• स्वास्थ्य मंत्रालय के लिए हाइड्रॉक्सक्लोरोक्वीन की खरीदारी सरकारी कंपनी हिंदुस्तान लेटेक्स लिमिटेड लाइफकेयर करेगी
  • कोरोना टास्क फोर्स ने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन को चुनिंदा लोगों पर कुछ पाबंदियों के साथ इस्तेमाल की सिफारिश की है।

दैनिक भास्कर

02 मई, 2020, 08:48 बजे IST

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने दो घरेलू कंपनियों को हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा की 11.45 करोड़ शेयरों का लाइसेंस दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के लिए इसकी खरीद सरकारी कंपनी हिंदुस्तान लेटेक्स लिमिटेड (एचएलएल) लाइफकेयर करेगी। यह कंपनी दवा और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े सामान का उत्पादन करती है। शनिवार को मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की। उनके मुताबिक, दो भारतीय कंपनियों आईपीसीए और गोडस कैडिला को यह भर्ती दी गई है। अब तक 6.64 करोड़ मिल मिल चुके हैं और बाकी 16 मई तक मिल जाएंगे।

अधिकारियों के मुताबिक, 4.3 करोड़ राज्यों में बांट दी गई हैं जबकि बाकी केंद्र और राज्य के बफर स्टॉक में रखे गए हैं। कुछ राज्यों ने सीधे कंपनी से भी 3.8 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। ऐसे में राज्यों के पास मौजूदा समय में 10.44 करोड़ हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की मात्रा है।

कुछ पाबंदियों के साथ इस्तेमाल की जा सकती है दवा

हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन मलेरिया की दवा है। हालांकि, कोरोना के लिए गठित राष्ट्रीय टास्क फोर्स ने प्रोफिलैक्सिस के तौर पर इसका इस्तेमाल की सिफारिश की है। टास्कफोर्स ने कहा कि यह कोरोना की दवा नहीं है। प्रोटोकॉल के तहत इसके इस्तेमाल का सुझाव दिया गया है। खासतौर पर चेतों के इलाज में जुटे स्वास्थ्यकर्मियों को यह दी जा सकती है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीजीसीआई) ने आपातकालीन स्थिति में कुछ पांबियर्स के साथ इसके इस्तेमाल को मंजूरी दी है। 12 साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को यह दवा नहीं दी जा सकती है। रेटिनोपैथी या इस दवा के प्रति संवेदनशील रोगियों पर भी इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

तीन तरह के लोगों पर हो सकता है इस्तेमाल किया है

  1. ऐसे स्वास्थ्यकर्मी जिनमें लक्षण नहीं हैं, लेकिन वे कोरोना के हानिकारक या हानिकारक रोगियों के इलाज या स्वास्थ्य सुरक्षा में लगे हुए हैं।
  2. ऐसे लोग जो रायपुर से सतर्क होने की पुष्टि वाले व्यक्तियों के संपर्क में आए हैं और उनमें कोई लक्षण नजर नहीं आ रहे हैं।
  3. कोरोना से निकाय ऐसे लोग हैं, जिन्हें गंभीर बीमारी है और उन्हें आईसीयू में रखने की जरूरत है। यह दवा सिर्फ डॉक्टरों की देखरेख में ही दी जा सकती है।





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