लॉकडाउन के दौरान बढ़ रहे हैं साइबर खतरे, व्यापारियों के साझेदार हो गए हैं अधिक सक्रिय

Bytechkibaat7

May 7, 2020 , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,


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लंबे समय तक लॉकडाउन और घर से डिजिटल तरीके से काम करने की वजह से नेपाल ही नहीं पूरी दुनिया में इंटरनेट का इस्तेमाल पहले से 50 फीसदी ज्यादा हो गया है। वेबिनार, वीडियो क्रांफ्रेंसिग औार डिजिटल कक्षाओं का चलन लगातार बढ़ रहा है। नेपाल में पिछले दिनों ऐसे कई मामले सामने आए जब वीडियो कांफ्रेंसिंग और वेबिनार के दौरान व्यापारियों ने टाइपिंग की और लोगों को नौकरी दिलाने की कोशिशें हुईं।

गूगल मीट एप्लिकेशन के जरिये नेपाल में पिछले दिनों हुए एक वेबिनार में स्पैमर ने तेजी की लेकिन उसके बाद में हटा दिया गया था। उसी तरह 29 अप्रैल को भी एक वेबिनार इसी कारण से बीच में ही खत्म कर देना पड़ा क्योंकि यहां व्यापारियों के एक पूरे परिसर ने टाइपिंग की, जिनकी पता लगाना मुश्किल हो गई है। ऐसे हमले ज्यादातर लड़कियों या महिलाओं की ओर से आयोजित ई कार्यक्रमों में विशेष रूप से हो रहे हैं। इस दौरान अश्लील टिप्पणी करना और समाचार के बीच में आकर कार्यक्रम को बरबाद करने की कोशिश करने जैसी हरकतें शामिल है।

जेनेसिस एमपी अकादमी की सीईओ अंजली फुयाल के मुताबिक उन्होंने ईमेल के जरिये ऐसे बयानों को पकड़ने की कोशिश की तो पता चला कि नेपाल में ऐसे निवेशकों को बहुत ही सुनियोजित तरीके से साम्राज्य बनाकर काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि व्यापारियों ने फेसबुक पर फर्जी अकाउंट बनाकर देश विदेश में होने वाले हर तरह के वेबिनार की जानकारी इकट्ठी करते हैं और जैसे ही वेबिनार शुरू होता है, वह वेबसाइट के जरिये उसमे कंप्यूटर प्रोसेसिंग डालने और स्थिरता करने की कोशिश तेज कर देते हैं।

येपता चला गया कि शेर्स का यह पार्टनर कॉलेज के छात्रों का है जो इस साइबर क्राइम का अंजाम नहीं जानता। तमाम आईटी कंपनियों और इससे जुड़े लोगों ने सरकार से मांग की है कि ऐसे कब में साइबर कानूनों को सख्ती से पालन करना और दोषियों को सजा देना जरूरी है।

साइबर मामलों के जानकार सचिन ठाकुरी के मुताबिक लॉकडाउन के दौरान जो लोग भी वेबिनार या वीडियो कांफ्रेंसिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें साइबर सुरक्षा के तौर तरीके भी समझना चाहिए। ये जरूरी है कि सरकार साइबर कानूनों को सख्त करे, लेकिन यूजर्स को भी इसके सुरक्षा मानकों को समझने की जरूरत है।

सूचना और तकनीकी मामलों के मंत्रालय के एक अधिकारी लोकराज शर्मा का कहना है कि सरकार को इसके बारे में पूरी जानकारी है। दरअसल कोरोनावायरस की वजह से अचानक हुए लॉकडाउन में इसकी सुरक्षा तायारियों का मौका नहीं मिला, लेकिन इन घटनाओं को देखते हुए सरकार अब इसके लिए एक योजना बनाने में लगी है।

उनके अनुसार जूम, स्काइप और मैसेन्जर का इस्तेमाल करते हुए हमें ध्यान रखना चाहिए कि इससे हमारी तमाम सूचनाएं और डेटा कहीं भी जा सकता है जो हमारी गोपनीयतासे के लिए बहुत बड़ा खतरा हो सकता है।

सार

  • नेपाल के कई वेबिनार और वीडियो कांफ्रेंसिग में व्यापारियों की बाधा
  • जूम, स्काइप, मैसेन्जर से निजता को टोन, डेटा हो सकता है, वह लोकप्रिय है

विस्तार

लंबे समय तक लॉकडाउन और घर से डिजिटल तरीके से काम करने की वजह से नेपाल ही नहीं पूरी दुनिया में इंटरनेट का इस्तेमाल पहले से 50 फीसदी ज्यादा हो गया है। वेबिनार, वीडियो क्रांफ्रेंसिग औार डिजिटल कक्षाओं का चलन लगातार बढ़ रहा है। नेपाल में पिछले दिनों ऐसे कई मामले सामने आए जब वीडियो कांफ्रेंसिंग और वेबिनार के दौरान व्यापारियों ने टाइपिंग की और लोगों को नौकरी दिलाने की कोशिशें हुईं।

गूगल मीट एप्लिकेशन के जरिये नेपाल में पिछले दिनों हुए एक वेबिनार में स्पैमर ने तेजी की लेकिन उसके बाद में हटा दिया गया था। उसी तरह 29 अप्रैल को भी एक वेबिनार इसी कारण से बीच में ही खत्म कर देना पड़ा क्योंकि यहां व्यापारियों के एक पूरे परिसर ने टाइपिंग की, जिनकी पता लगाना मुश्किल हो गई है। ऐसे हमले ज्यादातर लड़कियों या महिलाओं की ओर से आयोजित ई कार्यक्रमों में विशेष रूप से हो रहे हैं। इस दौरान अश्लील टिप्पणी करना और समाचार के बीच में आकर कार्यक्रम को बरबाद करने की कोशिश करने जैसी हरकतें शामिल है।

जेनेसिस एमपी अकादमी की सीईओ अंजली फुयाल के मुताबिक उन्होंने ईमेल के जरिये ऐसे बयानों को पकड़ने की कोशिश की तो पता चला कि नेपाल में ऐसे निवेशकों को बहुत ही सुनियोजित तरीके से साम्राज्य बनाकर काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि व्यापारियों ने फेसबुक पर फर्जी अकाउंट बनाकर देश विदेश में होने वाले हर तरह के वेबिनार की जानकारी इकट्ठी करते हैं और जैसे ही वेबिनार शुरु होता है, वह वेबसाइट के जरिये उसमे कंप्यूटर प्रोसेसिंग डालने और स्थिरता करने की कोशिश तेज कर देते हैं।

येपता चला गया कि शेर्स का यह पार्टनर कॉलेज के छात्रों का है जो इस साइबर क्राइम का अंजाम नहीं जानता। तमाम आईटी कंपनियों और इससे जुड़े लोगों ने सरकार से मांग की है कि ऐसे कब में साइबर कानूनों को सख्ती से पालन करना और दोषियों को सजा देना जरूरी है।

साइबर मामलों के जानकार सचिन ठाकुरी के मुताबिक लॉकडाउन के दौरान जो लोग भी वेबिनार या वीडियो कांफ्रेंसिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें साइबर सुरक्षा के तौर तरीके भी समझना चाहिए। ये जरूरी है कि सरकार साइबर कानूनों को सख्त करे, लेकिन यूजर्स को भी इसके सुरक्षा मानकों को समझने की जरूरत है।

सूचना और तकनीकी मामलों के मंत्रालय के एक अधिकारी लोकराज शर्मा का कहना है कि सरकार को इसके बारे में पूरी जानकारी है। दरअसल कोरोनावायरस की वजह से अचानक हुए लॉकडाउन में इसकी सुरक्षा तायारियों का मौका नहीं मिला, लेकिन इन घटनाओं को देखते हुए सरकार अब इसके लिए एक योजना बनाने में लगी है।

उनके मुताबिक जूम, स्काइप और मैसेन्जर का इस्तेमाल करते हुए हमें ध्यान रखना चाहिए कि इससे हमारी तमाम सूचनाएं और डेटा कहीं भी जा सकता है जो हमारी गोपनीयतासे के लिए बहुत बड़ा खतरा हो सकता है।





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