• अपने पड़ोसी देशों नेपाल, भूटान और श्रीलंका से भी पीछे भारत है
  • पिछले तीन वर्षों से लगातार दो-दो अंक नीचे खिसक रहा है

दैनिक भास्कर

03 मई, 2020, 09:38 पूर्वाह्न IST

नई दिल्ली। आज वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे है। हर साल 3 मई को यह इतिहास में मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मकसद बच्चों में प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा तय करना है। राष्ट्रपति स्वतंत्रता के मामले में भारत का स्थान बहुत नीचे है। विश्व राष्ट्रपति फ्रीडम इंडेक्स में 180 देशों की सूची में भारत 142 वें नंबर पर आता है। पिछले चार वर्षों से भारत का स्थान लगातार गिर रहा है।
इस मामले में भारत अपने पड़ोसी देश नेपाल (112), भूटान (67), श्री लंका (127) और म्यांमार (139) से पीछे है। हालाँकि, पाकिस्तान (145), बांग्लादेश (151) और चीन (177) में भारत से बहुत खराब स्थिति है। भारत का स्थान पिछले चार वर्षों से नीचे खिसक रहा है। 2016 में भारत का स्थान 133 था जो 2017 में तीन अंक खिसकर 136, 2018 में 138, 2019 में 140 और 2020 में 142 प्रतिशत हो गया है। भारत का स्थान पिछले तीन वर्षों से लगातार दो-दो अंक लुढ़क रहा है।

भारत में पांच साल में पत्रकारों पर 198 हमले हुए
एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2014 से 2019 तक पत्रकारों पर 198 हमले हुए हैं। इसमें 36 हमले वर्ष 2019 में हुए। 40 हमलों में उपयोगकर्ता की हत्या कर दी गई, जिसमें 21 हत्याएं सीधे तौर पर समाचार छापने से नाराज होने पर की गई। कुल सवारी के तीन मामलों में एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई है।

विश्व राष्ट्रपति फ्रीडम डे मनाने का मकसद
खोज के कई देशों में पत्रकारों और राष्ट्रपति पर अत्याचार होता है। मीडिया संगठनों को सरकारें परेशान करती हैं। उन पर व्यंजनों लगाया जाता है, छाप डाल जाती है। साथ ही विज्ञापन बंद कर आर्थिक रूप से नुकसान भी पहुंचाया जाता है। पत्रकारों पर हमले होते हैं। इसके नेतृत्व यूनेस्को ने 1993 से विश्व राष्ट्रपति फ्रीडम डे मनाने की शुरुआत की थी। इस मौके पर नागरिकों और सरकारों को जिम्मेदार बनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। यूनेस्को हर साल इसका थीम और मेजबान देश तय करता है। इस वर्ष की थीम फ्ट सेफ्टी ऑफ जर्नलिस्ट-प्रेस फ्रीडम और मीडिया सेफ़्टर’रखी गई और बुकिंग नीदरलैंड को मिली है।

इसलिए तीन मई को मनाया जाता है विश्व राष्ट्रपति फ्रीडम डे
अफ्रीका में पत्रकारों ने 1991 में प्रेस की आजादी को लेकर एक पहल की थी। यूनेस्को ने इसको लेकर नामीबिया में एक सम्मेलन किया था। यह सम्मेलन 29 अप्रैल से तीन मई तक चला था। इसके बाद प्रेस की आजादी से जुड़ा एक बयान जारी किया गया था। इसको कहा डिक्लेरेशन ऑफ विंडहोक ’कहा जाता है। दरअसल, विंडहोक नामीबिया की राजधानी है। इस सम्मेलन की दूसरी जयंती 1993 में यूनेस्को और संयुक्त राष्ट्र महासभा ने हर साल तीन मई को विश्व राष्ट्रपति फ्रीडम डे मनाने का जश्न मनाया था। तब से हर साल 3 मई को यह दिन मनाया जाता है।

नरदेव पहले नंबर पर और नार्थ कोरिया आखिरी पर
2020 के विश्व अध्यक्ष फ्रीडम इंडेक्स में नार्वे पहले स्थान पर और नार्थ कोरिया अंतिम नंबर पर है। नार्वे इस लिस्ट में लगातार चार वर्षों से नंबर एक पर है। वहीं, नार्थ कोरिया इससे पहले 2018 में भी अंतिम स्थान पर था। 2019 में यह एक अंक ऊपर आया था और अंतिम स्थान पूर्वी अफ्रीकी देश इरीट्रिया पहुंच गया था। जब से यह इंडेक्स आया है नार्थ कोरिया और इरीट्रिया ही आखिरी के पायदानों पर बने हुए हैं।

कोरोना महामारी ने मीडिया पर असर डाला
पत्रकारों में पत्रकारों की सुरक्षा पर नजर रखने वाली संस्था (रिपोर्टर विदआउट बॉर्डर) के महासचिव क्रिस्टोफ डेलोएर ने कहा कि कोरना महामारी ने बच्चों की मीडिया पर गलत असर डाला है। चीन, ईरान और इराक सहित कई ऐसे देश हैं, जहां की मीडिया ने सरकार के दबाव मे सही जानकारी नहीं दी। इराक में कोरोना के आधिकारिक आंकड़ों पर सवाल उठाने वाली कहानी प्रकाशित करने पर न्यूज एजेंसी रॉयटर्स का लाइसेंस तीन महीने के लिए रद्द कर दिया गया है। चीन का राष्ट्रपति फ्रीडम इंडेक्स में 177, अमेरिकी 162 और Hun 89 वें स्थान पर है।





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