डेविड वॉर्नर के करियर ने कैसे मारी पलटी?

डेविड वॉर्नर (डेविड वार्नर) मौजूदा दौर के सबसे अनुभवी ओपनर माने जाते हैं। ये कंगारू आगंतुक अब 43 इंटरनेशनल शतक ठोक चुके हैं

नई दिल्ली। डेविड वॉनर … जिसे पॉकेट डाइनामाइट कहा जाता है। बेखौफ, निडर … ठीक उसी तरह जैसे वीरेंद्र सहवाग थे। बाएं हाथ का ये ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज (डेविड वार्नर) दुनिया के किसी भी गेंदबाजी अटैक की धज्जियां उड़ाने का माद्दा रखता है। आज विश्व क्रिकेट में वासे से ओपनर नहीं नहीं। डेविड वॉर्नर ने अपने आंतरिक करियर में 43 शतक ठोक दिए हैं। उनके नाम टेस्ट में 24 शकर्स की मदद से 7244, वनडे में 18 शकर्स की मदद से 5267 और टी 20 में 1 शतक और 17 अर्धशतकों की मदद से 2207 रन हैं। मतलब फॉर्मेट कोई भी हो, डेविड वॉर्नर का बल्ला रनों की बारिश करना नहीं छोड़ता। अब सवाल ये है कि डेविड वॉर्नर क्या शुरुआत से ऐसी ही बल्लेबाजी करते थे? इसका जवाब हां भी है और नां भी। दरअसल वावर आज जो कुछ भी उसकी वजह उनकी जिंदगी में घटित हुई 2 घटनाएं हैं। मतलब वैवर की जिंदगी के वो टर्निंग प्वाइंट, जिसने इस कांशस टर्न को दिया।

डेविड वेवर ने मानी माँ की बात कही

डेविड वॉर्नर (डेविड वार्नर) का जन्म 27 अक्टूबर, 1986 को न्यू साउथ वेल्स के पैडिंगटन में हुआ था। वावर बचपन से ही बेमिसाल क्रिकेटर थे। गजब की बात ये थी कि वावर दाएं हाथ से भी बल्लेबाजी कर सकते थे और बाएं हाथ से भी। वावर की जिंदगी में उस वक्त दुविधा पैदा हुई जब वो 13 साल के थे। दरअसल कोच ने वॉर्नर को दाएं हाथ से बल्लेबाजी करने के लिए कहा, क्योंकि वो हर गेंद को हवा में खेलते थे। वेसन ने सीजन दाएं हाथ से खेला और वे कुछ खास नहीं रहे। इसके बाद उनकी मां शीला वैरेन ने अपने बेटे को एक बार फिर से बाएं हाथ से ही बल्लेबाजी करने की सलाह दी। माँ की बात वैपन ने मानी और उन्होंने सिडनी में तहलका मचा दिया। सिडनी कोस्टल क्लब के लिए वावर ने रिकॉर्ड तोड़ पारियां खेली और 15 साल की उम्र में उन्होंने ईस्टर्न सबर्ब्स के लिए फर्स्ट ग्रेड डेब्यू किया। बाद में उनका चयन ऑस्ट्रेलिया की अंडर 19 टीम में भी हुआ।

डेविड वॉर्नर के करियर का सबसे बड़ा बदलावडेविड वॉर्नर (डेविड वार्नर) ने 5 जनवरी 2007 को न्यू साउथ वेल्स के लिए टी 20 मैच में डेब्यू किया। आपको यकीन नहीं है कि वॉर्नर नंबर 6 पर बल्लेबाजी करने उतरे और उन्होंने 11 गेंदों में 20 रनों की पारी खेली। आपको बता दें डेविड वॉर्नर ने बतौर लेग स्पिनर डेब्यू किया था जो कि आखिर में बड़े-बड़े शूट में भी लिया गया था। मतलब वैवर को एक पार्ट टाइम बल्लेबाज समझा जाता था। हालांकि साल 2008 में उनके साथ कुछ ऐसा हुआ, जिसे वह कभी नहीं भूल पाएंगे। वर्ष 2008 में वे न्यू साउथ वेल्स के लिए मैच खेल रहे थे। पहली पारी खत्म हुई और वह ड्रेसिंग रूम में गेंदबाजी करने के बाद बैठ गए। अब चूंकि वॉर्नर मिडिल नंबर प्लंबर थे तो वो आराम से बैठे थे, लेकिन तभी अचानक उन्हें साउथ साउथ वेल्स के कप्तान डोमिनिक थोर्नली ने ओपनिंग के लिए कहा। व्हेनर को समझ नहीं आया कि ये क्या हुआ लेकिन वो ओपनिंग करने चले गए।

वीनर का तूफान

तस्मानिया के खिलाफ सिडनी के मैदान पर वॉर्नर (डेविड वार्नर) ने सभी गेंदबाजों की तरह धज्जी उड़ा दी। वावर ने अपने लिस्ट ए करियर का पहला शतक ठोक दिया। वॉर्नर ने 112 गेंदों में 165 रनों की धुआंधार पारी खेली। इसके अगले ही मैच में वॉर्नर ने तस्मानिया के खिलाफ महज 54 गेंदों में 97 रन ठोक दिए। वेवर की इन दो पारियों ने उन्हें पूरे ऑस्ट्रेलिया में प्रसिद्ध कर दिया। ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम के चयनकर्ताओं ने बहुत देर नहीं की और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी 20 सीरीज के लिए वावर का चयन कर लिया। वॉर्नर ने अपना आंतरिक डेब्यू मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर किया जहां उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ महज 43 गेंदों में 89 रनों की पारी खेल खेली। दक्षिण अफ्रीका के पास एंटिनी, सोतसोबे और डेलिनो जैसे बड़े गेंदबाज थे, लेकिन वावर के आगे किसी की नहीं चली। वावर की आक्रामकता ने उन्हें एक नई पहचान दी और बाएं हाथ का ये बल्लेबाज आज भी विश्व क्रिकेट पर राज कर रहा है।

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प्रथम प्रकाशित: 10 मई, 2020, 4:59 PM IST


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