• संक्रमण का खतरा देखने वाले छात्रों को विश्वविद्यालय ने निकाला, मकान मालिक भी नहीं दे रहा था
  • जगह-जगह प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांग है कि लॉकडाउन खत्म होने तक उन्हें किराए से छूट मिले

दैनिक भास्कर

05 मई, 2020, 06:04 AM IST

लंदन। लंदन के टर्नपाइक लेन स्टेशन के बाहर लिखा है- अब सेरे की हड़ताल। लंदन की ज्यादातर सड़कों के किनारे ऐसे ही संदेश लिखे हैं। यह उन छात्रों की हड़ताल है, जिनके लिए जीवन यापन का संघर्ष बना हुआ है और वे किराये की स्थिति में नहीं हैं। छात्रों के विरोध में अब सामान्य किराएदार भी शामिल हो गए हैं।

किराये न होने पाने से जूझ रहे कुछ छात्र अपने दूसरे सहयोगियों के साथ शिफ्ट हो गए हैं, जहां मकान मालिक अब दोगुना किराया मांग रहे हैं।) इसके चलते लंदन में रेंट स्ट्राइक या धार की हड़ताल शुरू हो गई है, जिसमें हजारों लोग शामिल हो चुके हैं। जगह-जगह प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांग है कि लॉकडाउन खत्म होने तक उन्हें किराए से छूट मिले।

छात्रों ने कहा- हमने मकान मालिकों से बातचीत शुरू की है

छात्रों के मुताबिक, हमारे लिए यह समय जीवन बचाने का है। में अपने मकान मालिकों के साथ किराया कम करने या बिल्कुल न लेने के लिए बातचीत भी शुरू की है। 24 साल के एक कनाडाई छात्र ने कहा, उन हम उन छात्रों के लिए लड़ रहे हैं, जो विश्वविद्यालय से निकाले गए हैं और बाहर किराए पर रह रहे हैं। उनके लिए भी लड़ रहे हैं, जिनके परिवार चले गए हैं और उनके लिए भी जिनके परिवार को बचाने के लिए सेल्फ आइसोलेट होना है। ”

निजी मकान मालिकों ने किराया देने से इनकार कर दिया
हालांकि, ज्यादातर विश्वविद्यालय में अंतिम वर्ष के छात्रों का किराया माफ कर दिया गया है, लेकिन निजी मकान मालिकों ने किराया माफ करने से इनकार कर दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, सिर्फ 19 प्रतिशत छात्र ही यूनिवर्सिटी कैंपस में इस वक्त तक रह रहे हैं। वहीं, हाउसिंग एसोसिएशन सेंचुरी के प्रवक्ता का कहना है कि हमें पता है कि छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी है, लेकिन हम सिर्फ छात्रों को छूट नहीं दे सकते।

बाहरी छात्रों पर ज्यादा असर

सबसे ज्यादा दिक्कत उन छात्रों को होती है, जो स्टूडेंट लोन के लिए हैं। मेंटेनेंस लोन लेने वाले भी पीड़ित हैं, क्योंकि इसमें किराया किराये में नहीं होता है। विदेशी छात्र, जो पार्ट टाइम काम कर खर्चे पूरे करते थे, उनके लिए मकान किराये वाले पाना मुश्किल हो रहा है, क्योंकि उनका आय बंद हो गया है। कनाडा से आई छात्रा टामा नाईट कहती हैं, हमें एकरूपता, मकान मालिकों और सरकार ने अकेले छोड़ दिया है, ऐसे में हम कैसे इन योजनाओं से निपटेंगे।





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