अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Updated Sat, 12 Dec 2020 03:07 AM IST

सर्वोच्च न्यायालय
– फोटो: पीटीआई

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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह संसद को हरमत्वत लेने वाले के लिए आजीवन कारावास का प्रावधान करने से संबंधित कानून पारित करने का निर्देश नहीं दे सकता है। शीर्षदालत ने बेनामी सम्पतियों और आय से अधिक संपत्ति को उजागर करने और अपराधियों को आजीवन कारावास की सजा देने के निर्देश देने की मांग वाली जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है।

तीन सदस्यीय पीठ की शीर्ष कर रही जस्टिस संजय किशन कौल ने कहा, व्यक्तिगत रूप से मुझे लगता है, हमें समाज में अपनी सोच बदलनी चाहिए। पैसे लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए धन संबंधी करने वाला व्यक्ति है।

शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता भाजपा नेता व वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय से अपनी जनहित याचिका वापस लेने और अपने विचार को विधि आयोग के पास रखने के लिए कहा है। याचिकाकर्ता का कहना था कि भ्रष्ट व अपराधी की 100 प्रतिशत संपत्ति बच कर करनी चाहिए और ऐसे लीगों के लिए आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान होना चाहिए।

तीन सदस्यीय पीठ ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता उपाध्याय से कहा कि वह एक काल्पनिक स्थिति के लिए प्रयास कर रहे हैं। पीठ ने यह कहते हुए याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण को याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह संसद को इस संबंध में एक कानून पारित करने का निर्देश नहीं दे सकती।

उपाध्याय ने अपनी याचिका में कहा था कि भारत में भ्रष्टाचार विरोधी कानून कमजोर और अप्रभावी है।

केंद्र सरकार ने भ्रष्टाचार के खतरे को कम करने के लिए कानूनों को मजबूत नहीं किया है। ऐसा न करना कानून के शासन के साथ-साथ संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत मिले जीवन स्वतंत्रता के अधिकार के विपरीत है।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह संसद को हरमत्वत लेने वाले के लिए आजीवन कारावास का प्रावधान करने से संबंधित कानून पारित करने का निर्देश नहीं दे सकता है। शीर्षदालत ने बेनामी सम्पतियों और आय से अधिक संपत्ति को उजागर करने और अपराधियों को आजीवन कारावास की सजा देने के निर्देश देने की मांग वाली जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है।

तीन सदस्यीय पीठ की शीर्ष कर रही जस्टिस संजय किशन कौल ने कहा, व्यक्तिगत रूप से मुझे लगता है, हमें समाज में अपनी सोच बदलनी चाहिए। पैसे लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए धन संबंधी करने वाला व्यक्ति है।

शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता भाजपा नेता व वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय से अपनी जनहित याचिका वापस लेने और अपने विचार को विधि आयोग के पास रखने के लिए कहा है। याचिकाकर्ता का कहना था कि भ्रष्ट व अपराधी की 100 प्रतिशत संपत्ति बच कर करनी चाहिए और ऐसे लीगों के लिए आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान होना चाहिए।

तीन सदस्यीय पीठ ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता उपाध्याय से कहा कि वह एक काल्पनिक स्थिति के लिए प्रयास कर रहे हैं। पीठ ने यह कहते हुए याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण को याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह संसद को इस संबंध में एक कानून पारित करने का निर्देश नहीं दे सकती।

उपाध्याय ने अपनी याचिका में कहा था कि भारत में भ्रष्टाचार विरोधी कानून कमजोर और अप्रभावी है।

केंद्र सरकार ने भ्रष्टाचार के खतरे को कम करने के लिए कानूनों को मजबूत नहीं किया है। ऐसा न करना कानून के शासन के साथ-साथ संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत मिले जीवन स्वतंत्रता के अधिकार के विपरीत है।





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