया है। बंगलुरू के 36 साल पुराने उद्यमी समिक सरकार को विभाजित -19 संकट से पहले ही अपने ऑनलाइन अपैरल स्टोर से लाभ पाने का प्रबंधन कर रहे थे। पर अब उन्हें अपने व्यापार को नए सिरे से शुरू करना पड़ रहा है।

वेंचर कैपिटल और सेंट्रल के निवेश में कैमगी गिरावट आई

सरकार ने कहा कि मैंने बिक्री शुरू की। क्योंकि मैं यही कर सकता था और मुझे लोगों को सैलरी भी देनी है। तेज वैश्विक आर्थिक मंदी, भारत में 1.3 अरब लोगों की जनसंख्या पर लॉकडाउन और वेंचर कैपिटल के पलायन जैसे मुद्दे अब जिस पर-अप कम्युनिटी का टेस्टिंग कर रहे हैं, अब वह जल्दी से दुनिया का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। 2018 में वॉलमार्ट को 16 अरब डॉलर के लिए बेची गई भारतीय ई-टेलर फ्लिपकार्ट की सफलता ने ग्लोबल वेंचर कैपिटल फर्म से अरबों डॉलर की फंडिंग बढ़ाने में सफलता हासिल की। लेकिन कुछ ही महीनों में सारा कैश गायब हो गया। अर्नेस्ट और यंग का अनुमान है कि इस साल भारत में वेंचर कैपिटल और सेंट्रल इक्विटी के निवेश में 45 से 60 प्रतिशत की गिरावट की उम्मीद है।

कोविद -19 के बाद आधे व्यापार नहीं बचेंगे

Tracxn की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वर्ष 2019 में 1406 अप-अप्स कंपनियों को फंडिंग होती थी। वर्ष 2008 में यह संख्या महज 351 थी। बेंगलुरु स्थित वेंचर कैपिटल फर्म चिराटी वेंचर्स के संस्थापक और अध्यक्ष सुधीर सेठी ने कहा, जब आप प्री-कोविड बिजनेस मॉडल्स को देखते हैं तो उनमें से आधे पोस्ट-कोविड से बच नहीं पाएंगे। अप्रैल में भारत द्वारा उठाए गए कदम, जिसमें विदेशों से निवेश की जांच की बात कही गई है, से फंडिंग फ्रीज बढ़ गई है। यह कदम चीनी कंपनियों की विस्तारवादी नीति को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है।

जापान का सॉफ्टबैंक भी फंड देने में नहीं दिखा रहा है

जापानी टेक्नोलॉजीज को सपोर्ट करने वाला सॉफ्टबैंक भी अब भारतीय ऑफ-अप्स सबके लिए फंडिंग नहीं सोच रहा है। क्योंकि हाल के दिनों में इसे कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। मुंबई स्थित लाइटबॉक्स वेंचर्स के पार्टनर सिवर्ल्ड ने कहा कि इससे अच्छाता बनाए रखने के लिए निवेशकों और स्टॉप-अप्स के पास सीमित विकल्प बचे हैं। अप-अप्स से संपर्क किए जाने पर संस्थापकों ने कहा कि उनके पास कुछ एक महीने के लिए पर्याप्त मात्रा में बची हुई है।

सब कुछ ठहर गया, बहुत बड़ा झटका लगा है

अपनी बहन तनिया के साथ मुंबई स्थित अनलिमिटेड क्लोथिंग ब्रांड सुता की कोनदार सुजाता बिस्वास ने कहा कि इस संकट से ठीक पहले हमारे पास बड़े विस्तार की योजनाएं थीं। उन्होंने कहा कि अब सब कुछ ठहर गया है। यह एक बहुत बड़ा झटका है। बिस्वास ने कहा, सुता ने लॉकडाउन से पहले तीन साल तक तिगुनी बिक्री देखी थी। अब सभी व्यवसाय बंद कर दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बिना कुछ नगदी मिले बस डेढ़ महीने तक कामकाज का पासारा हो सकता है।

करी ने भारत में अपने जिम को बंद कर दिया

बेंगलुरु स्थित एक फिटनैस फर्म क्योर.फिट, ने भी भारत में अपने जिम और स्वास्थ्य उत्पादों को बंद कर दिया। साथ ही सैलरी भी जी दिया है। हाल के हफ्तों में लगभग 800 लोगों की छुट्टी कर दी गई है। अब जबकि लॉक डाउन के दौरान लोग घरों में बंद हैं, यह फॉर्म क्लास योगा क्लासेस करा रहा है और ग्रोसरीज की होम नोटिफिकेशन में जुट गया है। ऑनलाइन टिकट सेलर बुक माई शो अब अपने यूजर्स को व्यस्त रखने के लिए इंस्टाग्राम पर फ्री के कंटेंट लाइव कर रहा है।

जोमाटो ने शराब की पेशकश शुरू की

घर-घर खाने की तैयारी करने वाले जोमातो ने अब शराब की तारीख करनी शुरू कर दी है। इसी तरह स्विगी और होटल ऑपरेटर ओयो और तड़बो ने अपने यहां कर्मचारियों की या तो छुट्टी कर दी है या फिर उनकी सैलरी में कटौती कर दी है या फिर उन्हें लंबी छुट्टियों पर भेज दिया है। अपैरल रिटेलर सरकार ने बताया कि लॉकडाउन सप्ताह के बाद भी जब उनका ऑफलाइन स्टोर खुलागा तो डिमांड में 50 प्रतिशत की कमी आगी। उनके पास 35 से 40 फुल टाइम कामगार हैं। 70 कार्यपत्रक पार्ट टाइम हैं। उनके पास बस एक या ज्यादा से ज्यादा 2 महीने का गुजारा करने के लिए कैश रेव है। सरकार ने कहा कि अब इन परिस्थितियों के मद्देनजर हम नए तौर-तरीकों पर विचार कर रहे हैं। अब हम सोच रहे हैं की फैशन की आवश्यकता के अनुरूप पहलुओं के बाजार में उतरा होना चाहिए।





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