अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस 2020, ये नर्सें अपने परिवारों से दूर हैं और मेरठ में अपनी ड्यूटी कर रही हैं – आंतरिक नर्स दिवस: परिवार से दूर रहकर खेलते हैं ड्यूटी की जिम्मेदारी, ऐसे करती हैं लोग


अरिष चुनीवी, अमर उजाला, मेरठ
अद्यतित मंगल, 12 मई 2020 02:21 पूर्वाह्न IST

अमृता सिंह बच्चों के साथ
– फोटो: अमर उजाला

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कोरोना महामारी के इस दौर में नूर बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जान पर खेलकर मरीजों का इलाज करने में मदद कर रहे हैं। अपने घरों से दूर, परिवार से दूर रहकर अपनी ड्यूटी पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ कर रहे हैं। मंगलवार को आंतरिक नर्स दिवस है। इस दिन इनकी सेवा को याद करना जरूरी है, क्योंकि बिना नर्सिंग स्टाफ के इस लड़ाई को लड़ना मुमकिन नहीं है। मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में बने को विभाजित -19 में तैनात नर्स अंकिता और काजल को जब भी जल्द मिलता है वह झुग्गी बस्तियों में जाकर लोगों को कोरोना के खतरे और इससे बचाव की जानकारी देती है। इनकी तरह अन्य नर्स भी अपनी ड्यूटी जिम्मेदारी से खेल रही हैं।

जागरूकता जरूरी है
झुग्गी बस्ती में रहने वाले लोग इससे अंजान थे, उन्हें पता नहीं था कोरोना कैसा होता है, इससे कैसे बचा जा सकता है। ऐसे में जागरूकता के अभाव में इन लोगों की जान तो खतरे में पड़ती ही साथ, ही इन लोगों के संपर्क में आने से अन्य कई लोगों का जीवन भी संकट में आ सकता है। इसीलिए हमने इन लोगों को जागरूक करने की पहल शुरू की। – अंकिता, नूर

साबुन से हाथ धोना
झुग्गी बस्तियों में जाकर वहाँ रहने वाले लोगों खासकर बच्चों को सोशल डिस्टेंस कैसे बनाना है, इसकी जानकारी दी है। साथ ही उन्हें यह भी बताते हैं कि बार बार साबुन से हाथ धोने हैं, घर से बाहर नहीं जाना है, बस जरूरत पड़ने पर ही घर से बाहर निकलें और वर्क लगाकर रहें। हमने उन्हें कोरोना कितना खतरनाक है इसकी भी जानकारी दी है। – काक, नूर

रोगी की सेवा ही पहला धर्म है
हमारे पेशे में मरीज की सेवा करना ही पहला धर्म है। मैं रमजान में पूरे रोजे रख रहा हूं। ड्यूटी के साथ रोज़े रखना कठिन कार्य है, लेकिन ऊपर वाला सब साहस देता है। मेरी ड्यूटी कोविड वार्ड में है। अपने घर को भी नहीं पाटी। घर वालों के आशीर्वाद से अपनी ड्यूटी कर रही हूं। संकट की घड़ी में सभी को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। – रुखसार, नूर

बच्चों से भी नहीं मिल रहा है

मेरी ड्यूटी कोरोनाटेबल वार्ड में लगी है। घर में छोटे बच्चे होने के कारण मैं उनसे भी नहीं मिल पा रहा हूं। खुद भी सोशल डिस्टेंस का पालन कर रहे हैं। मरीज के साथ-साथ अपने परिवार को भी सुरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है। महामारी के इस दौर में सभी को ईमानदारी से अपना काम करना चाहिए। – अमरीश सिंह

1965 में हुई थी शुरुआत
नर्सिंग की संस्थापक फ्लोरेंस नाइटिंगेल का जन्म 12 मई 1820 को हुआ था। उनके जन्मदिन पर इस दिन की शुरुआत की गई। सबसे पहले 1965 में यह दिवस मनाया गया। तब से लेकर आज तक यह दिवस आंतरिक काउंसिल ऑफ नर्सों द्वारा आंतरिक नर्स दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन नर्सों के सराहनीय कार्य और साहस के लिए भारत सरकार के परिवार और कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगल प्रतिष्ठित की शुरुआत की।

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कोरोना महामारी के इस दौर में नूर बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जान पर खेलकर मरीजों का इलाज करने में मदद कर रहे हैं। अपने घरों से दूर, परिवार से दूर रहकर अपनी ड्यूटी पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ कर रहे हैं। मंगलवार को आंतरिक नर्स दिवस है। इस दिन इनकी सेवा को याद करना जरूरी है, क्योंकि बिना नर्सिंग स्टाफ के इस लड़ाई को लड़ना मुमकिन नहीं है। मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में बने को विभाजित -19 में तैनात नर्स अंकिता और काजल को जब भी जल्द मिलता है वह झुग्गी बस्तियों में जाकर लोगों को कोरोना के खतरे और इससे बचाव की जानकारी देती है। इनकी तरह अन्य नर्स भी अपनी ड्यूटी जिम्मेदारी से खेल रही हैं।

जागरूकता जरूरी है

झुग्गी बस्ती में रहने वाले लोग इससे अंजान थे, उन्हें पता नहीं था कोरोना कैसा होता है, इससे कैसे बचा जा सकता है। ऐसे में जागरूकता के अभाव में इन लोगों की जान तो खतरे में पड़ती ही साथ, ही इन लोगों के संपर्क में आने से अन्य कई लोगों का जीवन भी संकट में आ सकता है। इसीलिए हमने इन लोगों को जागरूक करने की पहल शुरू की। – अंकिता, नूर

साबुन से हाथ धोना

झुग्गी बस्तियों में जाकर वहाँ रहने वाले लोगों खासकर बच्चों को सोशल डिस्टेंस कैसे बनाना है, इसकी जानकारी दी है। साथ ही उन्हें यह भी बताते हैं कि बार बार साबुन से हाथ धोने हैं, घर से बाहर नहीं जाना है, बस जरूरत पड़ने पर ही घर से बाहर निकलें और वर्क लगाकर रहें। हमने उन्हें कोरोना कितना खतरनाक है इसकी भी जानकारी दी है। – काक, नूर

रोगी की सेवा ही पहला धर्म है
हमारे पेशे में मरीज की सेवा करना ही पहला धर्म है। मैं रमजान में पूरे रोजे रख रहा हूं। ड्यूटी के साथ रोज़े रखना कठिन कार्य है, लेकिन ऊपर वाला सब साहस देता है। मेरी ड्यूटी कोविड वार्ड में है। अपने घर को भी नहीं पाटी। घर वालों के आशीर्वाद से अपनी ड्यूटी कर रही हूं। संकट की घड़ी में सभी को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। – रुखसार, नूर





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