न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 12 Dec 2020 08:16 AM IST

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देश में तीन कृषि कानूनों को लेकर किसान आंदोलन पर बैठे हैं। किसानों को आंदोलन पर बैठे हुए 16 दिन हो चुके हैं लेकिन अभी तक का कोई रास्ता नहीं निकल सका है। आज यानी 12 दिसंबर से किसान आंदोलन और व्यापक होने वाला है। किसान आज दिल्ली-जयपुर हाईवे और दिल्ली-आगरा हाईवे को जाम कर सकते हैं।

किसान अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं लेकिन सरकार ने भी किसानों को सख्त संदेश दे दिया है। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सरकार ने जो प्रस्ताव किसानों को दिया है, उसमें सरकार तभी सुधार करेगी जब किसान अपना आंदोलन वापस लेंगे। उन्होंने कहा कि अगर किसान नहीं मानते तो सरकार के तीनों कानून इसी तरह लागू रहते।

हालांकि इसी बीच किसान आंदोलन को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का कहना है कि किसान आंदोलन में दिल्ली दंगे के आरोपियों और नक्सल समर्थकों के सहयोग क्यों दिखे। उन्होंने कहा कि ये डाक किसानों के मुद्दों से कितना जुड़ा हो सकता है।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक टिकारी बॉर्डर पर किसानों के एक संगठन के मंच पर दिल्ली दंगों और भीमा कोरेगांव हिंसा के आरोपियों की रिहाई की मांग के बैनर लगे थे। उनके लिए एक मंच भी तैयार किया गया था। इस डाक में लिखा गया था कि झूठे केसों में गिरफ्तार किए गए बुद्धिजीवियों और छात्र कार्यकर्ता को रिहा करो।

किसानों के मंच पर शरजील इमाम और उमर खालिद के भी डाक दिखाई दी। शरजील इमाम पर राष्ट्रद्रोह का मामला दर्ज है और पूर्व जेएनयू छात्र नेता उमर खालिद पर भी दिल्ली दंगों की साजिशा का आरोप है। इस पर भी राष्ट्रद्रोह का मामला चल रहा है।

अब ऐसे में सवाल किया जा रहा है कि किसान आंदोलन के बीच इन लोगों की रिहाई की मांग क्यों की जा रही है। हालांकि इस पर भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि किसान आंदोलन से इस तरह के आयोजन का सीधा संबंध नहीं है लेकिन ऐसे मामलों में किसानों को आंखें नहीं मूदनी चाहिए।

वहीं सूत्रों की माने तो ऐसा कहा जा रहा है कि किसान आंदोलन को लेफ्ट के अतिवादी नेताओं और वामपंथी, चरमपंथी तत्वों ने हाईजैक कर लिया है।

देश में तीन कृषि कानूनों को लेकर किसान आंदोलन पर बैठे हैं। किसानों को आंदोलन पर बैठे हुए 16 दिन हो चुके हैं लेकिन अभी तक का कोई रास्ता नहीं निकल सका है। आज यानी 12 दिसंबर से किसान आंदोलन और व्यापक होने वाला है। किसान आज दिल्ली-जयपुर हाईवे और दिल्ली-आगरा हाईवे को जाम कर सकते हैं।

किसान अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं लेकिन सरकार ने भी किसानों को सख्त संदेश दे दिया है। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सरकार ने जो प्रस्ताव किसानों को दिया है, उसमें सरकार तभी सुधार करेगी जब किसान अपना आंदोलन वापस लेंगे। उन्होंने कहा कि अगर किसान नहीं मानते तो सरकार के तीनों कानून इसी तरह लागू रहते।

हालांकि इसी बीच किसान आंदोलन को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का कहना है कि किसान आंदोलन में दिल्ली दंगे के आरोपियों और नक्सल समर्थकों के सहयोग क्यों दिखे। उन्होंने कहा कि ये डाक किसानों के मुद्दों से कितना जुड़ा हो सकता है।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक टिकारी बॉर्डर पर किसानों के एक संगठन के मंच पर दिल्ली दंगों और भीमा कोरेगांव हिंसा के आरोपियों की रिहाई की मांग के बैनर लगे थे। उनके लिए एक मंच भी तैयार किया गया था। इस डाक में लिखा गया था कि झूठे केसों में गिरफ्तार किए गए बुद्धिजीवियों और छात्र कार्यकर्ता को रिहा करो।

किसानों के मंच पर शरजील इमाम और उमर खालिद के भी डाक दिखाई दी। शरजील इमाम पर राष्ट्रद्रोह का मामला दर्ज है और पूर्व जेएनयू छात्र नेता उमर खालिद पर भी दिल्ली दंगों की साजिशा का आरोप है। इस पर भी राष्ट्रद्रोह का मामला चल रहा है।

अब ऐसे में सवाल किया जा रहा है कि किसान आंदोलन के बीच इन लोगों की रिहाई की मांग क्यों की जा रही है। हालांकि इस पर भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि किसान आंदोलन से इस तरह के आयोजन का सीधा संबंध नहीं है लेकिन ऐसे मामलों में किसानों को आंखें नहीं मूदनी चाहिए।

वहीं सूत्रों की माने तो ऐसा कहा जा रहा है कि किसान आंदोलन को लेफ्ट के अतिवादी नेताओं और वामपंथी, चरमपंथी तत्वों ने हाईजैक कर लिया है।





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