• यह एक तरह का खाता ही है लेकिन इसका फायदा केवल सरकारी कर्मचारियों को मिलता है
  • सरकारी कर्मचारी अपनी सैलरी का 15 प्रति तक जीपीएफ खाते में योगदान कर सकता है

दैनिक भास्कर

06 मई, 2020, 09:21 पूर्वाह्न IST

नई दिल्ली। सरकार ने सामान्य प्रोविडेंट फंड (जीपीएफ) सहित अन्य फंडों की ब्याज दरों में कटौती की है। इसका कहना है कि अप्रैल-जून 2019 के क्वार्टर में ग्राहकों को 7.1% की दर से ब्याज मिलेगा। इसके पहले क्वार्टर में यह दर 7.9% थी। वित्त मंत्रालय के नोटिफिकेशन के अनुसार- यह ब्याज दर केंद्रीय कर्मचारियों, रेलवे और सुरक्षाबलों के प्रोविडेंट फंड्स के अलावा पब्लिक प्रोविडेंट फंड पर भी लागू होगा।

नई ब्याज दर 1 अप्रैल 2020 से प्रभावी मानी जाएगी। बुनियादी निधि के नाम इस प्रकार हैं:
द जनरल प्रोविडेंट फंड (केंद्रीय सेवा)
दर्न्रिब्यूटरी प्रोविडेंट फंड (भारत)
द ऑल इंडिया सर्विस प्रोविडेंट फंड
द स्टेट रेलवे प्रोविडेंट फंड
द जनरल प्रोविडेंट फंड (रक्षा सेवा)
द इंडियन ऑर्डनेंस डिपार्टमेंट प्रोविडेंट फंड
द इंडियन ऑर्डनेंस फैक्ट्रीज वर्कमेन्स प्रोविडेंट फंड
द इंडियन नेवल डाकयॉर्ड वर्कमेन्स प्रोविडेंट फंड
द डिफेंस सर्विस ऑफिसर्स प्रोविडेंट फंड

द आर्म्ड फोर्सेस पर्सनल प्रोविडेंट फंड

एक तरह का प्रॉविडेंट फंड है जीपीएफ
यह एक तरह का प्रोविडेंट फंड अकाउंट ही है लेकिन यह हर तरह के इंप्लॉइज के लिए नहीं होता है। जीपीएफ का फायदा केवल सरकारी कर्मचारियों को ही मिलता है और वह भी रिटायरमेंट के बाद। ये एक तरह की रिटायरमेंट पीडलानिंग होती है, जीसकि, इसकी राशि कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद मिलती है। सरकारी कर्मचारी अपनी सैलरी का 15 प्रति तक जीपीएफ खाते में योगदान कर सकता है।

इस तरह के काम है
जीपीएफ खाता में सरकारी कर्मचारी को किश्त में एक निवेशित समय तक योगदान देना होता है। खाता हो ठेकेदार जीपीएफ खोलते कब नॉमिनी भी बना सकता है। खाता होल्डर को रिटायरमेंट के बाद में जमा पैसों का भुगतान किया जाता है, जबकि अगर खाता हो मॉड्यूल को कुछ हो जाए तो नॉमिनी को भुगतान किया जाता है।

लोन भी होता है ब्याज मुक्त
जीपीएफ से लोन लेने की भी सुविधा है और खास बात यह है कि लोन ब्याज मुक्त होता है। कोई कर्मचारी अपने पूरे करियर में बहुत बार बार GPF से लोन ले सकता है यानी इसका कोई निश्चित संख्या नहीं है।

पीएएफ और पीसीएफ से अलग है

  • प्रोविडेंट फंड (पीएफ) खाता किसी भी इंप्लॉई का हो सकता है। फिर वह सरकारी नौकरी में हो या प्राथमिक हो। इसे इंप्लॉयर द्वारा खोला जाता है और इंप्लॉई व इंप्लॉयर दोनों की ओर से 12-12 फीसदी का योगदान दिया जाता है। इंप्लॉयर के 12 फीसदी में से 8.33 फीसदी इंप्लॉई की पेंशन में जाता है। इंप्लॉई अपने पीएफ फंड को जरूरत पड़ने पर हटाया जा सकता है।
  • पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PGF) अकांउट को कोई भी नागरिक खुद से खुलवा सकता है। इसके लिए उसका इंप्लॉई होना जरूरी नहीं है। यह सेविंग्स कम टैक्स सेविंग्स अकाउंट होता है। इसका फायदा यह है कि इसमें होने वाला डिपॉजिट टैक्स फ्री रहता है, उस पर मिलने वाले ब्याज और मैच्योरिटी पर मिलने वाला पैसा पर भी टैक्स नहीं लगता है। पीसीबीएफ का मैच्योरिटी पीरियड 15 साल है। इसमें सालाना 500 रुपए के न्यूनतम निवेश से लेकर 1.5 लाख रुपए तक का अधिकतम निवेश किया जा सकता है।





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