• सरकार के राजस्व प्रयासों को पाटने के लिए पहले ही उधार लेने का लक्ष्य रखा गया था
  • सरकार सुपर रिच जैसे टैक्स को लगा सकती है, जिससे अतिरिक्त पैसा मिलेगा

दैनिक भास्कर

12 मई, 2020, 11:12 PM IST

मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान कर दिया है। कोविड -19 से सामना और देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए इस तरह के भारी भरकम पैकेज की मांग थी। हालांकि यह सवाल भी है कि 20 लाख करोड़ रुपये का उपाय कैसा होगा? यह कुछ इस तरह से समझते हैं कि यह कैसे पूरा किया जा सकता है।

असली पैकेज 13 लाख करोड़ रुपये का है

हालांकि विदेशों में जिस तरह से लोगों के हाथ में पैसे मिले हैं, वैसा भारत में नहीं होनेवाला है। यहां सरकार हाथ में पैसे नहीं देगी। सरकार लेबर, लैंड, लॉ में सुधार करेगी और लिक्विडिटी को सपोर्ट करेगी।वास्तविक पैकेज 13 लाख करोड़ रुपये का है। पहले तो यह समझिए कि जो पैकेज घोषित हुआ है, वह 20 लाख करोड़ पहले के सभी पैकेज को मिलाकर किया गया है। आरबीआई ने अब तक 5 लाख करोड़ रुपये का पैकेज दिया है। 1.70 लाख करोड़ सरकार ने दिया है। कुल मिलाकर 6.70 लाख करोड़ रुपये तो यह हो गया। अब 20 लाख करोड़ में से 6.70 को हटा दें तो सरकार 13 लाख करोड़ रुपये का पैकेज दे सकती है।

20 लाख करोड़ कहां से आएंगे?

सरकार को केवल 13 लाख करोड़ रुपये का हिसाब लगाना है। इसमें सबसे पहले तो एलोमजी से टैक्स हटगे। फिर डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूश टैक्स कोउरेट टैक्स में शामिल करेंगे। जीएसटी को 6 महीने का मोराटोरियम दिया जा सकता है, जिससे 6 लाख करोड़ मिलेंगे। बाकी जो पैसा चाहिए वह सरकार को अपने उधार कार्यक्रम से पूरा करना चाहिए।

सरकार ने कैसे लीगी?

सरकार ने कोविड -19 परिस्थिति के चलते चालू वित्त वर्ष के मंत्रियों में वृद्धि कर दी है। अब सरकार ने वित्त वर्ष 2021 के लिए 12 लाख करोड़ रुपए लेने का फैसला किया है। यह राशि बजट में पहले से तय उधारी के लक्ष्य 7.80 लाख करोड़ रुपए से 4.20 लाख करोड़ रुपए ज्यादा होगी।

सरकार क्यों इस साल भारी मात्रा में बाजार से उधार ले रही है?

कोविद -19 के हमले ने बजट के पूरे आकांड़े और आंकलन बिगाड़ कर रख दिए हैं। सरकारी पैसे की किल्लत से जूझ रही है। देश की पूरी इकोनॉमी 24 मार्च से लॉकडाउन के चलते ठप्प पड़ी है। टैक्स वसूली वाली तरह से प्रभावित हुई है। सरकार की कमाई बहुत ज्यादा घट गई है।

जीएसटी कलेक्शन से भी सरकार को राहत नहीं?

देश में व्यावसायिक आंदोलनों के ठप्प पड़ गए हैं। सरकार की जीएसटी से होने वाली कमाई मार्च में घटकर 28000 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गई। मार्च के पहले 1 लाख करोड़ रुपए के आसपास जीएसटी रहता था।

क्या सरकार अलग से बजटीय घोषणा कर सकती थी?

इसके लिए अलग से बजटीय घोषणा सरकार केवल कर सकती थी, जब सरकार को विभाजित -19 विशेष बजट आया था।

सरकार और मंत्रियों को लेने का लक्ष्य बढ़ सकता है?

दरअसल सरकार ने 20 लाख करोड़ का जो पैकेज घोषित किया है, उसे उम्मीद है कि कोई नहीं था। सरकार ने जोेंड का लक्ष्य रखा था वह राजस्व राजस्व को पाटना था। लेकिन जब 20 लाख करोड़ का पैकेज जारी हुआ है तो सरकारें को बढ़ाएँगी। या यह अमीर लोगों पर टैक्स लगाकर कुछ हासिल कर सकता है।





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