नई दिल्ली: दुनिया भर में कोरोना (कोरोनावायरस) से अब तक ढाई लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इस वायरस के संक्रमण से मरने वालों का आंकड़ा हर दिन जारी किया जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि कोरोना से मौत होने पर शव का अंतिम संस्कार कैसे किया जाता है?

अलग-अलग देशों में इसके लिए अलग नियम हैं। ज्यादातर देशों में कोरोना से मरने वाले व्यक्ति के परिजनों को शव को छूने की इजाजत नहीं होती।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, कोरोना से मौत होने पर शव को जलाया भी जा सकता है और दफनाया भी जा सकता है। परिजन शव को केवल दूर से ही देख सकते हैं। शव का अंतिम संस्कार विशेष टीम के द्वारा किया जाता है, जिसे इसके लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। शव का अंतिम संस्कार करने वाले मेडिकल स्टाफ पीपीई किट पहन कर शव का अंतिम संस्कार करते हैं। पूरी प्रक्रिया के बाद पीपीई किट को फेंक कर हाथ धोने होते हैं।

मुसलमानों और ईसाइयों में शव को जलाने की बजाय दफनाने का रिवाज होता है। लेकिन कई देशों ने इस महामारी के चलते रिवाजों को न देखता हुआ शव को जलाने के आदेश दिए हैं। इसके पीछे 2 बड़े कारण हैं। एक तो ये कि बड़ी संख्या में मौत से कई देशों में शवों को दफनाने के लिए जगह कम पड़ रही है और दफनाने के मुकाबले शव को जलाने से वायरस के नष्ट होने की संभावना होती है।

चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने कोरोना से मरने वाले लोगों के अंतिम संस्कार को लेकर स्थानीय प्रसाशन को शव को जलाने के निर्देश दिए हैं। फिर चाहे वह व्यक्ति किसी भी धर्म का हो। आम तौर पर जहां मौत के बाद शव को नवला कर, कपड़े बदल कर, पूरे रीति रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया जाता है, कोरोना से होने वाली मौत में इसकी इजाजत नहीं होती है।

श्रीलंका में भी चीन की ही तरह शव को जलाने के आदेश हैं। यहां तक ​​कि मृतक की रिपोर्ट अगर नेगेटिव भी आई हो और उसमें कोरोना के महज लक्षण भी हों तो भी एहतियातन उसे जलाया ही जाता है।

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अमेरिका के केंद्र फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन द्वारा दी गई गाइडलाइन के मुताबिक, लोग अपने धर्म और रिवाज के हिसाब से अंतिम संस्कार कर सकते हैं लेकिन इसमें 10 से ज्यादा लोगों को शामिल नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही ये सलाह भी दी गई है की परिजन शव को छूने, चूमने या नहलाने से बच रहे हैं।

ब्रिटेन के नेशनल एसोसिएशन ऑफ़ फ्यूनरल डायरेक्टर्स की गाइडलाइंस के मुताबिक मृतक के परिजनों को अंतिम संस्कार करने की अनुमति है, लेकिन उन्हें ये अनुरोध किया गया है कि अंतिम संस्कार में बिल्कुल देरी नहीं की जानी चाहिए। साथ ही ये भी कहा गया है कि परिवार के सिर्फ कुछ नजदीकी संबंधी ही इसमें शामिल हैं।

इटली में भी कोरोना से होने वाली मौत के अंतिम संस्कार के लिए सख्त नियम हैं। कोरोना से मरने वाले लोगों का शव अस्पताल से कॉफिन में ही बाहर लाया जाता है। इसके साथ 2 से 4 रिश्तेदार जा तो सकते हैं लेकिन उन्हें शव को देखने तक कि अनुमति नहीं होती है। शव को अस्पताल के गाउन में ही दफनाया जाता है लेकिन परिवार द्वारा दिए गए कपड़े को कॉफिन के ऊपर रख कर दफनाने की अनुमति होती है।

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इजराइल में मृतक के परिजनों को चेहरा देखने की अनुमति होती है लेकिन उन्हें पीपीई किट पहनना जरूरी है। साथ ही शव को नवला कर कपड़े पहनाने का रिवाज भी कायम है लेकिन ये रिवाज घर वाले नहीं, बल्कि ट्रेंड वालेंटियर करते हैं।

भारत की बात करें तो यहां कोरोना से मरने वाले लोगों को रिवाज के हिसाब से जलाने या दफनाने की अनुमति है लेकिन अंतिम संस्कार के लिए शव को नवलाने या छूने पर प्रतिबंध है। भारत सरकार की गाइडलाइंस के मुताबिक, कोरोनाबर्ट शव को ट्रेंड हेल्थकेयर वर्कर ही ले जा सकते हैं। स्वास्थ्य कैर वर्कर और मृतक के परिजनों के लिए पीपीई किट पहनना अनिवार्य है।





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