• म्यूचुअल फंड और एलआईसी खरीद में हिस्सा हो सकता है
  • एक्सिस बैंक और आईटीसी के शेयर दो दिनों से गिर रहे हैं

दैनिक भास्कर

06 मई, 2020, 03:13 PM IST

मुंबई। केंद्र सरकार कई निजी कंपनियों में अपनी भागीदारी करने में बेची है। सरकार को यह घाटा इसलिए होगा क्योंकि इस समय शेयर बाजार में गिरावट से कंपनियों के शेयर भी काफी नीचे कारोबार कर रहे हैं। प्रस्तावित शेयर बिक्री में कई म्यूचुअल फंड और एलआईसी बैंक बन सकते हैं। यह डील 2 से 3 प्रति के विनियमन पर हो सकती है।

तीन महीने में इन कंपनियों के शेयरों में 20 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट है

मंगलवार को शेयर बाजार के बंद होने पर दोनों कंपनियों में सरकार की भागीदारी का मूल्य 22,123 करोड़ रुपये था। बुधवार के कारोबार में इन दोनों कंपनियों के शेयरों में और गिरावट देखी गई, जिससे सरकार को थोड़ा कम पैसा मिल सकता है। पिछले तीन महीनों में एक्सिस बैंक के शेयरों का भाव लगभग 60 प्रति गिरे हैं। बैंक के डूबे कर्ज में तेजी से इजाफा हुआ है। आईटीसी के शेयर लगभग 25 प्रति गिरे हैं। इस तरह से इन दोनों कंपनियों में सरकार अगर तीन महीने पहले भाग बेचती तो उसे आज के मूल्यांकन से 24 प्रतिशत ज्यादा राशि मिल सकती थी।

वर्तमान भाव पर सरकार को मिल में 22,000 करोड़ रुपये का घाटा हो सकता है

वर्तमान भाव पर इस हिस्से की बिक्री से सरकार को 22,000 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद है। इन कंपनियों में आईटीसी और एक्सिस बैंक सहित कई कंपनियां शामिल हैं। इन सरकार का पूरा हिस्सा बेच सकता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सरकार इस सप्ताह के अंत तक या अगले सप्ताह की शुरुआत में बिक्री की प्रक्रिया पूरी कर लेगी। ये बल्क डील की सेटिंग में आएंगे। 31 मार्च 2020 तक सरकार की आईटीसी में 7.94 फीसदी और एक्सिस बैंक में 4.69 फीसदी हिस्सा था। इस हिस्से का मालिकाना हक सरकार के ट्रस्ट-एसयूयूटीआई के पास है।

चालू वित्त वर्ष में सरकार का 2.1 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य

मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान सरकार ने अनवेश के जरिए 2.1 लाख करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा है। इसमें भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का 90,000 करोड़ रुपये का आईपीओ भी शामिल है। साथ ही आईडीबीआई बैंक में भी वह अपनी भागीदारी कम करेगा। वित्त वर्ष 2019-20 में सरकार ने 1.05 लाख करोड़ रुपये के ऋवेश का हासिल रखा था, जिसमें से वह 65,000 करोड़ रुपये ही जुटा पाया था।

51 लिस्टेड और नॉन लिस्टेड में सरकार की भागीदारी है

एसयूयूटीआई की 51 सूचियों और गैर-सूचीबद्ध कंपनियों में भाग है। इसमें एनएसडीएल, एसोटी फाइनेंस, यूटीआई-आईएएस, यूटीआई इंफ्रास्ट्रक्चर टेक्नोलॉजीज के बारे में, नॉर्थ ईस्टर्न डेवेलपमेंट फाइनेंस कोर्प, स्टॉक होल्डिंग कोर्प ऑफ इंडिया सहित कई कंपनियां हैं। इसका सबसे बड़ा निवेश एक्सिस बैंक, आईटीसी और लार्सन एंड टुब्रो में था। जिसमें लार्सन एंड टुब्रो की पूरी भागीदारी पहले ही बेची जा चुकी है।





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