Covid19, उत्परिवर्तन कोरोनोवायरस से अधिक खतरनाक हैं – वायरस में ज्यादा म्यूटेशन खतरे की घंटी, पहले की तुलना में फैलने की अवस्था हो सकती है तेज

Bytechkibaat7

May 7, 2020 , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,


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कोरोनावायरस जानने में अपना संक्रमण फैलाने की हर संभव कोशिश कर रहा है। अमेरिका के लॉस एल्डमॉस नेशनल बिलोरेटरी के वैज्ञानिकों को पता चला है कि कोरोना के वायरस वाले क स्पक प्रोटीन ’में 14 वें म्यूटेशन देखा गया है। ऐसे में इससे अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। पहले की तुलना में ये और अधिक खतरनाक हो सकता है। सावधानी ही सरल निष्कर्ष है।

डॉ। बेटों कॉबर्र ने 33 पृष्ठों की रिपोर्ट में कहा है कि यह खतरनाक क्षण है। हमने देखा कि वायरस तेजी के साथ खतरनाक रूप के साथ म्यूटेट हो रहा है। महामारी फैलने के पत्रों के दिनों में तुलना में ये पूरी तरह अलग है। यह देखकर यह कहा जा सकता है कि मार्च में जो वायरस कािनो था, वह उससे ज्यादा खतरनाक हो गया है।

वायरस के रूप में अधिक जनसंख्या के बीच फैलेगा स्थानीय स्तर पर संक्रमण का मापरा बढ़ जाता है और इसके फैलने की चाल भी पहले की तुलना में तेज हो जाएगी। हालाँकि ये स्पष्ट नहीं किया गया है कि वायरस पहले से अधिक जानलेवा होगा या पुरानेपन की तरह ही जान पर भारी पड़ेगा। हां इतना जरूर है कि वायरस का पुराना रूप खत्म हो जाएगा और लोग नए तरह के संक्रमण की चपेट में आ जाएंगे।

टीका बनाने के करीब पहुंचीं टीमों में निराशा

सीखने से लिए गए छह हजार सैंपल की जेनेटिक सीक्वेसिंग का विश्लेषण करने के बाद वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं। वायरस अगर इसी तरह से स्टेनो रहे हैं तो जो वैज्ञानिक इसकी वैक्सीन बनाने के अंतिम चरण में हैं उन्हें निराशा हो सकती है। संभव है कि वायरस के स्टेन बदलने के कारण मरीजों पर उसका असर न हो। ऐसी स्थिति में वायरस के म्यूटेशन के साथ उसके इलाज और रोकथाम के तौर तरीकों पर विचार करना होगा।

पर यहाँ पर दावा कमजोर हो रहा है वायरस: अमेरिका के एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी का दावा है कि वायरस समय के साथ कमजोर होगा और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता उसका मुकाबला कर सकेगी। 382 रोगियों के सैंपल के अध्ययन में वैज्ञानिकों को पता चला है कि एक सैंपल में बड़ी संख्या में वायरस का जेनेटिक मैटरियल गायब था।

2003 के सार्स वायरस में भी यही बदलाव देखने को मिला था जिसके बाद वह कमजोर हो गया था। कोरोना में अगर ऐसा है तो वह जल्द ही कमजोर होने के साथ खत्म हो जाएगा।

ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि कोविड -19 (कोरोनावायरस) के लिए जिम्मेदार सार्स-कोव -2 अब तक लगभग 200 बार जेनेटिक परिवर्तन कर चुका है और यह लगातार मानव शरीर के साथ सामंजस्य बैठाने के लिए तेजी से अपने जींस में बदलाव कर रहा है। रहा है। यह दावा करता है कि वैश्विक स्तर पर 7500 से ज्यादा रोगियों के सैंपलों में मिले वायरस के जींस का विश्लेषण करने के बाद किया गया है।

माना जा रहा है कि यह खोज इस जानलेवा महामारी की दवा और वैक्सीन बनाने में महत्वपूर्ण मदद दे सकती है। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन का यह अध्ययन साइंस जर्नल फे इंफेक्शन, जेनेटिक्स एंड इवोलुशन ’में प्रकाशित किया गया है। इस अध्ययन में वायरस के जीनोम की विविधता के पैटर्न की विशेषता को चिह्नित किया गया है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि सार्स-कोव -2 की वैश्विक जेनेटिक विविधता का बड़ा हिस्सा कोरोना से बुरी तरह प्रभावित देशों में मौजूद था। यह इन देशों में एक भी ेंट पेशेंट -0 (वह रोगी, जिससे महामारी की शुरुआत हुई) ‘की अनुपस्थिति के बावजूद वह चल रहा था।

कम म्यूटेशन वाले जीनोम से बन सकता है वैक्सीन

वैज्ञानिकों ने 198 म्यूटेशन की पहचान की है, जो स्वतंत्र रूप से एक से अधिक बार दिखाई दिए हैं। इनसे यह पता लग सकता है कि वायरस कैसे फैल रहा है। शोधकर्ताओं ने कहा कि जिन जीनोम के कुछ हिस्सों में बहुत कम म्यूटेशन हुआ है। उन्हें वैक्सीन बनाने के काम में लिया जा सकता है। बालोक्स ने कहा कि चुनौती यह है कि उसे रोकने वाला टीका या दवा क्या लंबे समय तक प्रभावी हो सकती है?

सार

  • वायरस के बदले रूप के मुताबिक वैक्सीन, नहीं तो असर नहीं होगा
  • फैलने की कोशिश पहले की तुलना में हो सकती है तेज

विस्तार

कोरोनावायरस जानने में अपना संक्रमण फैलाने की हर संभव कोशिश कर रहा है। अमेरिका के लॉस एल्डमॉस नेशनल बिलोरेटरी के वैज्ञानिकों को पता चला है कि कोरोना के वायरस वाले क स्पक प्रोटीन ’में 14 वें म्यूटेशन देखा गया है। ऐसे में इससे अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। पहले की तुलना में ये और अधिक खतरनाक हो सकता है। सावधानी ही सरल निष्कर्ष है।

डॉ। बेटों कॉबर्र ने 33 पृष्ठों की रिपोर्ट में कहा है कि यह खतरनाक क्षण है। हमने देखा कि वायरस तेजी के साथ खतरनाक रूप के साथ म्यूटेट हो रहा है। महामारी फैलने के पत्रों के दिनों में तुलना में ये पूरी तरह अलग है। यह देखकर यह कहा जा सकता है कि मार्च में जो वायरस कािनो था, वह उससे ज्यादा खतरनाक हो गया है।

वायरस के रूप में अधिक जनसंख्या के बीच फैलेगा स्थानीय स्तर पर संक्रमण का मापरा बढ़ जाता है और इसके फैलने की चाल भी पहले की तुलना में तेज हो जाएगी। हालाँकि ये स्पष्ट नहीं किया गया है कि वायरस पहले से अधिक जानलेवा होगा या पुरानेपन की तरह ही जान पर भारी पड़ेगा। हां इतना जरूर है कि वायरस का पुराना रूप खत्म हो जाएगा और लोग नए तरह के संक्रमण की चपेट में आ जाएंगे।

टीका बनाने के करीब पहुंचीं टीमों में निराशा

सीखने से लिए गए छह हजार सैंपल की जेनेटिक सीक्वेसिंग का विश्लेषण करने के बाद वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं। वायरस अगर इसी तरह से स्टेनो रहे हैं तो जो वैज्ञानिक इसकी वैक्सीन बनाने के अंतिम चरण में हैं उन्हें निराशा हो सकती है। संभव है कि वायरस के स्टेन बदलने के कारण मरीजों पर उसका असर न हो। ऐसी स्थिति में वायरस के म्यूटेशन के साथ उसके इलाज और रोकथाम के तौर तरीकों पर विचार करना होगा।

पर यहाँ पर दावा कमजोर हो रहा है वायरस: अमेरिका के एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी का दावा है कि वायरस समय के साथ कमजोर होगा और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता उसका मुकाबला कर सकेगी। 382 रोगियों के सैंपल के अध्ययन में वैज्ञानिकों को पता चला है कि एक सैंपल में बड़ी संख्या में वायरस का जेनेटिक मैटरियल गायब था।

2003 के सार्स वायरस में भी यही बदलाव देखने को मिला था जिसके बाद वह कमजोर हो गया था। कोरोना में अगर ऐसा है तो वह जल्द ही कमजोर होने के साथ खत्म हो जाएगा।


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अब तक 200 बार जेनेटिक परिवर्तन





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