• एविएशन उद्योग उबरने की कोशिश कर रहा था, पर विभाजित -19 से ठप हो गया
  • सरकार को वित्तीय पैकेज जारी करना चाहिए, विमान ईंधन को जीएसटी में लाना चाहिए

दैनिक भास्कर

07 मई, 2020, 05:55 PM IST

मुंबई। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने अनुमान लगाया है कि कोविड -19 महामारी की वजह से एविएशन सेक्टर को 25,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। इस सेक्टर को पटरी पर लौटने में दो साल का समय लग सकता है।

अलग-अलग तरीकों से नुकसान होगा

क्रिसिल ने अपनी जारी रिपोर्ट में कहा है कि इस लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर विमान सेवा कंपनियों को होगा। उन्हें तकरीबन 17-18 हजार करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान उठाना पड़ेगा। हवाई अड्डा संचालकों को पांच हजार करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका है। हवाई अड्डों पर बने आउटलेटों को 1,700 करोड़ रुपये से 1,800 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। क्रिसिल के निदेशक (परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स) जगनारायण पद्मनाभन ने रिपोर्ट पर एक टेलीकॉन्फ्रेंस में कहा कि जेट एयरवेज के बंद होने के कारण पिछले साल घरेलू विमानन क्षेत्र की वृद्धि दर घटकर 2.5 प्रतिशत हो गई थी। अभी यह उद्योग उबरने की कोशिश ही कर रहा था कि कोरोनावायरस के कारण कारोबार पूरी तरह ठप हो गया था।
एविएशन सेक्टर में विलय और अधिग्रहण हो सकता है

कोरोना से घरेलू विमान सेवा कंपनियों की उड़ानों में औसतन 90 फीसदी हिस्सेदारी भरी हुई थीं। कोरोना के बाद शुरू में यह आंकड़ा 50 प्रतिशत तक रहेगा और पुराने स्तर तक पहुंचने में दो साल का समय लग सकता है। पद्मनाभन ने कहा कि को विभाजित -19 के बाद पूरे एविएशन सेक्टर में कई ढांचागत परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं। कुछ विमान सेवा कंपनियों के विलय और अधिग्रहण की भी संभावना है। उन्होंने कहा कि अभी वर्तमान में विमान सेवा कंपनियां अपने बेड़े में विस्तार नहीं करेंगी।
विमानों की रजिस्ट्री रद्द हो सकती हैं
उन्होंने कहा कि भारतीय एयरलाइंस ने बड़ी संख्या में विमानों के जो नंबर दिए हैं उनमें कुछ संख्या रद्द हो सकती हैं या कम से कम भविष्य के लिए विज्ञापन किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के बाद हवाई यातायात में 40 से 50 प्रति की गिरावट आ गई। क्रिसिल ने सरकार से विमानन क्षेत्र के लिए वित्तीय पैकेज देने, विमान ईंधन को जीएसटी में लाने और इसकी कीमत कम करने, विमान ईंधन के मूल्य के भुगतान के लिए अधिक समय देने और इंजन चार्जिंग करने की मांग की। हालांकि एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने स्वीकार किया कि यदि सरकार विमान ईंधन पर शुल्क नहीं बढ़ाती है तो यह बहुत बड़ी बात होगी।

वैरेन बफे ने एयरलाइंस के कमेट्स पूरे स्टॉक थे

अरबपति निवेशक वारेन बफे ने कहा कि उनकी कंपनी बर्कलैंड हैथवे ने एयरलाइन कंपनियों के अपने सभी शेयर बेच रहे हैं। बफे का यह बयान अमेरिका के एयरलाइन उद्योग के लिए खतरे का संकेत है। यह उद्योग को विभाजित -19 (नया कोरोनावायरस) महामारी के कारण तबाही के कगार पर पहुंच गया है। बफेट बर्कलैंड हैथवे के चेयरमैन हैं। उनके बयानों पर जानने के अधिकारियों की नजर रहती है और वे इसका उपयोग अपने निवेश निवेश के फैसले लेने में करते हैं। कंपनी ने जनवरी-मार्च तिमाही में 50 अबर डॉलर का घाटा दर्ज किया है।





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