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सर्वोच्च न्यायालय ने कोविद -19 महामारी के दौरान सभी के लिए खाद्यान्न सुरक्षा सुनिश्चित करने का केंद्र और राज्यों को निर्देश देने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश की याचिका पर मंगलवार को विचार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने जयराम रमेश से कहा कि उन्हें इसके लिए केंद्र सरकार को प्रतिवेदन देना होगा।

शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि लोक सरकारी प्राधिकारियों को कोई प्रतिवेदन दिए बगैर ही संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर रहे हैं। न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने वीडियो कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से जयराम रमेश की याचिका पर विचार किया।

पीठ ने पाया कि याचिका में उठाई गई समस्या पहले सरकार के संज्ञान में नहीं लाई गई है, इसलिए इसे वापस लेने की अनुमति दी जाती है। ‘ पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को इस बारे में विस्तार से केंद्र को प्रतिवेदन देना चाहिए कि सरकार किस पर गर्व करेगी।

रमेश की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कहा कि याचिका में उठाया गया मुद्दा खाद्यान्न सुरक्षा से संबंधित है और याचिकाकर्ता ने खाद्य सुरक्षा कानून, 2013 तैयार करने में भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग अपने कार्यस्थलों से पैतृक निवास चले गए हैं और उनके पास स्थानीय क्षेत्र के राशन कार्ड हैं, जिन्हें उनके पैतृक स्थान वाले क्षेत्र के डेवलपर्सारी स्वीकार नहीं कर रहे हैं।

इस पर पीठ ने खर्शीद से सवाल किया कि क्या इस संबंध में सरकार को कोई प्रतिवेद दिया गया है। खुर्शीद ने कहा कि सरकार को इस बारे में कोई प्रतिवेदन नहीं दिया गया है। पीठ ने कहा कि समस्या यह है कि लोग सरकार को प्रतिवेदन देने की बजाए सीधा अनुच्छेद 32 के तहत शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर रहे हैं। पीठ ने कहा कि इस तरह की याचिका से पहले कहीं कोई कवायद तो की जानी चाहिए।

सर्वोच्च न्यायालय ने कोविद -19 महामारी के दौरान सभी के लिए खाद्यान्न सुरक्षा सुनिश्चित करने का केंद्र और राज्यों को निर्देश देने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश की याचिका पर मंगलवार को विचार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने जयराम रमेश से कहा कि उन्हें इसके लिए केंद्र सरकार को प्रतिवेदन देना होगा।

शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि लोक सरकारी प्राधिकारियों को कोई प्रतिवेदन दिए बगैर ही संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर रहे हैं। न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने वीडियो कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से जयराम रमेश की याचिका पर विचार किया।

पीठ ने पाया कि याचिका में उठाई गई समस्या पहले सरकार के संज्ञान में नहीं लाई गई है, इसलिए इसे वापस लेने की अनुमति दी जाती है। ‘ पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को इस बारे में विस्तार से केंद्र को प्रतिवेदन देना चाहिए कि सरकार किस पर गर्व करेगी।

रमेश की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कहा कि याचिका में उठाया गया मुद्दा खाद्यान्न सुरक्षा से संबंधित है और याचिकाकर्ता ने खाद्य सुरक्षा कानून, 2013 तैयार करने में भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग अपने कार्यस्थलों से पैतृक निवास चले गए हैं और उनके पास स्थानीय क्षेत्र के राशन कार्ड हैं, जिन्हें उनके पैतृक स्थान वाले क्षेत्र के डेवलपर्सारी स्वीकार नहीं कर रहे हैं।

इस पर पीठ ने खर्शीद से सवाल किया कि क्या इस संबंध में सरकार को कोई प्रतिवेद दिया गया है। खुर्शीद ने कहा कि सरकार को इस बारे में कोई प्रतिवेदन नहीं दिया गया है। पीठ ने कहा कि समस्या यह है कि लोग सरकार को प्रतिवेदन देने की बजाए सीधा अनुच्छेद 32 के तहत शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर रहे हैं। पीठ ने कहा कि इस तरह की याचिका से पहले कहीं कोई कवायद तो की जानी चाहिए।





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