आँखों में मौजूद एस -2 रिसेप्टर से भी शरीर में प्रवेश हो सकता है कोरोना

Bytechkibaat7

May 12, 2020 , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,


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मास्क और गहने पहनकर, चेहरे को छूने से बचकर वायरस से बचा जा सकता है। पहले कयास लगाए जा रहे थे की कोरोना आँखों से भी शरीर में घुस सकती है। वैज्ञानिकों ने एक हैरान करने वाला खुलासा उजागर कर दिया है कि कोरोना आँखों में मौजूद एस -2 रिसेप्टर के माध्यम से शरीर में घुस सकता है। ईमानदार व्यक्ति खांसता या छींकता है तो उससे निकलने वाली बूंदों में मौजूद वायरस आंखों में मौजूद एस -2 रिसेप्टर से चिपकार शरीर में फैल सकता है।

अमेरिका के जॉन एप्सिन्स यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन की आंखों में वायरस के पहुंचते ही संक्रमण की शुरुआत हो जाती है। आंखें लाल होने के साथ इसमें सूजन भी आ सकती है। सबसे बड़ा खतरा ये है कि आंखों में मौजूद आंसू के जरिए ये वायरस अपना प्रसार भी बढ़ा सकता है।

दृष्टि रोग विभाग के डॉ। हिप्ली झोहू ने बताया कि इस निष्कर्ष तक पहुंचने केलिए 10 लोगों का पोस्टमार्टम किया गया जिसकी मौत कोरोना से नहीं हुई। इन लोगों के आँखों की जांच की गई तो पता चला कि आँखें में भी एस -2 रिसेप्टर होते हैं जो कोरोना का सबसे बड़ा वाहक है। वायरस जब यहां पहुंचेगा तो वो रिसेप्टर को निष्क्रिय कर देगा और संक्रमण फैलाने के साथ अपना कुनबा बढ़ाने लगेगा।

एस -2 रिसेप्टर वालों में वायरल लोड अधिक

वैज्ञानिकों का दावा है कि एस -2 रिसेप्टर जिन लोगों में अधिक होता है, उन लोगों में वायरल लोड यानि वायरस की मात्रा अधिक हो सकती है।]संक्रमण का पहला डोज रक्त के जरिए शरीर में फैल सकता है। तीस प्रति लोगों में कोरोनावायरस की शुरुआत आँखों से होने की संभावना है। यही कारण है कि पूरी सावधानी बरतने के बाद भी जो लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं उसका ये एक बड़ा कारण हो सकता है।

श्वास नलिका से आँखों तक पहुँचता हो

वैज्ञानिकों का ये भी कहना है कि वायरस श्वास नलिका से आँखों तक पहुँचता हो। ये भी हो सकता है कि आँखों से शुरु हुआ संक्रमण शरीर के दूसरे अंगों में पहुंचता हो। वैज्ञानिकों का कहना है कि आँखों से निकलने वाली गंध संक्रमण के प्रसार का कारण हो सकता है। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतते हुए आंखों की साफ-सफाई पर ध्यान देना चाहिए। जो भी कपड़ा, तौलिया या रूमाल इस्तेमाल कर रहे हैं उसका प्रयोग कोई दूसरा न करें।

बिलकुल संभव है, आंख नाक जुड़ी होती हैं

इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंदन के वायरस जिनोमिक्स के प्रो। पॉल केलम का कहना है कि अगर कोई योग्य व्यक्ति खांसता या छींकता है तो वायरस आंखों में घुसकर श्वास नलिका में उतर रहा है। इसकी पूरी संभावना है क्योंकि आंखें, नाक की लेट्रिल डक्ट से जुड़ी होती हैं।

ऐसा इसलिए क्योंकि जब आप कोई दवा आप आंख में डालते हैं तो उसका स्वाद गले के पिछले हिस्से में महसूस होता है। इसी तरह के वायरस भी आंख से गले में उतर सकते हैं।

सार

  • अभी तक लगाए जा रहे कयास थे लेकिन अब पुष्टि हो गई है
  • जॉन एप्सिन्स यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने शोध में दावा किया है

विस्तार

मास्क और गहने पहनकर, चेहरे को छूने से बचकर वायरस से बचा जा सकता है। पहले कयास लगाए जा रहे थे की कोरोना आँखों से भी शरीर में घुस सकती है। वैज्ञानिकों ने एक हैरान करने वाला खुलासा उजागर कर दिया है कि कोरोना आँखों में मौजूद एस -2 रिसेप्टर के माध्यम से शरीर में घुस सकता है। ईमानदार व्यक्ति खांसता या छींकता है तो उससे निकलने वाली बूंदों में मौजूद वायरस आंखों में मौजूद एस -2 रिसेप्टर से चिपकार शरीर में फैल सकता है।

अमेरिका के जॉन एप्सिन्स यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन की आंखों में वायरस के पहुंचते ही संक्रमण की शुरुआत हो जाती है। आंखें लाल होने के साथ इसमें सूजन भी आ सकती है। सबसे बड़ा खतरा ये है कि आंखों में मौजूद आंसू के जरिए ये वायरस अपना प्रसार भी बढ़ा सकता है।

दृष्टि रोग विभाग के डॉ। हिप्ली झोहू ने बताया कि इस निष्कर्ष तक पहुंचने केलिए 10 लोगों का पोस्टमार्टम किया गया जिसकी मौत कोरोना से नहीं हुई। इन लोगों के आँखों की जांच की गई तो पता चला कि आँखें में भी एस -2 रिसेप्टर होते हैं जो कोरोना का सबसे बड़ा वाहक है। वायरस जब यहां पहुंचेगा तो वो रिसेप्टर को निष्क्रिय कर देगा और संक्रमण फैलाने के साथ अपना कुनबा बढ़ाने लगेगा।

एस -2 रिसेप्टर वालों में वायरल लोड अधिक

वैज्ञानिकों का दावा है कि एस -2 रिसेप्टर जिन लोगों में अधिक होता है, उन लोगों में वायरल लोड यानि वायरस की मात्रा अधिक हो सकती है।]संक्रमण का पहला डोज रक्त के जरिए शरीर में फैल सकता है। तीस प्रति लोगों में कोरोनावायरस की शुरुआत आँखों से होने की संभावना है। यही कारण है कि पूरी सावधानी बरतने के बाद भी जो लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं उसका ये एक बड़ा कारण हो सकता है।

श्वास नलिका से आँखों तक पहुँचता हो

वैज्ञानिकों का ये भी कहना है कि वायरस श्वास नलिका से आँखों तक पहुँचता हो। ये भी हो सकता है कि आँखों से शुरु हुआ संक्रमण शरीर के दूसरे अंगों में पहुंचता हो। वैज्ञानिकों का कहना है कि आँखों से निकलने वाली गंध संक्रमण के प्रसार का कारण हो सकता है। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतते हुए आंखों की साफ-सफाई पर ध्यान देना चाहिए। जो भी कपड़ा, तौलिया या रूमाल इस्तेमाल कर रहे हैं उसका प्रयोग कोई दूसरा न करें।

बिलकुल संभव है, आंख नाक जुड़ी होती हैं

इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंदन के वायरस जिनोमिक्स के प्रो। पॉल केलम का कहना है कि अगर कोई योग्य व्यक्ति खांसता या छींकता है तो वायरस आंखों में घुसकर श्वास नलिका में उतर रहा है। इसकी पूरी संभावना है क्योंकि आंखें, नाक की लेट्रिल डक्ट से जुड़ी होती हैं।

ऐसा इसलिए क्योंकि जब आप कोई दवा आप आंख में डालते हैं तो उसका स्वाद गले के पिछले हिस्से में महसूस होता है। इसी तरह के वायरस भी आंख से गले में उतर सकते हैं।





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