• राणा कपूर की 3 बेटियां, पत्नी और उनकी कंपनी को आरोपी बनाया जाएगा
  • राणा कपूर के परिवार और इनकी कंपनियों को घोटालों से लाभ हुआ है

दैनिक भास्कर

06 मई, 2020, 01:09 अपराह्न IST

मुंबई। यस बैंक के मालिक राणा कपूर और उनके परिवार के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मुंबई में मनी लंड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत विशेष न्यायालय में पहली चार्ज शीट फाइल कर सकता है। इस चार्जशीट में राणा कपूर और उनके परिवार के खिलाफ आरोप लगाए जाएंगे। जिसमें राणा कपूर की 3 बेटियों, उनकी पत्नी और उनकी कंपनियों को आरोपी बनाया जा सकता है। इसमें बिंदू कपूर, राखी कपूर, रोशनी, राधा कपूर, मोर्गन क्रेडिट, आरएबी उद्यम आदि शामिल हैं।

8 मार्च को राणा कपूर को गिरफ्तार किया गया था

आरोपी उन लोगों को बनाया जाएगा, जिनको इस पूरे मामले से लाभ हुआ है। ईडी का आरोप है कि राणा कपूर और उनके परिवार के साथ उनकी कंपनियों को लाभ हुआ है। यस बैंक ने साल 2018 में दो एफएल के साथ लेन-भुगतान किया था, जिसमें सीबीआई फ्रॉड की जांच कर रही थी। जबकि ईडी मनी लंड्रिंग की जांच कर रही थी। 8 मार्च को ईडी ने हस्तक्षेप के बाद राणा कपूर को गिरफ्तार किया था। ईडी ने अब तक राणा कपूर, उनके परिवार और अन्य कंपनियों से जुड़े 168 बैंक खातों को अटैच किया है जिसमें 52 करोड़ रुपये मिले हैं।

प्रियंका गांधी ने राणा कपूर को 2 करोड़ रुपए में बेची थी

जानकारी के मुताबिक पहली चार्जशीट में कुल 5,050 करोड़ रुपये के चार्ज हो सकते हैं। ईडी ने इसी तरह 3 करोड़ रुपए के म्यूचुअल फंड अकाउंट, एमएफ हुसैन द्वारा राजीव गाँधी की पेंटिंग के साथ कुल 4 करोड़ रुपए की 59 पेंटिंग को भी अटैच किया है। इस पेंटिंग को प्रियंका गांधी वाड्रा ने 2010 में 2 करोड़ रुपए में राणा कपूर को बेच दिया था।

ज्यादातर लोन टूएफएल को दिया गया

ईडी के आरोप के मुताबिक राणा कपूर जब यस बैंक के एमडी और सीईओ थे, उस समय (अप्रैल-जून 2018) के दौरान 3,700 करोड़ रुपये का लोन उन्होंने दोएफएल को दिया था। इसमें से दोएफएल ने राणा कपूर के परिवार की 100 प्रतिशत मालिकाना हक वाली दूसरी कंपनी ड्यूट अर्बन वेंचर्स को 600 करोड़ रुपये का लोन दे दिया। यह कंपनी राणा कपूर की बेटियों रोशनी कपूर और राधा कपूर के नाम पर है। ईडी के अनुसार यह लोन दो प्रॉपर्टी के कोलैटरल के तौर पर दिया गया था। इस जमीन की वास्तविक कीमत तकरीबन 39.66 करोड़ रुपये है, लेकिन यह ऊपर चढ़ा कर 735 करोड़ रुपये दिखाया गया है।

कृषि भूमि को भविष्य की कीमत के आधार पर दिया गया था

ईडी के आरोप के मुताबिक उपरोक्त जमीन कृषि की जमीन थी। लेकिन यह भविष्य में रिहायशी जमीन बताकर इसकी कीमत बढ़ा दी गई थी। इस भूमि में से 7.79 एकड़ भूमि अलीबाग में है और 91.63 एकड़ रायगढ़ में है। दो एफएल ने इसकी कीमत 485 करोड़ रुपए बताई। इसी तरह यस बैंक ने 750 करोड़ रुपए बिलीफ रियल्टर्स को दिया था जो दोएफएल समूह की कंपनी थी। 1,200 करोड़ रुपये का लोन दो एफएल की एक अन्य कंपनी आधार हाउसिंग को भी दिया गया था।

आरबीआई ने विशेष ऑडिट करके रोका लोन

दरअसल बिलीफ रियल्टर्स को 27 सितंबर 2018 को लोन दिया गया था। उससे पहले अगस्त 2018 में एमसीसी यानी मैनेजमेंट क्रेडिट कमिटी ने 950 करोड़ रुपए का अतिरिक्त लोन इसी कंपनी के लिए मंजूर किया था। चूंकि लोन की राशि कुल मिलाकर 1700 करोड़ रुपये हो रही थी इसलिए बोर्ड क्रेडिट कमिटी की इसको मंजूरी चाहिए थी। लेकिन यह बैठक में डिस्कस नहीं किया गया। 29 अगस्त 2018 को 950 करोड़ रुपए का लोन एमसीसी ने आरकेडब्ल्यू डेवलपर्स को दे दिया। यह लोन तब घेरे में आ गया, जब लोन डाक्यूमेंट पूरा हुए बिना एमसीसी ने इस कर्ज को मंजूरी दे दी। इसी तरह रिज़र्व बैंक ने एक विशेष ऑडिट कराने का फैसला किया और उसके बाद आरकेडब्ल्यू का यह लोन कैंसल कर दिया गया।

यस बैंक ने जिन कंपनियों को कर्ज दिया उसमें काफी का लोन एनपीए हो गया। इसमें प्रमुख रूप से अनिल धीरूभाई अंबानी समूह, एस्सेल ग्रुप, कॉक्स एंड किंग्स, रेडियस डेवलपर्स, सहाना डेवलपर्स, ओमकार ग्रुप, अवंथा ग्रुप आदि का समावेश है।





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