• कंपनी ने इन कारणों के लिए कोरोना को जिम्मेदार ठहराया है
  • कोरोना के कारण पूरी दुनिया की एयरलाइंस समस्या से गुजर रहे हैं

दैनिक भास्कर

12 मई, 2020, 12:16 PM IST

नई दिल्ली। कोरोनोवायरस महामारी के कारण दुनिया के प्रमुख आंतरिक एयरलाइंस एविंका (एवियनका) ने रविवार को न्यूयॉर्क में चैप्टर 11% फॉर्म दाखिल किया है। कंपनी ने इन कारणों के लिए कोरोना को जिम्मेदार ठहराया है। कोरोना के चलते हुए लॉकडाउन के कारण पूरी दुनिया की एयरलाइंस समस्या से गुजर रहे हैं। एयरलाइन का कहना है कि उसके बेड़े में 189 विमान हैं, जो एक दिन में लगभग 700 उड़ानें संचालित करते थे।

दुनिया की दूसरी सबसे पुरानी एयरलाइन एविंका है
एविंका की स्थापना 1919 में हुई थी यह दुनिया की दूसरी सबसे पुरानी लगातार चलने वाली एयरलाइन होने का दावा करती है। यूरोमो इंजीनियरिंग के अनुसार, चिली के किंगम एयरलाइंस (एलआईसी) और बार्सिलोना के जीओएल लिन्हास एरेस (जीओएल) के बाद पिछले साल के अंत तक यह लैटिन अमेरिका में तीसरा सबसे बड़ा एयरलाइन था। एविंका पूरे लैटिन अमेरिका में 21,000 लोगों को सीधा रोजगार देता है, जिसमें कोलंबिया में 14,000 से अधिक शामिल हैं, जहां यह देश के राष्ट्रीय वाहक के रूप में कार्य करता है।

2000 के दशक में भी आई को समस्या की समस्या थी
कंपनी के अनुसार पिछले 100 वर्षों में इतनी विपरीत स्थिति कभी नहीं बनी। इससे पहले एवियनका 2000 के दशक की शुरुआत में समस्या की समस्या से जूझ रहा था। उस समय एक बोलिवियन मूल के तेल व्यवसायी जर्मन एफ्रोमोविच ने इस तरह की कोशिश की थी।

भारत में एविएशन सेक्टर को रोजाना 150 करोड़ रुपये का नुकसान
कोरोनावायरस के चलते देश में एविएशन सेक्टर को रोजाना 150 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हो रहा है। देश में प्रतिदिन लगभग 4000 घरेलू और 500 आंतरिक उड़ानों का संचालन होता है। अकेले दिल्ली में ही रोजाना 900 से अधिक उड़ानों का संचालन होता है। भारतीय विमानन उद्योग को 75 से 80 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के नुकसान की आशंका है। इस कारण से रेवन्यू भी 40% गिर सकता है। डीजीसीए के एक अधिकारी का कहना है कि कोरोनानिस से पहले देश में घरेलू और आंतरिक उड़ानों का एक दिन का रेवन्यृक्ष लगभग 350-400 करोड़ रुपये था, जो अब आधा रह गया है।





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