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विश्वव्यापी कोरोना महामारी का सबसे प्रकोप झेल रहा महाराष्ट्र में अब हालात खतरनाक होते जा रहे हैं। सूबे के 36 जिलों में से 34 जिले कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए हैं। वहीं, राजधानी मुंबई में कोरोना संक्रमण विकराल रूप धारण करता रहा है।

इसके चलते अब रेसकोर्स और एमएमआरडीए जैसे मैदानों में भी तंबू तानकर कोरोनाटे मरीजों के लिए बिस्तर लगाए गए हैं। दूसरी ओर निजी डॉक्टरों को भी फरमान जारी कर दिया गया है कि वे भी सरकारी अस्पतालों में सेवाएं दें अन्यथा उनके लाइसेंस खत्म कर दिए जाएंगे।

राज्य चिकित्सा-शिक्षा अनुसंधान बोर्ड के निदेशक डॉ। तात्याराव लहाने ने आदेश जारी करते हुए कहा कि मुंबई के सरकारी अस्पतालों में भर्ती को विभाजित -19 रोगियों के उपचार में निजी डॉक्टरों को महीने में कम से कम 15 दिन तक सेवाएं देनी होंगी।

उन्होंने कहा कि यदि 55 साल के कम उम्र के निजी डॉक्टरों ने सरकारी अस्पतालों में सेवा के लिए किए गए आंकड़ों का जवाब नहीं दिया तो उनके खिलाफ संक्रामक रोग निवारण अधिनियम 1897 के तहत कार्रवाई की जाएगी। यहां तक ​​कि उनका लाइसेंस भी रद्द कर दिया जाएगा। मुंबई में लगभग 30 हजार एलोपैथी डॉक्टर हैं जिनमें से 13000 भारतीय चिकित्सा संघ (एमआईए) के सदस्य हैं। जिन्हें अनिवार्य रूप से कोरोना संभावितों के उपचार के लिए आना होगा।

मुंबई में हर दिन बढ़ने वाले तीन दर्जन रोगी हैं

बीते महीने मुंबई दौरे पर आई केंद्रीय टीम ने मई महीने में रिकॉर्ड संख्या में लोगों के कोरोनात्मक होने की आशंका जताई थी। हालांकि राज्य सरकार ने एक लाख मरीज होने की संभावना व्यक्त की है। समझा जा रहा है कि लॉकडाउन -3 शुरू होने के साथ ही मुंबई में ऐसी परिस्थिति नजर आने लगी है। प्रतिदिन औसतन मुंबई में तीन दर्जन कोरोना पॉजिटिव रोगी सामने आ रहे हैं।

ठाकरे ने रेलवे व सेना से मदद मांगी

माना जा रहा है कि मुंबई में कोरोना संक्रमण की स्थिति और भयानक हो सकती है। इसके मद्देनजर महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे पोर्ट ट्रस्ट, रेलवे और भारतीय सेना और नौसेना को केंद्र सरकार के अन्य अस्पतालों से आईसीयू में बिस्तर उपलब्ध कराने की मांग की है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने खुद पहल कर केंद्रीय वरिष्ठ अधिकारियों से बात की है। सरकार का मानना ​​है कि मई महीने में कोरोनाटे रोगियों की संख्या अधिक होगी।

सार

  • रेसकोर्स, नेहरू सेंटर और एमएमआरडीए मैदान में भी मरीजों के लिए लगे टेंट
  • निजी डॉक्टरों को फरमान जारी, सरकारी अस्पतालों में सेवाएं दें

विस्तार

विश्वव्यापी कोरोना महामारी का सबसे प्रकोप झेल रहा महाराष्ट्र में अब हालात खतरनाक होते जा रहे हैं। सूबे के 36 जिलों में से 34 जिले कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए हैं। वहीं, राजधानी मुंबई में कोरोना संक्रमण विकराल रूप धारण करता रहा है।

इसके चलते अब रेसकोर्स और एमएमआरडीए जैसे मैदानों में भी तंबू तानकर कोरोनाटे मरीजों के लिए बिस्तर लगाए गए हैं। दूसरी ओर निजी डॉक्टरों को भी फरमान जारी कर दिया गया है कि वे भी सरकारी अस्पतालों में सेवाएं दें अन्यथा उनके लाइसेंस खत्म कर दिए जाएंगे।

राज्य चिकित्सा-शिक्षा अनुसंधान बोर्ड के निदेशक डॉ। तात्याराव लहाने ने आदेश जारी करते हुए कहा कि मुंबई के सरकारी अस्पतालों में भर्ती को विभाजित -19 रोगियों के उपचार में निजी डॉक्टरों को महीने में कम से कम 15 दिन तक सेवाएं देनी होंगी।

उन्होंने कहा कि यदि 55 साल के कम उम्र के निजी डॉक्टरों ने सरकारी अस्पतालों में सेवा के लिए किए गए आंकड़ों का जवाब नहीं दिया तो उनके खिलाफ संक्रामक रोग निवारण अधिनियम 1897 के तहत कार्रवाई की जाएगी। यहां तक ​​कि उनका लाइसेंस भी रद्द कर दिया जाएगा। मुंबई में लगभग 30 हजार एलोपैथी डॉक्टर हैं जिनमें से 13000 भारतीय चिकित्सा संघ (एमआईए) के सदस्य हैं। जिन्हें अनिवार्य रूप से कोरोना संभावितों के उपचार के लिए आना होगा।

मुंबई में हर दिन बढ़ने वाले तीन दर्जन रोगी हैं

बीते महीने मुंबई दौरे पर आई केंद्रीय टीम ने मई महीने में रिकॉर्ड संख्या में लोगों के कोरोनात्मक होने की आशंका जताई थी। हालांकि राज्य सरकार ने एक लाख मरीज होने की संभावना व्यक्त की है। समझा जा रहा है कि लॉकडाउन -3 शुरू होने के साथ ही मुंबई में ऐसी परिस्थिति नजर आने लगी है। प्रतिदिन औसतन मुंबई में तीन दर्जन कोरोना पॉजिटिव रोगी सामने आ रहे हैं।

ठाकरे ने रेलवे व सेना से मदद मांगी

माना जा रहा है कि मुंबई में कोरोना संक्रमण की स्थिति और भयानक हो सकती है। इसके मद्देनजर महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे पोर्ट ट्रस्ट, रेलवे और भारतीय सेना और नौसेना को केंद्र सरकार के अन्य अस्पतालों से आईसीयू में बिस्तर उपलब्ध कराने की मांग की है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने खुद पहल कर केंद्रीय वरिष्ठ अधिकारियों से बात की है। सरकार का मानना ​​है कि मई महीने में कोरोनाटे रोगियों की संख्या अधिक होगी।





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