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  • डोनाल्ड ट्रम्प जो बिडेन; इलेक्टोरल कॉलेज वोटिंग अपडेट | अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया, यह कैसे काम करता है, आप सभी को पता होना चाहिए

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वॉशिंगटन19 मिनट पहले

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तीन नवंबर को अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव हुए। जो बाइडेन जीत और डोनाल्ड ट्रम्प हरे। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया जटिल है। बाइडेन को प्रेसिडेंट इलेक्ट भले ही कहा जा रहा हो, लेकिन आधिकारिक तौर पर नतीजों का ऐलान 6 जनवरी को होगा। इसके पहले सबसे महत्वपूर्ण चरण इलेक्टोरल कॉलेज वोटिंग है। यह 14 दिसंबर को होगा।

इलेक्टोरल कॉलेज पर हमेशा बहस होती रहती है। हाल ही में गैलप के एक सर्वे में 61% अमेरिकी नागरिकों ने इसका विरोध किया था। उनका कहना था कि राष्ट्रपति का चुनाव इलेक्टोरल कॉलेज से नहीं, बल्कि सेलुलर वोट से होना चाहिए। आइए, इलेक्टोरल कॉलेज को बहुत आसान तरीके से समझने की कोशिश करते हैं। ध्यान रहे, इलेक्टोरल कॉलेज का मतलब किसी एजुकेशनल इंस्टीट्यूट से नहीं है। इसका मतलब है जन अधिकार का समूह या निर्वाचित मंडल। वह समूह अमेरिकी राष्ट्रपति चुनता है।

इलेक्टर और इलेक्टोरल कॉलेज के मामले को समझने के लिए
इसे हालिया राष्ट्रपति चुनाव से समझने की कोशिश करते हैं। ट्रम्प रिपब्लिकन कैंडिडेट थे। बाइडेन डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार थे। वोटर ने जब बाइडेन को वोट किया तो उनके नाम के आगे ब्रेकेट में एक नाम और लिखा था। ट्रम्प के मामले में भी यही था। दरअसल, मतदाता ने लिखित नाम वाले व्यक्ति को अपना इलेक्टर चुना।

यही इलेक्टर 14 दिसंबर को राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान करेगा। और आसान तरीके से समझे तो वोटर ने ट्रम्प या बाइडेन को वोट नहीं दिया, लेकिन खुद के प्रतिनिधियों ने उसे चुना और उसे ही वोट दिया। अब यह प्रतिनिधित्व करता है यानी इलेक्टर अमेरिकी राष्ट्रपति चुनेगा।

मतदाता इलेक्टर्स चुन रहे हैं। और इलेक्टर्स के समूह को इलेक्टोरल कॉलेज ने कहा है। इलेक्टोरल कॉलेज में कुल 538 इलेक्टर्स होते हैं। राष्ट्रपति बनने के लिए 270 इलेक्टोरल वोट या इलेक्टर्स के समर्थन की जरूरत है।

यह फोटो 1824 में हुई इलेक्टोरल कॉलेज वोटिंग के नतीजों की है। तब तक परिणामजे हाथ से लिखकर जारी किए जाते थे।

यह फोटो 1824 में हुई इलेक्टोरल कॉलेज वोटिंग के नतीजों की है। तब तक परिणामजे हाथ से लिखकर जारी किए जाते थे।

भारत से समान
एक लिहाज से भारत में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जिस तरह से जाते हैं, वैसा ही अमेरिका में होता है। भारत में लोकसभा सांसद प्रधानमंत्री और राज्यों में विधायक मुख्यमंत्री चुन रहे हैं। राष्ट्रपति का चुनाव भी सांसद और विधायक करते हैं। अमेरिका में सांसद और विधायकों की जगह मतदाता इलेक्टर्स चुन रहे हैं। फिर इलेक्टर्स राष्ट्रपति चुन रहे हैं। यह अप्रत्यक्ष या इनडायरेक्ट तरीका है।

इलेक्टर्स की संख्या कैसे तय होती है?
अमेरिका के झंडे में 50 सितारे हैं। इसका मतलब यहां 50 राज्य हैं। 1959 तक 48 राज्य थे। बाद में अलास्का और हवाई जुड़े। हमारी तरह संसद के दो सदन हैं। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव (HOR) और सीनेट। HOR में 435 और Cnet में 100 इनबर होते हैं। ये जरूरी है। क्योंकि, एक राज्य में इलेक्टर्स की संख्या उतनी ही होगी, जितने उसके HOR और Cnet में सदस्य हैं।

आसान उदाहरण से समझ
HOR को आप हमारी लोकसभा और Cnet को राज्यसभा समझ सकते हैं। सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में कुल मिलाकर 535 सदस्य हैं। डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया (डीसी) के तीन सदस्य हैं। HOR के मेंबर राज्य की जनसंख्या के हिसाब से तय हैं। लेकिन, सीनेट में हर राज्य से सिर्फ 2 सदस्य हैं। यानी 50 राज्य और 100 सदस्य।

प्रयोगशाला में HOR की 53 और सीनेट की 2 सीटें हैं। यानी कुल 55 सदस्य। इतनी ही संख्या इलेक्टर्स की होगी। मतलब यह हुआ कि इलेक्टोरल कॉलेज में रॉबर्ट के 55 वोट हैं। ये हमारे उत्तर प्रदेश की तरह है, जहां से सबसे ज्यादा सांसद चुने जाते हैं।

क्या इसमें कोई और पेंच भी है?
हां। वास्तव में, राज्य छोटा हो या बड़ा। वहाँ इलेक्टर्स की संख्या 3 से कम नहीं होनी चाहिए। एल्सक्का। यहां HOR का सिर्फ एक मेंबर है। लेकिन, सीनेट में हर राज्य से 2 मेंबर्स होते हैं। लिहाजा अलास्का से तीन इलेक्टर्स चुने जाएंगे। ऐसे सात राज्य हैं, जहां इलेक्टर्स की संख्या 3 है। ये 7 राज्य 21 इलेक्टर्स चुनकर इलेक्टोरल कॉलेज में भेजते हैं।

फोटो 1946 की है। तब चुनाव हुए थे और इसके बाद इलेक्टर्स ने वोटिंग की थी।

फोटो 1946 की है। तब चुनाव हुए थे और इसके बाद इलेक्टर्स ने वोटिंग की थी।

इलेक्टर कौन और कैसे बनता है?
यह निर्णय कि पार्टी का अध्यक्ष पद का उम्मीदवार और पार्टी मिलकर तय करते हैं। इसे आप उम्मीदवार का प्रतिनिधित्व कह सकते हैं। मान लीजिए ट्रम्प रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार थे। उन्हें जर्सी के 55 इलेक्टर्स की लिस्ट बनानी है। तो पार्टी और ट्रम्प मिलकर उनका नाम तय करेंगे। बैटल पर प्रेसिडेंशियल कैंडिडेट के नाम के आगे ब्रैकेट में इस इलेक्टर का नाम होगा। वेटर जब राष्ट्रपति उम्मीदवार को चुनागा, तो इसी इलेक्टर के नाम पर मार्कर लगाएगा।

एक सुझाव जो तीन साल पहले दिया गया था
अमेरिकी संविधान के मुताबिक, इलेक्टर्स न तो सीनेटर होंगे और न रिप्रेजेंटेटिव्स। उनके पास लाभ का पद (लाभ का पद) भी नहीं होना चाहिए। 2017 में जारी अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट कहती है- इलेक्टर्स वास्तव में प्रसिद्ध हस्तियों, लोकल इलेक्टेड इनबर्स, पार्टी एक्टविस्ट्स या आम नागरिक ही होना चाहिए। अमेरिका में हर राज्य का अपना प्रस्ताव और झंडा है। पेन्सिलवेनिया का इंक साफ कहता है- प्रेसिडेंशियल नॉमिनी अपने इलेक्टर खुद को चुना।

2016 में नेवादा राज्य में इलेक्टर्स मतदान के लिए फार्म भरते हुए। इस चुनाव में बहुत अधिक वोट हासिल करने के बावजूद हिलेरी क्लिंटन वर्तमान राष्ट्रपति ट्रम्प से हार गए थे।

2016 में नेवादा राज्य में इलेक्टर्स मतदान के लिए फार्म भरते हुए। इस चुनाव में बहुत अधिक वोट हासिल करने के बावजूद हिलेरी क्लिंटन वर्तमान राष्ट्रपति ट्रम्प से हार गए थे।

आखिर इलेक्टोरल कॉलेज क्यों बनाया गया?
1787 में कम्युनिकेशन या ट्रांसपोर्टेशन के साधन बेहद कम थे। इतने बड़े देश में यह संभव नहीं था कि मतदाता देश के एक कोने में बैठकर किसी व्यक्ति के बारे में पूरी जानकारी हासिल कर पाएं। रेडियो, टीवी या इंटरनेट का दौर तो नहीं था। पेपर भी बहुत कम थे। इसलिए, यह तय किया गया कि कुछ लोकल लोगों (इलेक्टर्स) को चुना जाना चाहिए। फिर ये लोग मिलकर (इलेक्टोरल कॉलेज) राष्ट्रपति का चुनाव करें। 233 वर्ष गुजर चुके हैं। तमाम विरोध के बावजूद यह सिस्टम नहीं बदला गया। तर्क दिया जाता है- यह हमारी परंपरा है। जब के साथ बेहतर हो जाएगा।

(अगली कड़ी में जानिए क्या है विनर टेक्स ऑल का विवादित मामला। इसकी सबसे ज्यादा आलोचना होती है। लेकिन, 50 में 48 राज्य इसी सिस्टम को फॉलो करते हैं।)





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