• सेबी ने 86 पेज के आवेदन में यह आदेश दिया
  • नवंबर 2014 में इस मामले की जांच शुरू हुई थी

दैनिक भास्कर

05 मई, 2020, 10:16 PM IST

मुंबई। पूंजी बाजार परिचालन सेबी ने फाइनलाइसिस क्रेडिट एंड ट्रस्ट कंपनी लि। 13 सहित अन्य कंपनियों को पूंजी बाजार में कारोबार करने पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह प्रतिबंध इन कंपनियों द्वारा नकली कैनिडेटेड शेयर सर्टिफिकेट्स को जारी करने के कारण लगाया गया है। सेबी ने मंगलवार की देर रात 86 पेज का आदेश जारी किया है।

कंपनी के अधिकारी किसी दूसरी कंपनी में पांच साल तक नहीं चलेगा

सेबी ने अपने सर्कुलर में कहा है कि इस आदेश के बाद इन कंपनियों के अधिकारी किसी और लिस्टेड या रेगर्ड इंटरमीडियरीज में पांच साल तक के लिए न तो डाइरेक्टर हो सकते हैं और न ही किसी प्रमुख पद पर हो सकते हैं। इसके अलावा उपरोक्त कंपनियों में से चार कंपनियों ने अवैध तरीके से पैसे भी कमाए। सेबी ने इस मामले को नवंबर 2014 में जांच शुरू की थी। इसके बाद इन कंपनियों को ओरिजिनल पब्लिक बैंक को फर्जी शेयर सर्टिफिकेट जारी करने का आरोपी पाया गया। यह सर्टिफिकेट 2012 में जारी किए गए थे।

नकली सर्टिफिकेट को ओरिजिनल बनाकर बेचा जाता था

सेबी के आदेश के मुताबिक इसके बाद नकली कैनिडेटेड शेयर सर्टिफिकेट को बेचा गया, जिसमें निर्माताओं ने उसे ओरिजिनल सर्टिफिकेट बनाकर दिया यह साबित किया कि यह शेयर सर्टिफिकेट उसे ट्रांसफर किया गया है। जबकि हकीकत में ऐसा कुछ नहीं हुआ था। इन सबके आधार पर सेबी ने फाइनलाइसिस और पांच व्यक्तिगत लोगों दिलीप शाह, उनके बेटे जिगर शाह, बिपिन डिवे शुभ, सज गाढी औऱ शाम गांधी पर पांच साल तक बाजार में कारोबार पर प्रतिबंध लगा दिया।

8 लोगों पर 3 साल तक का प्रतिबंध

इसके अतिरिक्त सेबी ने 8 अन्य लोगों मोहम्मद रफी, रोमा खान, मोहम्मद सलीम खान, आमिर हमजा, हकीम खान, अब्दुल हकीम खाम, अब्दुल जमीर हकीम खान, तलत हेततअली और मोहम्मद रेहाना खान को तीन साल के लिए बाजार से कारोबार करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। दिया है। इसके अलावा सेबी ने दिलीप शाह से 3.9 करोड़ रुपये और जिगर शाह से 66.42 लाख रुपये लौटाने को भी कहा है। गांधी से ४५.५५ लाख रुपए और डिवैल्पमैंट से 9.45 लाख रुपए लौटाने को कहा है।

बीएसई पर फिर से कंपनी को लिस्ट बना दिया गया

जांच में यह पाया गया कि शाह और गांधी के पास हालांकि सीमित हिस्सेदारी ही थी। लेकिन वे लगातार सार्वजनिक उपक्रम को बिना किसी मंजूरी या जानकारी के शेयर सर्टिफिकेट बेच देते थे। इसके पीछे उद्देश्य यह था कि जिन कंपनियों के पास फाइनलाइसिस के शेयर थे, उसको बेचकर पैसे ले लिए जाएं। सेबी ने अपने 86 पेज के नंबर में कहा है कि शाह और गांधी दोनों विनायक सारखोट के संपर्क में थे। विनायक फाइनलाइसिस में कंप्लायेंस अधिकारी हेंड। वे उन्हें कंपनी को पतई पर फिर से लिस्टेटकर 93 प्रतिशत शेयर बेचे थे, जो सार्वजनिक शेयर धारकों के पास थे।

एक ही व्यक्ति बार-बार विटनेस बना

इसी तरह डीवे शुभ ने 93 प्रतिशत शेयर कंपनी के खरीदे थे। सेबी की जांच में पता चला कि दोनों ओर से ईमेल का बातचीत-प्रदान हुआ। साथ ही ड्राफ्ट एमओयू भी सभी कंपनियों को दिया गया जिसमें 93 प्रतिशत शेयर के लिए शाह, गांधी, सारखोट और गाढी को विक्रेता दिखाया गया। जबकि निस्वार्थ रूप से दिखाए गए। साथ ही ओरिजिनल शेयर सर्टिफिकेट को फर्जी तरीके से बनाकर भी इन लोगों ने पैसे कमाए। शेयर ट्रांसफर डीड्स में एक ही व्यक्ति को बार बार विटनेस के रूप में पेश किया गया। इन शेयरों को बाजार मूल्य से कम पर बेचा गया था।

दो लोगों की पहले ही हो गई थी मृत्यु

सेबी ने कहा कि हालांकि एमडी सज्जाद पावने शेयर सर्टिफिकेट के नकली कारोबार में शामिल नहीं थे, लेकिन उन्होंने यह पता किया कि 8 कंपनियों को शेयर ट्रांसफर को मंजूरी दी गई कि इस संबंध में ओरिजिनल कंपनी ने शिकायत दर्ज कराई है। सेबी ने पावने और सारखोट पर कोई दोष या सजा नहीं सुनाई क्योंकि ये दोनों का पहले ही निधन हो चुका है।





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