भुवनेश्वर कुमार के करियर का टर्निंग पॉइंट

तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार (भुवनेश्वर कुमार) ने टीम इंडिया के लिए 21 टेस्ट, 114 वनडे और 43 टी 20 मैच खेले हैं।

नई दिल्ली। ना तवर मंदानी, ना मुंह पर गाली, लेकिन जब गेंद फेंकता है, तो हर फैन बजाता ताली है। ये तेज गेंदबाज बेहद खास है, अलग ही मिट्टी से बना हुआ है। तन और मन से बिलकुल शांत लेकिन हाथ से गेंद नहीं, तूफान निकलता है। एक ऐसा तूफान जो दिग्गज बल्लेबाजों को भी शांत रखता है। हम बात कर रहे हैं टीम इंडिया के तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार (भुवनेश्वर कुमार) की, जिनके स्विंग के आगे डेविड वॉर्नर, क्रिस गेल जैसे धुरंधर बल्लेबाज भी खामोश दिखाई देते हैं। 25 दिसंबर 2012 में डेब्यू करने वाले भुवी भारत के लिए 21 टेस्ट, 114 वनडे और 43 टी 20 मैच खेल चुके हैं। इन दिनों टीम इंडिया की तेज गेंदबाजी के खूब चर्चे हैं। लोग ज्यादा बुमराह और मोहम्मद शमी की बात करते हैं लेकिन अगर आप भी किसी विरोधी मध्यस्थ से पूछेंगे तो ये करेंगे कि उनके पांव भुवनेश्वर के सामने कांपते हैं। वैसे गजब की बात ये है कि भुवनेश्वर कुमार कभी क्रिकेटर बनना ही नहीं चाहते थे। उनका ख्वाब तो कुछ और ही था लेकिन एक लड़की ने अपनी किस्मत की रेखा खुद अपने हाथ से बनाई थी। आइए आपको बताते हैं कि भुवनेश्वर कुमार की जिंदगी के बारे में बताने वाले प्वाइंट के बारे में जिन्होंने उनकी जिंदगी बदल दी।

भुवनेश्वर कुमार की जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट

भुवनेश्वर (भुवनेश्वर कुमार) का जन्म 5 फरवरी, 1990 को मेरठ में हुआ। लोग प्यार से बिट्टू कहते थे। बिट्टू का सपना था कि वह आर्मी का अफसर बनेगा और देश की सेवा करेगा। हालांकि इस पहलवान के भाग्य में कुछ और केवल लिखा हुआ था। भुवनेश्वर कुमार जब 12 साल के थे तो उनकी जिंदगी में वह दिन आ गया, जिसके बारे में उन्होंने खुद कल्पना नहीं की थी। ये वो दिन था जब भुवनेश्वर कुमार की टीम इंडिया में एंट्री की स्क्रिप्ट लिखी जानी थी।

वर्ष 2002 में भुवनेश्वर (भुवनेश्वर कुमार) की बड़ी बहन रेखा ने अपने भाई को क्रिकेटर बनाने के बारे में सोचा। वे उन्हें विक्टोरिया पार्क की क्रिकेट एकेडमी ले गए। रेखा ने भुवनेश्वर को किट बैग दिलाया और खेल से जुड़ा हर सामान भुवी को बड़ी बहन से ही मिला। गजब की बात ये है कि रेखा रोजाना अपने भाई को एकेडमी तक छोड़ने और लेने जाती थी। यही नहीं वह अपने कोच से भुवनेश्वर की प्रोग्रेस के बारे में पूछती रहती थी। भुवी के कोच संजय रस्तोगी ने भी एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर भुवनेश्वर की बड़ी बहन रेखा उन्हें विक्टोरिया पार्क नहीं लाती तो शायद टीम इंडिया को इतना बेहतरीन स्विंग बॉलर नहीं मिल पाता।2007 में रणजी ट्रॉफी खेले भुवनेश्वर कुमार

महज 5 साल में भुवनेश्वर कुमार (भुवनेश्वर कुमार) ने अपने खेल से पूरे यूपी को हिलाकर रख दिया। पूरे यूपी में भुवनेश्वर कुमार की स्विंग के चर्चे थे। वर्ष 2007 में भुवनेश्वर कुमार को यूपी की ओर से रणजी ट्रॉफी में डेब्यू करने का मौका मिला। बंगाल के खिलाफ उन्होंने पहली ही पारी में महज 25 रन देकर 3 विकेट चटकाए।

सचिन को शून्य पर आउट किया

भुवनेश्वर कुमार (भुवनेश्वर कुमार) ने वर्ष 2008-09 के रणजी सीजन में अपने नाम का हल्ला पूरी दुनिया में मचा दिया। दरअसल रणजी ट्रॉफी में यूपी और मुंबई का मुकाबला हुआ और भुवनेश्वर कुमार ने मुंबई की हालत खराब की हुई थी। मुंबई ने महज 55 रन पर 3 विकेट गंवाए थे, जिसमें से झटके में भुवी ने किए थे। इसके बाद सचिन क्रीज पर आए और फिर भुवनेश्वर के हाथ से निकली एक इन स्विंग गेंदबाज। इस गेंदबाज ने सचिन के बल्ले का जोर साथ लिया और उन्हें शूट मिडविकेट पर फीटर ने लपक लिया। सचिन तेंदुलकर फर्स्ट क्लास क्रिकेट में पहली बार शून्य पर आउट हुए। बस यहीं से भुवनों कुमार का नाम पूरे देश में छा गया।

डेब्यू में भुवनेश्वर का ढाका

सचिन का विकेट लेने के 4 साल बाद भुवनेश्वर कुमार ने टीम इंडिया में जगह बना ली। उनका डेब्यू भी बेहद असंगत रहा। भारत और पाकिस्तान के बीच हो रही टी 20 सीरीज में भुवी (भुवनेश्वर कुमार) ने डेब्यू किया और उन्होंने अपने इंटरनेशनल करियर के पहले ओवर में ही नासिर जमशेद को जबर्दस्त इनस्विंगर पर बोल्ड कर दिया। इसके बाद उन्होंने अहमद शहजाद और उमर अकमल के भी विकेट लिए। भारत ये मैच 5 विकेट से हारा लेकिन भुवनेश्वर कुमार ने अपने 4 ओवर में महज 9 रन देकर 3 विकेट लिए।

भुवनेश्वर कुमार (भुवनेश्वर कुमार) ने वनडे डेब्यू भी पाकिस्तान के खिलाफ ही किया। भुवनेश्वर कुमार ने वनडे इंटरनेशनल करियर की पहली ही गेंद पर मोहम्मद हफीज को इनस्विंग पर बोल्ड कर दिया। अपने पहले वनडे में उन्होंने 9 ओवर में महज 27 रन देकर 2 विकेट लिए। इसके बाद भुवनेश्वर ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। भुवनेश्वर आज अच्छे स्विंग गेंदबाज ही नहीं बल्कि वे अब गजब की स्लोअर गेंदें भी फेंकते हैं। मौजूदा दौर में भुवनेश्वर कुमार से अच्छी नकलची गेंदबाज कोई गेंदबाज नहीं।

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प्रथम प्रकाशित: 4 मई, 2020, 5:20 PM IST


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