नई दिल्‍ली: साल 2020 कई मायनों में ऐतिहासिक रहा है, इस साल में ऐसी-ऐसी घटनाएं हुईं हैं, जिनकी कल्पना शायद ही किसी ने की हो. साल के जाते-जाते एक और ऐसी ही घटना सामने आई है और यह घटना चिंताजनक इसलिए है क्‍योंकि यह दुनिया की जलवायु में हुए परिवर्तन (Climate Change) की ओर गंभीर इशारा करती है. 

ये घटना है रॉयल बंगाल टाइगर (Royal Bengal Tiger) के समुद्र तल (Sea Level) से 3 हजार मीटर से अधिक की ऊंचाई पर मिलना. बाघ के इस तरह इतनी ऊंचाई पर मिलने की घटना ने विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है क्‍योंकि यह बहुत ही असामान्‍य बात है. ये मामला नेपाल (Nepal) का है, जहां संभवत: दुनिया में पहली बार टाइगर समुद्र तल से 3,165 मीटर की ऊंचाई पर देखा गया है.

ये है चिंता की वजह 
विश्लेषकों का मानना ​​है कि इससे पता चलता है कि दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन का वन्यजीवों पर कितना गहरा प्रभाव पड़ रहा है. कई फॉरेस्‍ट एजेंसियों और विभागों ने इस घटना को न केवल असामान्य बताया है बल्कि कई ने तो दावा किया है कि यह दुनिया का ऐसा पहला मामला हो सकता है.

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2 विभागों की ओर से जारी किए गए संयुक्‍त प्रेस रिलीज के मुताबिक, ‘सभी एशियाई बड़ी बिल्लियों में सबसे बड़ा राजसी रॉयल बंगाल टाइगर (पैंथेरा टाइग्रिस) 13 नवंबर और 21 नवंबर को पूर्वी नेपाल के इलम जिले में एक जंगल में कैमरे में 3,165 मीटर की ऊंचाई पर कैद हुआ है. पूर्वी क्षेत्र के पहाड़ों में बाघ के देखे जाने का यह देश का पहला फोटोग्राफिक साक्ष्य है.’ इसमें आगे कहा गया, ‘यह दृश्य पूर्वी नेपाल में कंचनजंगा लैंडस्केप के महत्व को प्रदर्शित करता है. इस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि ये जंगल उत्तर सिक्किम में भारत के सिंगालिया नेशनल पार्क और उत्तर बंगाल में डुआर्स से जुड़े हैं.’ 

इसलिए चिंतित हैं विशेषज्ञ 
2018 में भूटान ने 4,038 मीटर की ऊंचाई पर एक बाघ को कैमरे में कैद किया था. वहीं भारत के अरुणाचल प्रदेश में एक बड़ी बिल्ली को 3,630 मीटर की ऊंचाई पर दिबांग घाटी में देखा गया था.

यह ग्लोबल वार्मिंग के कारण होने वाले विनाश की स्थिति का संकेत हो सकता है, जो बताता है बड़ी बिल्लियों का आवास नष्‍ट हो रहा है. ज‍बकि इनमें से कई तो लुप्तप्राय प्रजातियां हैं. वर्ल्‍ड टाइगर स्‍टेटिस्‍टिक्‍स के अनुसार 2016 में भारत में सबसे ज्‍यादा 2,226  बड़ी बिल्लियां हैं. 

संरक्षण में आड़े आ रहीं ये चुनौतियां

2020 में 29 जुलाई को विश्व बाघ दिवस के मौक पर नेपाली प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने ग्लोबल वार्मिंग का उल्लेख करते हुए कहा था कि यह बाघों के संरक्षण के रास्ते में आड़े आ रहा है.

उन्‍होंने कहा था, ‘ जिन देशों में बाघ हैं उनके द्वारा किए जा रहे तमात प्रयासों के बावजूद, वनस्पति की कमी, इंसान और वन्यजीवों के बीच संघर्ष, अवैध शिकार, पशु अंगों का अवैध व्यापार, जलवायु परिवर्तन के खतरे और विभिन्न बीमारियों ने बाघ संरक्षण के क्षेत्र की चुनौतियों को बढ़ा दिया है.’ 2018 के आंकड़ों के अनुसार नेपाल में 235 बाघ हैं. 

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