इंदौर में गोकुलदास अस्पताल द्वारा मृतक आरोपित फाउल प्ले के रिश्तेदार, छह घंटे में चार रोगी की मौत – इंदौर: अस्पताल की लापरवाही से छह घंटे में चार मरीजों की मौत, प्रशासन ने लगाई कार्रवाई पर रोक


सैनिटरीकरण करते कर्मचारी (फाइल फोटो)
– फोटो: पीटीआई

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मध्यप्रदेश का इंदौर शहर कोरोनावायरस से बुरी तरह प्रभावित है। यहां 1700 से ज्यादा लोग कोरोना से सतर्क हैं और इस खतरनाक वायरस के चलते यहां 86 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, शहर के एक अस्पताल पर मरीजों के इलाज में लापरवाही बरतने का मामला सामने आया है।

दरअसल, यहां के एक अस्पताल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था। इसमें मरीजों के परिजनों ने आरोप लगाया था कि अस्पताल की लापरवाही के कारण पिछले छह घंटे में चार मरीजों की मौत हुई है।

वहीं, इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त रूख अपनाते हुए इस चिकित्सा संस्थान पर शुक्रवार से अस्थायी रोक लगा दी। मृतकों में कोरोनावायरस का एक गंभीर रोगी भी शामिल है।

अस्पताल को सैनिटरीकरण करने के नाम पर इलाज में बरती गई लापरवाही
वायरल वीडियो में शहर के गोकुलदास अस्पताल में मरीजों के परिजन अपना दर्द बयां कर रहे हैं। परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन इस चिकित्सा संस्थान को सैनिटरीज़ (ट्रांसफ़ॉर्म) करने के लिए खाली करना चाहता है। इसलिए मरीजों के इलाज में ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिसके कारण मरीजों की सिलसिलेवार मौत हो रही है।

जब वीडियो वायरल होना शुरू हुआ तो प्रशासन की नींद खुली। प्रशासन ने आनन-फानन में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को जांच के लिए गोकुलदास अस्पताल भेजा। यह अस्पताल येलो श्रेणी वाला है, जहां कोरोना के हानिकारक रोगियों का इलाज चल रहा था।

अस्पताल की जांच के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) प्रवीण जड़िया ने बताया कि हमने अस्पताल से दस्तावेज डाउनलोड करने की मंजूरी दी है। साथ ही इसके संचालन पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।

उन्होंने बताया कि शुरुआती जांच के दौरान हमें पता चला है कि अस्पताल में गुरुवार को छह घंटे के भीतर चार मरीजों की मौत हुई थी। मृतकों में शामिल तीन लोगों की जांच में को विभाजित -19 से निकाय नहीं पाए गए थे, जबकि एक अन्य मरीज की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा था।)

सीएमएचओ ने बताया कि गोकुलदास अस्पताल में भर्ती 14 मरीजों को अन्य अस्पतालों में भेजा जा रहा है। मरीजों के तीमारदारों के आरोपों पर गोकुलदास अस्पताल के प्रबंधन की प्रतिक्रिया कई प्रयासों के बावजूद नहीं मिल सकी।

हालांकि, यह कोई पहला मामला नहीं है, जब कोराना वायरस परिस्थिति में सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदेश के निजी अस्पतालों की पोल खुली हो। पिछले दिनों सोशल मीडिया पर सामने आए अलग-अलग वीडियो में इन अस्पतालों में विभिन्न बीमारियों के रोगियों को बिना इलाज लौटाए जाने, मोटी फीस वसूलने और कोविड -19 की जांच रिपोर्ट में गहन नहीं पाए जाने के बाद भी रोगियों को कब तक छुट्टी नहीं दी गई जाने के आरोप लगाए गए हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता और जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ अमूल्य निधि ने कहा कि तमाम शिकायतों के बावजूद प्रदेश सरकार द्वारा निजी अस्पतालों पर अब तक लगाम नहीं कसी जा सकी है। हमारी मांग है कि कोरोनावायरस के प्रकोप के मद्देनजर सूबे के सभी निजी अस्पतालों का प्रबंधन पूरी तरह से सरकारी हाथों में जाने का फैसला तुरंत किया जाना चाहिए।

इंदौर देश में कोरोनावायरस के प्रकोप से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक जिले में कोविद -19 के मरीजों की तादाद 1,727 पर पहुंच गई है। इनमें से 86 लोगों की इलाज के दौरान मौत हो गई है।

मध्यप्रदेश का इंदौर शहर कोरोनावायरस से बुरी तरह प्रभावित है। यहां 1700 से ज्यादा लोग कोरोना से सतर्क हैं और इस खतरनाक वायरस के चलते यहां 86 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, शहर के एक अस्पताल पर मरीजों के इलाज में लापरवाही बरतने का मामला सामने आया है।

दरअसल, यहां के एक अस्पताल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था। इसमें मरीजों के परिजनों ने आरोप लगाया था कि अस्पताल की लापरवाही के कारण पिछले छह घंटे में चार मरीजों की मौत हुई है।

वहीं, इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त रूख अपनाते हुए इस चिकित्सा संस्थान पर शुक्रवार से अस्थायी रोक लगा दी। मृतकों में कोरोनावायरस का एक गंभीर रोगी भी शामिल है।

अस्पताल को सैनिटरीकरण करने के नाम पर इलाज में बरती गई लापरवाही
वायरल वीडियो में शहर के गोकुलदास अस्पताल में मरीजों के परिजन अपना दर्द बयां कर रहे हैं। परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन इस चिकित्सा संस्थान को सैनिटरीज़ (ट्रांसफ़ॉर्म) करने के लिए खाली करना चाहता है। इसलिए मरीजों के इलाज में ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिसके कारण मरीजों की सिलसिलेवार मौत हो रही है।

जब वीडियो वायरल होना शुरू हुआ तो प्रशासन की नींद खुली। प्रशासन ने आनन-फानन में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को जांच के लिए गोकुलदास अस्पताल भेजा। यह अस्पताल येलो श्रेणी वाला है, जहां कोरोना के हानिकारक रोगियों का इलाज चल रहा था।


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