• अमेरिका में कोरोनासिस के बीच 79% नॉन मेडिकल स्टाफ डॉक्टरों और नर्सों की मदद में डाल दिया
  • इमरजेंसी रूम में काम करने वाली नर्सों को एन -95 फेस दिए, लेकिन नॉन मेडिकल स्टाफ की जान खतरे में

निकोल बेग

05 मई, 2020, 06:04 AM IST

न्यूयॉर्क। अमेरिका कोरोना महामारी की चपेट में है और न्यूयॉर्क इसका बड़ा केंद्र है। यहां के अस्पतालों में डॉ, नर्सरी और स्वास्थ्यकर्मी की कमी हो गई है। स्थिति ये हैं कि शहर के ज्यादातर अस्पतालों में अब मरीजों के इलाज में नॉन-मेडिकल स्टाफ की हेल्प पड़ रही है।

इनमें कुक, रिसेप्शनिस्ट, सफाईकर्मी और सिक्योरिटी गार्ड प्रमुख हैं, जिन्हें मरीजों के बिस्तर चेक करने से लेकर उनका मेडिकल रिकॉर्ड रखने की जिम्मेदारी दी गई है। वे रोगियों के इलाज में भी मदद कर रहे हैं। यही कर्मचारी मरीज के रिश्तेदारों के अस्पताल में आने वाले फोन भी रिसीव कर रहे हैं। इनमें से कई संक्रमण के कारण उनकी जान चली गई है।

‘आप हर शाम 7 बजे लोगों को बाहर निकलकर तालियां बजाते देखते होंगे लेकिन ये सिर्फ डॉक्टरों और नर्सों के लिए है, न कि उनके लिए जो सफेद कपड़े नहीं पहनते हैं लेकिन फिर भी अस्पताल में काम कर रहे हैं।’ यह कहना है कि एनिमी सलोटन का, जिनके पति एडवर्ड बिकोट की संक्रमण के कारण बीते महीने मौत हो गई। वे ब्रुकलिन हॉस्पिटल सेंटर में स्ट्रेचर और व्हीलचेयर से मरीजों को लाने-ले जाने का काम करते थे। एडवर्ड उन 32 अस्पताल कर्मचारियों में से एक थे जो न्यूयॉर्क में स्थित होने के कारण मारे गए।

इमरजेंसी रूम में काम करने वाली नर्सों को एन -95 सेकंड दिए गए: रिपोर्ट
आंकड़ों के मुताबिक, न्यूयार्क के हॉस्पिटलों में काम करने वाला 79% नॉन मेडिकल स्टाफ डॉक्टरों और नर्सों की मदद में लगा है। इमरजेंसी रूम में काम करने वाली नर्सों को एन -95 फेस दिए गए हैं, लेकिन नॉन मेडिकल स्टाफ के लिए वे भी उपलब्ध नहीं हैं। अस्पताल कर्मचारी यूनियन के मुताबिक, हमारे पास सुरक्षा के लिए संकाय या ग्लव्स जैसे साधन नहीं है, क्योंकि यह डॉक्टरों और नर्सों को पहले दिए जा रहे हैं। यूनियन के अध्यक्ष कार्मेन चार्ल्स बताते हैं कि जिन्र्क के अस्पतालों में 8500 नॉन-मेडिकल स्टाफ काम करता है जो खतरे में है।

कार्मेन के मुताबिक, ये सही है कि इस वक्त हमारी जरूरत है लेकिन किस कीमत पर? हमारी जान बचाने वाले संकाय, ग्लव्स कहां है? नॉन मेडिकल स्टाफ के विरोध को देखते हुए कुछ अस्पतालों में सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं, लेकिन अभी भी इनकी संख्या न के बराबर है।

ट्रम्प फिर पलटे, अब कहा- 1 लाख मौतों की आशंका

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पिछले महीने कोरोना से 60 हजार मौतें होने की आशंका जताई थी लेकिन अब इस बयान से पलट गए हैं। रविवार को फॉक्स न्यूज के साथ हुई टाउन हॉल मीटिंग में उन्होंने कहा कि से महामारी से हम 75, 80 हजार से 1 लाख लोगों को चुनने वाले हैं। ये चेतावनी है लेकिन हम एक भी जान नहीं नहीं देना चाहते। ’इसके साथ ही उन्होंने खुद का बचाव करते हुए कहा- कदम अगर हम समय पर कदम नहीं उठाते तो ये आंकड़ा 10 लाख पार हो सकता था। शायद 20 लाख लोग मारे गए। ‘

ट्रम्प का नया चुनावी वादा- वैक्सीन लाएंगे, सुरक्षित भविष्य विल
इधर, ट्रम्प ने महामारी को देखते हुए अपने चुनावी अभियान में कोरोना वैक्सीन को भी शामिल कर लिया है। फॉक्स न्यूज से बातचीत में उन्होंने कहा- हम अगले साल तक कोरोना वैक्सीन तैयार कर लेंगे और हर अमेरिकी को वायरस से सुरक्षित करेंगे ताकि सभी को एक बेहतर भविष्य दे सकें। ट्रम्प के इन बयानों को अमेरिकी मीडिया में नए चुनावी वादे के तौर पर देखा जा रहा है।





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