• देश में लॉकडाउन में ढील दिए जाने के बाद का अनुमान
  • तीसरे चरण में 17 मई तक जारी रहेगा लॉकडाउन

दैनिक भास्कर

04 मई, 2020, 06:49 अपराह्न IST

मुंबई। घरेलू रेटिंग एजेंसी इक्रा ने नए अनुमान में सोमवार को कहा कि जून तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था में 20 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। एजेंसी ने कोविड -19 महामारी की रोकथाम के लिए पूरे देश में लागू लॉकडाउन में ढील दी जाने की सरकार की घोषणा के बाद यह अनुमान व्यक्त किया है।

एक प्रतिशत की गिरावट या वृद्धि हो सकती है

देश में 40 दिन से जारी लॉकडाउन को तीसरे चरण में 17 मई तक बढ़ा दिया गया है। हालांकि सरकार ने संक्रमण से अप्रभावित क्षेत्रों में उद्योग जगत को कई ढील दी है। इकरा ने लॉकडाउन में ढील के बाद भी पूरे वित्त वर्ष 2020-21 के बारे में कहा कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इस दौरान एक प्रतिशत तक की गिरावट या वृद्धि आ सकती है। इससे पहले इकरा ने कहा था कि वित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी में एक प्रतिशत की गिरावट के दायरे में रह सकती है।

एपिसोड की स्थिति के कारण कनेक्टिविटी बेगी को बाधित करती है

इकरा ने कहा कि सरकार द्वारा दी गयी ढील से आर्थिक गतिविधियों को फिर से शुरू करने की छूट मिलेगी। लेकिन बड़े शहरी केंद्रों में कडी शर्तों के परिणामस्वरूप कनेक्टिविटी बाधित होगी। मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन, व्यापार, होटल और परिवहन जैसे क्षेत्रों में लेबर की उपलब्धता को लेकर दिक्कतें आ सकती हैं। यह आर्थिक विकास दर को कम करेगा। इकरा ने कहा कि अब हम उम्मीद करते हैं कि भारत की जीडीपी 2020-21 की पहली तिमाही में 16 से 20 प्रतिशत कम होगी। इसका मतलब है कि पूरे वित्त वर्ष में एक-दो प्रतिशत की गिरावट तय है।

सरकार ने जारी किया था 1.70 लाख करोड़ का पैकेज

सरकार ने पहले ही कोविद -19 संकट से लड़ने के लिए 1.7 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की थी। यह पर्याप्त नहीं कहा जा रहा है। कुछ लोगों ने यह भी कहा है कि प्रोत्साहन पैकेज का आधा से ज्यादा हिस्सा पहले से ही बजट 2020-21 घोषणाओं में शामिल कर लिया गया था। इस पैकेज में नया कुछ भी नहीं है। यहां तक ​​कि कई लॉटरी सरकार की ओर से उपलब्ध सीमित वित्तीय स्थिति की ओर इशारा करते हैं, लेकिन ऐसी भी खबरें हैं कि सरकार एक नए पैकेज पर काम कर रही है।

आरबीआई ने दी लिक्विडिटी की सुविधा थी

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने प्रमुख नीतिगत दर (रेपो) में 0.75 प्रतिशत की भारी कटौती की है और विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अर्थव्यवस्था के जरूरतमंद क्षेत्रों के लिए लिक्विडिटी उपलब्ध कराने के लिए कई उपाय भी किए हैं। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांता दास ने भी कहा है कि साढ़े तीन प्रतिशत राजकोषीय और व्यवसाय के लक्ष्य को पूरा करना चुनौतीपूर्ण होगा और सरकार बजट टारगेट को मिस कर सकती है।





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